सिक्किम: ड्यूटी पर तैनात ASI ने CAP सदस्यता कार्यक्रम में बदसलूकी का आरोप लगाया, रानीपूल में FIR दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
सिक्किम के गंगटोक में रानीपूल पुलिस स्टेशन ने 4 सितंबर को विपक्षी दल सिटिजन एक्शन पार्टी (CAP) के सदस्यता कार्यक्रम के दौरान एक पुलिसकर्मी के साथ कथित बदसलूकी के मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। स्पेशल ब्रांच के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) लाकपा शेरिंग भूटिया ने आरोप लगाया कि मारचक इलाके में ड्यूटी के दौरान उन्हें घेरा गया, धक्का दिया गया और जबरन रोका गया।
घटनाक्रम: क्या हुआ कार्यक्रम में
गंगटोक जिला पुलिस के अनुसार, ASI भूटिया को सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का जायजा लेने के लिए CAP के सदस्यता कार्यक्रम स्थल पर तैनात किया गया था। उनकी लिखित शिकायत में कहा गया है कि जैसे ही उपस्थित लोगों को पता चला कि वह एक पुलिस अधिकारी हैं, उन्होंने उन्हें घेर लिया।
ASI का आरोप है कि लोगों ने उनके कॉलर से खींचा, धक्का दिया और उन्हें कार्यक्रम स्थल से बाहर जाने से रोका। इसके अलावा, उन पर कथित तौर पर पार्टी की सदस्यता लेने के लिए दबाव डाला गया, जबकि वह अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियाँ निभा रहे थे।
दर्ज धाराएँ और कानूनी कार्रवाई
गंगटोक के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने बताया कि ASI की शिकायत के आधार पर BNS की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें सरकारी कर्मचारी पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग, गलत तरीके से रोकना, आपराधिक धमकी और गैरकानूनी रूप से एकत्र होना शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि संबंधित व्यक्तियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया और उनकी मेडिकल जाँच कराई गई। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) के तहत कानूनी नोटिस भी जारी किए गए हैं।
CAP का पक्ष: आरोपों से इनकार
राज्य की विपक्षी पार्टी CAP ने पुलिस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के प्रवक्ता अल्बर्ट गुरुंग ने दावा किया कि संबंधित पुलिस अधिकारी ने कार्यक्रम में शामिल होने से पहले स्वेच्छा से अपना गलत नाम बताया था।
गुरुंग ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में कोई जबरदस्ती नहीं थी और सवाल उठाया कि यदि अधिकारी को वाकई मजबूर किया गया था, तो उन्होंने उसी वक्त आपत्ति क्यों नहीं जताई। उन्होंने यह भी कहा कि जब यह कथित घटना हुई, उस समय कार्यक्रम स्थल पर मीडियाकर्मी भी मौजूद थे।
सिक्किम पुलिस का रुख
सिक्किम पुलिस ने स्पष्ट किया कि कानूनी ड्यूटी निभा रहे कर्मियों के खिलाफ बाधा डालने, धमकाने या बल प्रयोग से जुड़े किसी भी आरोप को वह गंभीरता से लेती है। पुलिस ने कहा कि जाँच निष्पक्ष, बिना किसी भेदभाव के और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
जाँचकर्ता अभी बयान दर्ज कर रहे हैं और घटना में शामिल हर व्यक्ति की भूमिका स्थापित करने के लिए सबूत जुटाए जा रहे हैं। पुलिस ने कहा कि अब तक एकत्र किए गए साक्ष्यों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। आगे की कार्रवाई जाँच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।