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असम: मेथामफेटामाइन तस्करी में तीन दोषियों को 15 साल की कठोर कैद, ₹2-2 लाख जुर्माना

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असम: मेथामफेटामाइन तस्करी में तीन दोषियों को 15 साल की कठोर कैद, ₹2-2 लाख जुर्माना

सारांश

असम की विशेष NDPS अदालत ने 2020 के मेथामफेटामाइन तस्करी मामले में मणिपुर और बिहार के तीन दोषियों को 15-15 साल की कठोर कैद सुनाई। यह फैसला पूर्वोत्तर में ड्रग नेटवर्क के खिलाफ NCB की लंबी कानूनी लड़ाई का नतीजा है।

मुख्य बातें

3 सितंबर को कामरूप (मेट्रो) की विशेष NDPS अदालत ने तीन ड्रग तस्करों को 15 साल की कठोर कैद सुनाई।
दोषी हैं — मणिपुर के शकील खान और मोहम्मद याहिया खान , तथा बिहार के मिथिलेश कुमार ।
14 अक्टूबर 2020 को गुवाहाटी के सिक्स माइल-खानापारा इलाके से 2.146 किलोग्राम मेथामफेटामाइन जब्त की गई थी।
प्रत्येक दोषी पर ₹2 लाख जुर्माना; न चुकाने पर एक अतिरिक्त वर्ष की जेल।
दोषसिद्धि NDPS अधिनियम की धाराओं 22(C), 28, 29, 35 और 54 के तहत हुई।

गुवाहाटी की कामरूप (मेट्रो) जिले की विशेष एनडीपीएस अदालत ने 3 सितंबर 2026 को तीन ड्रग तस्करों को 2.146 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट की तस्करी के दोष में 15 साल की कठोर कैद और प्रत्येक पर ₹2 लाख का जुर्माना सुनाया। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की गुवाहाटी जोनल यूनिट द्वारा अक्टूबर 2020 में दर्ज इस मामले का फैसला लगभग छह साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद आया है।

मुख्य घटनाक्रम

14 अक्टूबर 2020 को NCB की गुवाहाटी यूनिट को विशेष सूचना मिली, जिसके बाद एजेंसी ने गुवाहाटी के सिक्स माइल-खानापारा इलाके में वीआईपी रोड पर रहमान हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड के निकट छापा मारा। इस कार्रवाई में टैबलेट स्वरूप में 2.146 किलोग्राम मेथामफेटामाइन जब्त की गई।

बरामद प्रतिबंधित सामान तीन व्यक्तियों के पास से मिला — मणिपुर के शकील खान और मोहम्मद याहिया खान, तथा बिहार के मिथिलेश कुमार। तीनों को उसी दिन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 की संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया।

आरोप-पत्र और मुकदमा

जाँच पूरी होने के बाद NCB ने 8 अप्रैल 2021 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल के दौरान विशेष एनडीपीएस न्यायाधीश ने सभी साक्ष्यों की समीक्षा की और तीनों आरोपियों को NDPS अधिनियम की धाराओं 22(C), 28, 29, 35 और 54 के तहत दोषी ठहराया। यह मामला अंतर-राज्यीय तस्करी नेटवर्क की ओर संकेत करता है, क्योंकि दोषी मणिपुर और बिहार — दो अलग-अलग राज्यों — से थे।

अदालत का फैसला

3 सितंबर को सुनाए गए फैसले में अदालत ने शकील खान, मोहम्मद याहिया खान और मिथिलेश कुमार — तीनों में से प्रत्येक को — 15 साल की कठोर कैद और ₹2 लाख का जुर्माना लगाया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना न चुकाने की स्थिति में प्रत्येक दोषी को एक अतिरिक्त वर्ष की जेल भुगतनी होगी।

NCB की प्रतिक्रिया

NCB ने इस फैसले को संगठित ड्रग तस्करी के विरुद्ध न्यायिक प्रणाली की सख्त प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। एजेंसी के अनुसार यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि नारकोटिक्स नेटवर्क के खिलाफ निरंतर और कठोर कार्रवाई की जरूरत है। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर भारत — विशेषकर असम — 'गोल्डन ट्राएंगल' से आने वाली मादक दवाओं के पारगमन मार्ग पर स्थित है, जिससे यह क्षेत्र मेथामफेटामाइन तस्करी के लिहाज से संवेदनशील बना हुआ है।

आगे की राह

यह फैसला असम में ड्रग तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान को नई गति दे सकता है। NCB की गुवाहाटी जोनल यूनिट पूर्वोत्तर में सक्रिय तस्करी नेटवर्क की जाँच जारी रखे हुए है, और यह दोषसिद्धि भविष्य के मामलों में एक मिसाल के रूप में काम कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि गिरफ्तारी से फैसले तक छह साल का समय क्या न्याय की गति के बारे में कुछ कहता है। पूर्वोत्तर भारत 'गोल्डन ट्राएंगल' के लिए एक सिद्ध पारगमन गलियारा बना हुआ है, और तीन वाहकों की सजा से आपूर्ति श्रृंखला नहीं टूटती — जब तक ऊपरी नेटवर्क पर कार्रवाई न हो। यह फैसला एक मिसाल ज़रूर बनाता है, पर इसे तब तक अधूरा माना जाएगा जब तक कि जब्त सामान के स्रोत और वित्तपोषण नेटवर्क की जाँच के नतीजे सामने नहीं आते।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम मेथामफेटामाइन तस्करी मामले में किसे सजा मिली?
मणिपुर के शकील खान और मोहम्मद याहिया खान, तथा बिहार के मिथिलेश कुमार को कामरूप (मेट्रो) की विशेष NDPS अदालत ने 15-15 साल की कठोर कैद और ₹2-2 लाख जुर्माना सुनाया। यह फैसला 3 सितंबर को आया।
यह ड्रग तस्करी का मामला कब और कहाँ सामने आया था?
NCB की गुवाहाटी जोनल यूनिट ने 14 अक्टूबर 2020 को गुवाहाटी के सिक्स माइल-खानापारा इलाके में वीआईपी रोड पर रहमान हॉस्पिटल के पास छापा मारकर 2.146 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट जब्त की थी।
दोषियों पर कौन-सी धाराएँ लगाई गई थीं?
तीनों दोषियों को NDPS अधिनियम, 1985 की धाराओं 22(C), 28, 29, 35 और 54 के तहत दोषी पाया गया। ये धाराएँ व्यावसायिक मात्रा में नशीले पदार्थों की तस्करी, षड्यंत्र और अपराध में सहयोग से संबंधित हैं।
जुर्माना न भरने पर क्या होगा?
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई दोषी ₹2 लाख का जुर्माना नहीं भरता, तो उसे 15 साल की सजा के अतिरिक्त एक और वर्ष जेल में बिताना होगा।
यह मामला पूर्वोत्तर भारत में ड्रग तस्करी के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है?
पूर्वोत्तर भारत — विशेषकर असम — म्यांमार स्थित 'गोल्डन ट्राएंगल' से आने वाली मेथामफेटामाइन के लिए एक प्रमुख पारगमन मार्ग है। यह दोषसिद्धि NCB के लिए एक कानूनी मिसाल स्थापित करती है और इस क्षेत्र में ड्रग नेटवर्क के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की ज़रूरत को रेखांकित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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