कर्नाटक में दही की कीमत कटौती पर BJP नेता आर. अशोक का निशाना, CM शिवकुमार पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को राज्य की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि उसने पहले दही की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की और अब जनता के तीखे विरोध के बाद मामूली कटौती की घोषणा कर जनाक्रोश को शांत करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने माँग की कि सरकार दूध और दही, दोनों की कीमतों में की गई बढ़ोतरी पूरी तरह वापस ले।
मुख्य घटनाक्रम
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सोमवार, 2 नवंबर को घोषणा की थी कि उन्होंने कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) को दही की कीमतें कम करने का निर्देश दिया है। शिवकुमार ने दूध की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा कि इससे राज्य भर के 11 लाख किसान परिवारों और 25 लाख दूध विक्रेताओं को सीधा लाभ मिलेगा।
हालाँकि, आर. अशोक ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि पहले दही की कीमत में ₹14 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई और अब जन-दबाव के बाद उसमें मामूली कटौती की जा रही है — यह जनता को राहत नहीं, बल्कि भ्रम में रखने की रणनीति है।
BJP का आरोप: किसान की आड़ में उपभोक्ता पर बोझ
अशोक ने कहा, 'यह कैसी जनहितैषी सरकार है? पहले कीमतें बहुत ज़्यादा बढ़ा दी जाती हैं, और फिर जनता को धोखा देने के लिए मामूली कटौती कर दी जाती है।' उनके अनुसार दूध और दही की बढ़ी हुई कीमतों ने आम परिवारों के मासिक बजट पर पहले ही अतिरिक्त दबाव डाला है।
अशोक ने यह भी दावा किया कि पिछली BJP सरकार के कार्यकाल में उपभोक्ताओं पर सीधा आर्थिक बोझ डाले बिना किसानों को प्रोत्साहन दिया जाता था। उनका कहना है कि सरकार को किसानों की मदद का खर्च सरकारी कोष से उठाना चाहिए, न कि उसे आम जनता पर थोपना चाहिए।
CM की टिप्पणी पर पलटवार
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने दूध-दही की कीमत वृद्धि का बचाव करते हुए एक बयान में कथित तौर पर बोतलबंद पानी की कीमत बढ़ने पर किसी के न बोलने का उदाहरण दिया था। अशोक ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दूध और दही रोज़मर्रा की ज़रूरी वस्तुएँ हैं, जिनकी तुलना बोतलबंद पानी जैसे वैकल्पिक उत्पाद से नहीं की जा सकती। आलोचकों का कहना है कि ऐसा तर्क सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।
आम जनता पर असर
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब महँगाई पहले से आम परिवारों की रसोई पर दबाव बना रही है। दूध और दही जैसी बुनियादी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी मध्यम और निम्न-आय वर्ग को सबसे अधिक प्रभावित करती है। गौरतलब है कि यह कर्नाटक में डेयरी उत्पादों की कीमतों को लेकर उपभोक्ता और किसान हित के बीच चली आ रही राजनीतिक खींचतान की नई कड़ी है।
क्या होगा आगे
अशोक ने माँग की है कि सरकार न केवल दही, बल्कि दूध की कीमतों में भी की गई बढ़ोतरी पर पुनर्विचार करे। उन्होंने ज़ोर दिया कि सरकार का दायित्व है कि वह उपभोक्ताओं को राहत दे और किसानों को प्रोत्साहन देने का वित्तीय बोझ सरकारी संसाधनों से वहन करे। इस मसले पर KMF और राज्य सरकार की आगामी प्रतिक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी हैं।