2 अक्टूबर 2026
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कर्नाटक BJP का सीएम शिवकुमार पर हमला: CEO कार्यालय प्रदर्शन पर FIR और गिरफ्तारी की माँग

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कर्नाटक BJP का सीएम शिवकुमार पर हमला: CEO कार्यालय प्रदर्शन पर FIR और गिरफ्तारी की माँग

सारांश

कर्नाटक BJP ने CM शिवकुमार पर बड़ा कानूनी दाँव खेला है — CEO कार्यालय परिसर में प्रदर्शन को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन बताते हुए FIR और गिरफ्तारी की माँग की है। यह टकराव चुनाव आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता और कानून के एकसमान प्रयोग के सवालों को केंद्र में ले आया है।

मुख्य बातें

कर्नाटक BJP ने 2 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपा।
BJP ने CM डीके शिवकुमार और मंत्रियों के विरुद्ध FIR दर्ज करने और गिरफ्तारी की माँग की।
आरोप है कि CEO कार्यालय परिसर में प्रदर्शन सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का उल्लंघन है जो फ्रीडम पार्क के बाहर धरने पर रोक लगाता है।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नेता प्रतिपक्ष आर.
अशोक और चलवादी नारायणस्वामी सहित वरिष्ठ BJP नेताओं ने किया।
BJP ने CCTV फुटेज , अनुमति पत्र और पुलिस सुरक्षा विवरण सार्वजनिक करने की माँग की।

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 2 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी की माँग की। BJP का आरोप है कि मुख्यमंत्री व अन्य मंत्रियों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय परिसर में प्रदर्शन कर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का खुला उल्लंघन किया। यह घटना कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार और विपक्षी BJP के बीच एक नए टकराव का केंद्र बन गई है।

मुख्य घटनाक्रम

BJP के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चलवादी नारायणस्वामी, पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं विधायक सीएन अश्वत्थ नारायण, सांसद पीसी मोहन, एमएलसी सीटी रवि, वेंकटेश डोड्डेरी और हरीश एस. सहित अन्य प्रमुख नेताओं ने किया।

पार्टी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन का शीर्षक था — 'सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करते हुए मुख्यमंत्री और मंत्रियों को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन करने की अनुमति दिए जाने पर आपत्ति।'

BJP का कानूनी तर्क: सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

आर. अशोक ने कहा, 'मैं उस घटना पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराता हूँ, जिसमें मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों और पार्टी नेताओं ने CEO के कार्यालय में प्रदर्शन किया। यह एक गंभीर घटनाक्रम है।'

उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका (PIL) मामले में बेंगलुरु के निर्धारित फ्रीडम पार्क के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन और धरना देने पर रोक लगाई थी। उनके अनुसार यह आदेश मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। अशोक ने कहा, 'बिना अनुमति CEO कार्यालय परिसर में प्रदर्शन करना सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का स्पष्ट उल्लंघन है।'

संवैधानिक संस्था की स्वायत्तता पर सवाल

अशोक ने यह भी कहा, 'चुनाव आयोग न तो किसी राजनीतिक दल के और न ही सरकार के अधीन है — यह एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। इसके परिसर में राजनीतिक उद्देश्य से प्रदर्शन की अनुमति देना चुनाव आयोग के अधिकार और लोगों के विश्वास को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।'

चलवादी नारायणस्वामी ने इसे 'सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के उल्लंघन का स्पष्ट मामला' और 'अदालत की अवमानना' के दायरे में आने वाला बताया। उन्होंने सवाल किया कि परिसर में प्रदर्शन की अनुमति किसने दी, और यदि लिखित अनुमति दी गई तो संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

पारदर्शिता की माँग: CCTV फुटेज से लेकर अनुमति पत्र तक

BJP ने पुलिस आयुक्त से माँग की है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस और चुनाव आयोग के अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। इसके अलावा पार्टी ने CCTV फुटेज, पुलिस सुरक्षा व्यवस्था का विवरण, प्रदर्शन से जुड़ा अनुमति पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की माँग की।

नारायणस्वामी ने तंज कसते हुए पूछा, 'क्या पुलिस विभाग विपक्षी दलों या आम नागरिकों को भी चुनाव आयोग के परिसर में इसी तरह प्रदर्शन की अनुमति देगा?' यह सवाल शासन में समानता और कानून के एकसमान प्रयोग को लेकर है।

आगे क्या होगा

BJP ने पुलिस आयुक्त से मामले में तत्काल कार्रवाई और उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने की माँग की है। गौरतलब है कि कर्नाटक में कांग्रेस और BJP के बीच यह टकराव ऐसे समय में तेज हुआ है जब राज्य में कई राजनीतिक मुद्दों पर दोनों दल आमने-सामने हैं। मुख्यमंत्री शिवकुमार और उनकी सरकार की ओर से इस ज्ञापन पर आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी व्यावहारिक सफलता संदिग्ध है — क्योंकि पुलिस आयुक्त राज्य सरकार के अधीन होते हैं और सत्तारूढ़ दल के मुखिया के विरुद्ध स्वतःस्फूर्त कार्रवाई दुर्लभ होती है। असली मुद्दा यह है कि यदि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश वास्तव में लागू था, तो पुलिस ने प्रदर्शन को अनुमति देते समय किस आधार पर निर्णय लिया — यह सवाल दस्तावेज़ों की माँग को राजनीतिक से अधिक संवैधानिक बनाता है। चुनाव आयोग की स्वायत्तता का सवाल महत्वपूर्ण है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज इसे महज़ पार्टी-बनाम-पार्टी संघर्ष तक सीमित कर देती है। वास्तविक जवाबदेही के लिए यह जानना ज़रूरी है कि अनुमति किसने और किस प्रक्रिया से दी।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक BJP ने CM शिवकुमार के खिलाफ FIR की माँग क्यों की?
BJP का आरोप है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके मंत्रियों ने बेंगलुरु के CEO कार्यालय परिसर में प्रदर्शन कर सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का उल्लंघन किया, जो फ्रीडम पार्क के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर धरना-प्रदर्शन पर रोक लगाता है। पार्टी इसे अदालत की अवमानना मानती है और इसी आधार पर FIR व गिरफ्तारी की माँग कर रही है।
CEO कार्यालय में प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का क्या आदेश है?
BJP के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय ने एक PIL मामले में मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के आदेश से बेंगलुरु में निर्धारित फ्रीडम पार्क परिसर के अलावा अन्य स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन और धरने पर रोक लगाई है। CEO कार्यालय इस आदेश के दायरे में आता है।
BJP के प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन से नेता शामिल थे?
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चलवादी नारायणस्वामी ने किया। इसके अलावा पूर्व उपमुख्यमंत्री सीएन अश्वत्थ नारायण, सांसद पीसी मोहन, एमएलसी सीटी रवि, वेंकटेश डोड्डेरी और हरीश एस. भी शामिल रहे।
BJP ने पुलिस आयुक्त से क्या-क्या माँगें की हैं?
BJP ने CM शिवकुमार और मंत्रियों के विरुद्ध FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू करने की माँग की है। साथ ही CCTV फुटेज, पुलिस सुरक्षा व्यवस्था का विवरण, प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ा पत्र और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की माँग भी ज्ञापन में शामिल है।
इस विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह घटना कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी BJP के बीच टकराव को और तेज़ करती है। चुनाव आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता का सवाल उठाकर BJP ने कानूनी और नैतिक दोनों मोर्चों पर सरकार को घेरने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री शिवकुमार की प्रतिक्रिया और पुलिस की आगे की कार्रवाई से इस विवाद की दिशा तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
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