NPS संपत्ति ₹15.95 लाख करोड़ के पार, EPS में 7.98 करोड़ योगदानकर्ता; भारत की पेंशन व्यवस्था में ऐतिहासिक विस्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 7 मई 2026 को बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत प्रबंधित कुल संपत्ति ₹15.95 लाख करोड़ तक पहुँच गई है, जो भारत की रिटायरमेंट बचत व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा आँकड़ा है। इसके साथ ही एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) में योगदान देने वाले सदस्यों की संख्या अप्रैल 2026 तक बढ़कर 7.98 करोड़ हो गई है।
मुख्य आँकड़े और योजनाओं की स्थिति
अटल पेंशन योजना (APY) के तहत प्रबंधित संपत्ति ₹51,400 करोड़ तक पहुँच गई है। NPS में नामांकित सब्सक्राइबर्स की संख्या 2.17 करोड़ से अधिक हो गई है, जबकि APY के तहत 8.96 करोड़ नामांकन दर्ज किए गए हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह वृद्धि भारत की पेंशन व्यवस्था में लगातार मजबूत होती भागीदारी को दर्शाती है।
सामाजिक पेंशन योजनाओं का दायरा
गैर-अंशदायी सामाजिक पेंशन योजनाएँ भी आय सहायता का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई हैं। अप्रैल 2026 तक केंद्र सरकार की सामाजिक पेंशन योजना के तहत 2.92 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को कवर किया गया है। इसी अवधि में राज्य सरकारों ने 1.41 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को पेंशन सहायता प्रदान की है।
केंद्र स्तर पर नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम (NSAP) ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है। अगस्त 2025 तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने NSAP के तहत लाभार्थियों को प्रति माह ₹50 से लेकर ₹3,800 तक की अतिरिक्त सहायता राशि देना शुरू किया है, जिससे अधिकांश राज्यों में औसत मासिक पेंशन लगभग ₹1,000 तक पहुँच गई है।
परिभाषित लाभ योजनाओं की भूमिका
भारत की पेंशन व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा अभी भी परिभाषित लाभ (Defined-Benefit) पेंशन व्यवस्था पर आधारित है। इसके तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों को पेंशन दी जाती है, जिसमें 34 लाख से अधिक रक्षा पेंशनभोगी और 14 लाख रेलवे पेंशनभोगी शामिल हैं। गौरतलब है कि यह व्यवस्था सरकारी खजाने पर दीर्घकालिक दायित्व बनाती है, जो नीति-निर्माताओं के लिए एक सतत चुनौती है।
नीतिगत प्राथमिकताएँ और आगे की राह
आधिकारिक बयान में कहा गया कि बढ़ती जीवन प्रत्याशा और रोज़गार के बदलते स्वरूप को देखते हुए रिटायरमेंट सुरक्षा को मजबूत करना सार्वजनिक नीति की महत्वपूर्ण प्राथमिकता बन गई है। सरकार का फोकस अब सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाने और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए सेवाओं को बेहतर बनाने पर है। यह ऐसे समय में आया है जब असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिक अभी भी किसी औपचारिक पेंशन योजना के दायरे से बाहर हैं।