3 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कर्नाटक में दही की कीमत कटौती पर BJP नेता आर. अशोक का निशाना, CM शिवकुमार पर उठाए सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कर्नाटक में दही की कीमत कटौती पर BJP नेता आर. अशोक का निशाना, CM शिवकुमार पर उठाए सवाल

सारांश

कर्नाटक में दही की कीमत में ₹14 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद मामूली कटौती पर BJP नेता आर. अशोक ने CM शिवकुमार को घेरा। उनका सवाल सीधा है — किसानों की मदद का बोझ उपभोक्ताओं पर क्यों, सरकारी कोष पर क्यों नहीं?

मुख्य बातें

अशोक ने 3 नवंबर 2026 को कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि दही की मामूली कीमत कटौती जनाक्रोश को शांत करने की चाल है।
शिवकुमार ने KMF को दही की कीमतें घटाने का निर्देश दिया, और दूध मूल्य वृद्धि का बचाव किया।
शिवकुमार के अनुसार दूध मूल्य वृद्धि से 11 लाख किसान परिवारों और 25 लाख दूध विक्रेताओं को फायदा होगा।
दही की कीमत में पहले ₹14 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद जनता का कड़ा विरोध सामने आया।
अशोक ने माँग की कि सरकार किसानों को प्रोत्साहन सरकारी कोष से दे, उपभोक्ताओं पर बोझ न डाले।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को राज्य की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि उसने पहले दही की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की और अब जनता के तीखे विरोध के बाद मामूली कटौती की घोषणा कर जनाक्रोश को शांत करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने माँग की कि सरकार दूध और दही, दोनों की कीमतों में की गई बढ़ोतरी पूरी तरह वापस ले।

मुख्य घटनाक्रम

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सोमवार, 2 नवंबर को घोषणा की थी कि उन्होंने कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) को दही की कीमतें कम करने का निर्देश दिया है। शिवकुमार ने दूध की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा कि इससे राज्य भर के 11 लाख किसान परिवारों और 25 लाख दूध विक्रेताओं को सीधा लाभ मिलेगा।

हालाँकि, आर. अशोक ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि पहले दही की कीमत में ₹14 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई और अब जन-दबाव के बाद उसमें मामूली कटौती की जा रही है — यह जनता को राहत नहीं, बल्कि भ्रम में रखने की रणनीति है।

BJP का आरोप: किसान की आड़ में उपभोक्ता पर बोझ

अशोक ने कहा, 'यह कैसी जनहितैषी सरकार है? पहले कीमतें बहुत ज़्यादा बढ़ा दी जाती हैं, और फिर जनता को धोखा देने के लिए मामूली कटौती कर दी जाती है।' उनके अनुसार दूध और दही की बढ़ी हुई कीमतों ने आम परिवारों के मासिक बजट पर पहले ही अतिरिक्त दबाव डाला है।

अशोक ने यह भी दावा किया कि पिछली BJP सरकार के कार्यकाल में उपभोक्ताओं पर सीधा आर्थिक बोझ डाले बिना किसानों को प्रोत्साहन दिया जाता था। उनका कहना है कि सरकार को किसानों की मदद का खर्च सरकारी कोष से उठाना चाहिए, न कि उसे आम जनता पर थोपना चाहिए।

CM की टिप्पणी पर पलटवार

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने दूध-दही की कीमत वृद्धि का बचाव करते हुए एक बयान में कथित तौर पर बोतलबंद पानी की कीमत बढ़ने पर किसी के न बोलने का उदाहरण दिया था। अशोक ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दूध और दही रोज़मर्रा की ज़रूरी वस्तुएँ हैं, जिनकी तुलना बोतलबंद पानी जैसे वैकल्पिक उत्पाद से नहीं की जा सकती। आलोचकों का कहना है कि ऐसा तर्क सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।

आम जनता पर असर

यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब महँगाई पहले से आम परिवारों की रसोई पर दबाव बना रही है। दूध और दही जैसी बुनियादी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी मध्यम और निम्न-आय वर्ग को सबसे अधिक प्रभावित करती है। गौरतलब है कि यह कर्नाटक में डेयरी उत्पादों की कीमतों को लेकर उपभोक्ता और किसान हित के बीच चली आ रही राजनीतिक खींचतान की नई कड़ी है।

क्या होगा आगे

अशोक ने माँग की है कि सरकार न केवल दही, बल्कि दूध की कीमतों में भी की गई बढ़ोतरी पर पुनर्विचार करे। उन्होंने ज़ोर दिया कि सरकार का दायित्व है कि वह उपभोक्ताओं को राहत दे और किसानों को प्रोत्साहन देने का वित्तीय बोझ सरकारी संसाधनों से वहन करे। इस मसले पर KMF और राज्य सरकार की आगामी प्रतिक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और जब विरोध बढ़ा तो पीछे हटी। असली बहस यह है कि डेयरी किसानों को प्रोत्साहन देने की ज़िम्मेदारी सरकारी बजट की है या उपभोक्ता की जेब की — यह सवाल कर्नाटक तक सीमित नहीं, बल्कि देश भर में कृषि-उपभोक्ता संतुलन की नीतिगत बहस का हिस्सा है। BJP का यह हमला राजनीतिक दृष्टि से तीखा है, लेकिन यह भी उल्लेखनीय है कि पिछली BJP सरकारों में भी डेयरी मूल्य निर्धारण विवादमुक्त नहीं रहा। जब तक राज्य सरकार किसान-प्रोत्साहन और उपभोक्ता-राहत के बीच पारदर्शी वित्तीय ढाँचा नहीं बनाती, यह राजनीतिक खींचतान हर बार कीमत बढ़ने पर दोहराई जाती रहेगी।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में दही की कीमत में कितनी बढ़ोतरी हुई थी?
कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) ने दही की कीमत में ₹14 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद जनता के कड़े विरोध के चलते मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने KMF को कीमतें आंशिक रूप से कम करने का निर्देश दिया।
CM शिवकुमार ने दूध-दही की कीमत वृद्धि का बचाव कैसे किया?
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि दूध की कीमतों में बढ़ोतरी से राज्य के 11 लाख किसान परिवारों और 25 लाख दूध विक्रेताओं को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने इसे किसान-हितैषी कदम बताया।
BJP नेता आर. अशोक ने सरकार से क्या माँग की?
आर. अशोक ने माँग की कि सरकार दूध और दही, दोनों की कीमतों में की गई बढ़ोतरी पूरी तरह वापस ले। उनका कहना है कि किसानों को प्रोत्साहन देने का खर्च सरकार को अपने कोष से उठाना चाहिए, न कि उपभोक्ताओं पर थोपना चाहिए।
KMF क्या है और इसकी कर्नाटक में क्या भूमिका है?
कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) राज्य सरकार के अधीन एक सहकारी संस्था है जो कर्नाटक में दूध और डेयरी उत्पादों का उत्पादन, संग्रह और वितरण करती है। यह 'नंदिनी' ब्रांड के तहत उत्पाद बेचती है और राज्य में दूध-दही की खुदरा कीमतें निर्धारित करने में केंद्रीय भूमिका निभाती है।
इस विवाद का आम उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल दही की कीमतों में आंशिक कटौती की घोषणा की गई है, लेकिन दूध की कीमतें अभी भी बढ़ी हुई हैं। विपक्ष की माँग पर सरकार का रुख और KMF का अगला कदम तय करेगा कि उपभोक्ताओं को पूरी राहत मिलेगी या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 दिन पहले
  3. 2 दिन पहले
  4. 4 दिन पहले
  5. 4 दिन पहले
  6. 4 दिन पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले