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कर्नाटक: पत्रकार पर FIR को लेकर भाजपा का हमला, नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने माँगा सरकार से जवाब

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कर्नाटक: पत्रकार पर FIR को लेकर भाजपा का हमला, नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने माँगा सरकार से जवाब

सारांश

कर्नाटक में गणेश जुलूस को लेकर पुलिस निरीक्षक की टिप्पणी रिकॉर्ड करने वाले एक दलित पत्रकार पर FIR दर्ज हो गई। भाजपा नेता आर. अशोक ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए गृह मंत्री प्रियांक खड़गे और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से जवाब माँगा है।

मुख्य बातें

नरसीपुर के पुलिस निरीक्षक धनंजय की गणेश विसर्जन जुलूस संबंधी टिप्पणी का वीडियो रिकॉर्ड करने और प्रसारित करने पर एक दलित पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
कर्नाटक नेता प्रतिपक्ष आर.
अशोक ने 18 सितंबर 2026 को राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की और एफआईआर वापस लेने की माँग की।
अशोक ने गृह मंत्री प्रियांक खड़गे और मुख्यमंत्री डी.के.
शिवकुमार से सार्वजनिक जवाब माँगा।
भाजपा ने इस कार्रवाई को प्रेस की स्वतंत्रता और संवैधानिक अभिव्यक्ति के अधिकार पर हमला बताया।
विरोध प्रदर्शन के बाद कर्नाटक सरकार ने मस्जिद के सामने से गणेश जुलूस निकालने की अनुमति दे दी।

कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को टी. नरसीपुर के एक पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर राज्य की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। यह एफआईआर उस पत्रकार के खिलाफ दर्ज की गई, जिसने गणेश विसर्जन जुलूस को लेकर टी. नरसीपुर के पुलिस निरीक्षक धनंजय की एक कथित विवादास्पद टिप्पणी का वीडियो रिकॉर्ड कर उसे प्रसारित किया था। अशोक ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता और संवैधानिक अभिव्यक्ति के अधिकार पर सीधा हमला करार दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद टी. नरसीपुर पुलिस निरीक्षक धनंजय द्वारा गणेशोत्सव आयोजकों के साथ आयोजित एक शांति बैठक के दौरान दिए गए बयान के बाद शुरू हुआ। वीडियो में निरीक्षक ने आयोजकों को मंजूर किए गए रास्ते से ही जुलूस निकालने और मस्जिद के पास पटाखे न फोड़ने की चेतावनी दी थी। एक स्थानीय मीडिया प्रतिनिधि को शांति बैठक की रिपोर्टिंग के लिए पुलिस थाने बुलाया गया था, जिसके बाद उस बैठक का वीडियो सार्वजनिक हो गया।

पुलिस ने इस वीडियो को रिकॉर्ड और प्रसारित करने वाले पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। उल्लेखनीय है कि यह पत्रकार दलित समुदाय से है, जिसे लेकर भाजपा ने कांग्रेस को और घेरा।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

आर. अशोक ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस सरकार ने खुद पुलिस अधिकारी के बयान को सही और कानूनी बताया है, तो उस बयान को रिकॉर्ड और प्रकाशित करने वाले पत्रकार के खिलाफ एफआईआर किस आधार पर दर्ज की गई। उन्होंने कहा, 'पत्रकार ने बैठक में कही गई बातों को रिकॉर्ड किया और प्रसारित किया। अगर पुलिस अधिकारी का बयान सही और कानूनी था, तो उसे रिपोर्ट करने वाले पत्रकार के खिलाफ एफआईआर किस आधार पर दर्ज की गई?'

उन्होंने गृह मंत्री प्रियांक खड़गे से इस मामले पर सार्वजनिक रूप से जवाब माँगा और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को संबोधित करते हुए कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए।

प्रेस स्वतंत्रता का सवाल

अशोक ने इस एफआईआर को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए कहा, 'यह केवल एक पत्रकार का मामला नहीं है। यह संविधान से मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल है। क्या यह आपातकाल के दौर जैसी स्थिति है?' उन्होंने यह भी पूछा कि क्या पत्रकार अब सरकारी अधिकारियों के बयानों की स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग नहीं कर सकते।

भाजपा नेता ने दलित पत्रकार पर मामला दर्ज किए जाने को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, 'दलितों के नाम पर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करने वाली कांग्रेस को क्या एक दलित पत्रकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दिखाई नहीं देती?'

विरोध प्रदर्शन और सरकार का रुख

इस पूरे विवाद के बाद आर. अशोक के नेतृत्व में भाजपा नेताओं ने टी. नरसीपुर पुलिस थाने के सामने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। दबाव के बाद कांग्रेस सरकार ने शहर में मस्जिद के सामने से गणेश जुलूस निकालने की अनुमति दे दी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जुलूस के पारंपरिक रास्ते खुले हैं और आयोजकों से केवल मार्ग की जानकारी अधिकारियों को देने और सुरक्षा व कानून-व्यवस्था संबंधी नियमों के पालन के लिए कहा गया था।

आगे की माँगें

अशोक ने राज्य सरकार से पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने और इस मामले की पारदर्शी जाँच कराने की माँग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मीडिया की स्वतंत्रता प्रभावित होती है या एफआईआर के जरिए सवाल उठाने वाली आवाजों को दबाने की कोशिश की जाती है, तो भाजपा पत्रकारों के साथ खड़ी रहेगी। यह देखना होगा कि कर्नाटक सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी उसे रिपोर्ट करने वाले पत्रकार पर मुकदमा दर्ज हो गया। पत्रकार का दलित होना इस मामले में एक और परत जोड़ता है — भाजपा इसे कांग्रेस की दलित-राजनीति की असलियत बताने के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। मुख्यधारा की कवरेज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर केंद्रित है, लेकिन असली सवाल अनुत्तरित है: जब अधिकारी का बयान 'कानूनी' था, तो रिपोर्टिंग पर एफआईआर का क्या औचित्य है?
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में पत्रकार पर FIR क्यों दर्ज की गई?
टी. नरसीपुर के पुलिस निरीक्षक धनंजय की गणेश विसर्जन जुलूस से संबंधित टिप्पणी का वीडियो रिकॉर्ड कर प्रसारित करने पर पुलिस ने एक स्थानीय पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज किया। यह पत्रकार एक शांति बैठक की रिपोर्टिंग के लिए पुलिस थाने गया था।
भाजपा नेता आर. अशोक ने क्या माँग की है?
नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने राज्य सरकार से पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने, मामले की पारदर्शी जाँच कराने और गृह मंत्री प्रियांक खड़गे से सार्वजनिक जवाब माँगा है। उन्होंने एफआईआर को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
टी. नरसीपुर गणेश जुलूस विवाद क्या है?
पुलिस निरीक्षक धनंजय ने गणेशोत्सव आयोजकों को शांति बैठक में मंजूर रास्ते से ही जुलूस निकालने और मस्जिद के पास पटाखे न फोड़ने की चेतावनी दी थी। इस बयान का वीडियो सार्वजनिक होने के बाद विवाद शुरू हुआ और भाजपा ने पुलिस थाने के सामने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया।
क्या कर्नाटक सरकार ने गणेश जुलूस की अनुमति दी?
हाँ, भाजपा के विरोध प्रदर्शन के बाद कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने मस्जिद के सामने से गणेश जुलूस निकालने की अनुमति दे दी। पुलिस के अनुसार जुलूस के पारंपरिक रास्ते पहले से खुले थे।
इस मामले में दलित पत्रकार का मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है?
आर. अशोक ने बताया कि एफआईआर का शिकार पत्रकार दलित समुदाय से है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि जो पार्टी दलितों के नाम पर राजनीति करती है, वही एक दलित पत्रकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल रही है।
राष्ट्र प्रेस
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