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अजमेर एनडीपीएस कोर्ट का बड़ा फैसला: अफीम तस्कर को 10 साल कठोर कारावास, ₹1 लाख जुर्माना

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अजमेर एनडीपीएस कोर्ट का बड़ा फैसला: अफीम तस्कर को 10 साल कठोर कारावास, ₹1 लाख जुर्माना

सारांश

अजमेर की विशेष एनडीपीएस अदालत ने बिहार से राजस्थान तक अफीम पहुँचाने के दोषी जावरीलाल को 10 साल की कठोर सजा सुनाई। ट्रक के ईंधन टैंक में बने गुप्त खांचे से 40.850 किग्रा अफीम बरामद हुई थी। NCB ने इसे नशा मुक्त भारत अभियान की बड़ी जीत बताया।

मुख्य बातें

अजमेर विशेष एनडीपीएस अदालत ने 12 जून 2026 को दोषी जावरीलाल को 10 वर्ष कठोर कारावास और ₹1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई।
ट्रक के ईंधन टैंक के पास बने गुप्त खांचे से 22 पैकेट में 40.850 किलोग्राम अफीम बरामद की गई थी।
अफीम बिहार के शेरघाटी से लाकर राजस्थान के पाली पहुँचाई जानी थी।
दोषी ट्रक का मालिक भी था; ट्रक को बाद में MSTC के माध्यम से नीलाम किया गया।
मादक पदार्थ संबंधी सूचना मानस हेल्पलाइन 1933 पर दी जा सकती है; सूचनादाता की पहचान गोपनीय रहती है।

अजमेर की विशेष एनडीपीएस अदालत ने 12 जून 2026 को अंतरराज्यीय अफीम तस्करी के एक मामले में दोषी जावरीलाल पुत्र साहिराम, निवासी डांगियावास, जोधपुर (राजस्थान) को 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹1 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की जयपुर जोनल यूनिट द्वारा दर्ज इस मामले को मादक पदार्थ नियंत्रण के मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण न्यायिक जीत माना जा रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि

18 मई 2020 को NCB को गुप्त सूचना प्राप्त हुई कि ट्रक संख्या RJ-19 GC 0501 में अवैध अफीम की खेप ले जाई जा रही है। सूचना पर कार्रवाई करते हुए NCB की टीम ने अजमेर स्थित गेगल टोल प्लाजा के निकट नाकाबंदी की।

19 मई 2020 को ट्रक की विधिसम्मत तलाशी के दौरान ईंधन टैंक के पास बनाए गए एक विशेष गुप्त खांचे का भंडाफोड़ हुआ। उस खांचे से 22 पैकेट बरामद किए गए, जिनमें कुल 40.850 किलोग्राम अफीम छिपाई गई थी।

तस्करी का नेटवर्क

जांच में सामने आया कि यह अवैध अफीम बिहार के शेरघाटी क्षेत्र से लाई गई थी और इसे राजस्थान के पाली पहुँचाया जाना था। दोषी जावरीलाल उक्त ट्रक का मालिक भी था। बाद में न्यायालय के आदेश पर उस ट्रक को MSTC के माध्यम से नीलाम कर दिया गया। यह मामला एक राज्य से दूसरे राज्य तक फैले मादक पदार्थ तस्करी के नेटवर्क की कड़ी को उजागर करता है।

अदालत का फैसला

विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) अजमेर भानुकुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और प्रस्तुत साक्ष्यों की समीक्षा के बाद जावरीलाल को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास के साथ ₹1 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। NCB के अनुसार, जयपुर जोनल यूनिट की प्रभावी जांच और सुदृढ़ अभियोजन इस दोषसिद्धि की नींव बने।

NCB का संदेश और हेल्पलाइन

NCB ने कहा कि यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि देश में मादक पदार्थों की तस्करी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ब्यूरो ने दोहराया कि वह नशा मुक्त भारत अभियान के तहत ड्रग तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। आम जनता से अपील की गई है कि मादक पदार्थों की बिक्री, परिवहन या अवैध कारोबार से जुड़ी कोई भी सूचना मानस राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1933 पर साझा की जा सकती है। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ट्रक के ईंधन टैंक में गुप्त खांचे जैसी तकनीक तस्करों की बढ़ती परिष्कृत कार्यप्रणाली दर्शाती है। असली सवाल यह है कि क्या अकेले दोषी को सजा देना उस आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने के लिए पर्याप्त है जिसके दोनों सिरे — शेरघाटी में आपूर्तिकर्ता और पाली में खरीदार — अभी भी अज्ञात हैं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अजमेर एनडीपीएस अदालत ने किसे और क्या सजा सुनाई?
अजमेर की विशेष एनडीपीएस अदालत ने दोषी जावरीलाल पुत्र साहिराम, निवासी डांगियावास, जोधपुर को 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला 12 जून 2026 को विशेष न्यायाधीश भानुकुमार ने सुनाया।
इस मामले में कितनी अफीम बरामद हुई थी और कहाँ से?
19 मई 2020 को अजमेर के गेगल टोल प्लाजा के पास ट्रक की तलाशी में ईंधन टैंक के पास बने गुप्त खांचे से 22 पैकेट में कुल 40.850 किलोग्राम अफीम बरामद की गई थी। यह अफीम बिहार के शेरघाटी क्षेत्र से लाकर राजस्थान के पाली पहुँचाई जानी थी।
इस मामले में NCB की भूमिका क्या थी?
NCB की जयपुर जोनल यूनिट को 18 मई 2020 को गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर टीम ने नाकाबंदी कर ट्रक पकड़ा। जयपुर जोनल यूनिट ने प्रभावी जांच और मजबूत अभियोजन के जरिए दोषसिद्धि सुनिश्चित की।
मादक पदार्थों की सूचना कहाँ दे सकते हैं?
मादक पदार्थों की बिक्री, परिवहन या अवैध कारोबार से जुड़ी कोई भी सूचना मानस राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1933 पर दी जा सकती है। NCB के अनुसार, सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
दोषी के ट्रक का क्या हुआ?
जावरीलाल उस ट्रक का मालिक भी था जिसमें अफीम छिपाई गई थी। न्यायालय की प्रक्रिया के बाद उस ट्रक को MSTC के माध्यम से नीलाम कर दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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