मंदिर में महिला PSI को थप्पड़ मारने का आरोप, BJP विधायक की बेटी पर FIR; पिता ने माँगी माफी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मांड्या जिले के श्रीरंगपट्टन तालुक स्थित श्री लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर में 14 अगस्त 2026 को भीम अमावस्या के अवसर पर एक विवादित घटना सामने आई, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक बी. सुरेश गौड़ा की बेटी ऐश्वर्या पर ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिस सब-इंस्पेक्टर (PSI) को थप्पड़ मारने का आरोप लगा। क्यातनहल्ली पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 132, 115(2), 352 और 351(2) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
मुख्य घटनाक्रम
उस दिन मंदिर में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए एकत्रित हुए थे। शिकायत के अनुसार, ऐश्वर्या वीआईपी कतार के माध्यम से गर्भगृह में प्रवेश करने का प्रयास कर रही थीं, जिन्हें सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात PSI सविता बी. पाटिल ने यह कहते हुए रोक दिया कि मंदिर में अत्यधिक भीड़ है और उस समय प्रवेश संभव नहीं है।
इसी दौरान सिविल ड्रेस में ड्यूटी कर रहीं सर्किल इंस्पेक्टर लक्ष्मी गर्भगृह की ओर बढ़ीं। ऐश्वर्या ने आपत्ति जताई कि उन्हें अंदर क्यों जाने दिया जा रहा है। PSI सविता ने स्पष्ट किया कि सर्किल इंस्पेक्टर अपनी आधिकारिक ड्यूटी के तहत जा रही हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद दोनों के बीच बहस शुरू हो गई और आरोप है कि बहस के दौरान ऐश्वर्या ने PSI सविता को थप्पड़ मार दिया।
FIR और जाँच
घटना के बाद PSI सविता ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। क्यातनहल्ली पुलिस ने BNS की धारा 132 (लोक सेवक को कार्य से विरत करना), 115(2) (स्वैच्छिक चोट पहुँचाना), 352 (उकसावे पर हमला) और 351(2) (आपराधिक बल) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस जाँच जारी है।
गौरतलब है कि ऐश्वर्या मांड्या के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) गौतम की पत्नी भी हैं, जो इस मामले को और संवेदनशील बनाता है — एक पुलिस अधिकारी की पत्नी पर ही एक अन्य पुलिस अधिकारी पर हमले का आरोप है।
विधायक की प्रतिक्रिया और माफी
तुमकुरु ग्रामीण क्षेत्र के BJP विधायक बी. सुरेश गौड़ा ने अपनी बेटी के कथित व्यवहार के लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँगी। उन्होंने कहा, "यह घटना खराब समय में हुई है। मेरी बेटी ने जो किया, उसके लिए मैं माफी माँगता हूँ। इस मामले में FIR दर्ज हो चुकी है और मैं इसकी जानकारी लूँगा।"
उन्होंने यह भी माना कि उनकी बेटी का कथित व्यवहार उचित नहीं था और कहा, "जनता के प्रतिनिधि होने के नाते हमें सभी सार्वजनिक स्थानों पर सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। हमें घमंड नहीं दिखाना चाहिए।" साथ ही उन्होंने जोड़ा, "उसके साथ दो बच्चे थे, इसलिए उसे और धैर्य रखना चाहिए था।"
दूसरी ओर, विधायक ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी बेटी की शिकायत स्वीकार नहीं की। उन्होंने मामले को पुलिस महानिदेशक एवं महानिरीक्षक (DG एवं IGP) के संज्ञान में लाते हुए विभागीय जाँच की माँग की है।
वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर सवाल
विधायक सुरेश गौड़ा ने इस घटना को मंदिरों में वीआईपी दर्शन व्यवस्था की आलोचना का अवसर भी बनाया। उनका कहना था कि इस व्यवस्था से आम श्रद्धालुओं को परेशानी होती है और पुलिस पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। उन्होंने कहा, "भगवान के सामने सभी बराबर हैं और सभी को कतार में लगकर दर्शन करने चाहिए।"
क्या होगा आगे
पुलिस FIR के आधार पर जाँच कर रही है। विधायक की विभागीय जाँच की माँग पर वरिष्ठ अधिकारियों का रुख अभी सामने नहीं आया है। यह मामला राज्य में राजनीतिक प्रभाव और पुलिस की स्वायत्तता के व्यापक सवाल को भी उजागर करता है।