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सूरत कोर्ट का बड़ा फैसला: गांजा तस्करी में तीन दोषियों को 10-10 साल की सजा, 562 किलो गांजा था जब्त

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सूरत कोर्ट का बड़ा फैसला: गांजा तस्करी में तीन दोषियों को 10-10 साल की सजा, 562 किलो गांजा था जब्त

सारांश

सूरत की NDPS कोर्ट ने 2020 के गांजा तस्करी मामले में तीन ओडिशा निवासियों को दोषी करार दिया और प्रत्येक को 10 साल की कठोर सजा व ₹1 लाख जुर्माना सुनाया। NCB ने ऑपरेशन में 562.55 किलो गांजा जब्त किया था।

मुख्य बातें

सूरत की स्पेशल NDPS कोर्ट ने 2 जुलाई 2026 को गांजा तस्करी मामले में तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया।
तीनों दोषियों — कालू चरण बेहरा , सुधीर कुमार स्वैन और मिथुन प्रधान — को 10-10 साल की कठोर सजा और प्रत्येक पर ₹1 लाख जुर्माना लगाया गया।
NCB ने 4-5 मई 2020 को सूरत के किम इलाके में छापे के दौरान 562.55 किलोग्राम गांजा जब्त किया था।
जाँच के अनुसार गांजा ओडिशा से गुजरात में अवैध बिक्री के लिए अंतर-राज्यीय नेटवर्क के ज़रिये लाया गया था।
NCB ने अक्टूबर 2020 में शिकायत दर्ज कराई थी; जब्त माल को प्री-ट्रायल आधार पर पहले ही नष्ट किया जा चुका है।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की अहमदाबाद जोनल यूनिट ने 3 जुलाई 2026 को जानकारी दी कि सूरत की स्पेशल NDPS कोर्ट ने गांजा तस्करी के एक बड़े मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 10-10 साल की कठोर सजा सुनाई है। इस मामले में 562.55 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया था, जिसे जाँचकर्ताओं के अनुसार ओडिशा से गुजरात में अवैध रूप से लाया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 4 और 5 मई 2020 को चलाए गए एक ऑपरेशन से जुड़ा है। NCB अधिकारियों ने विश्वसनीय सूचना के आधार पर सूरत के किम इलाके में स्थित कृष्णा इंडस्ट्री में छापा मारा और तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया। जाँच में सामने आया कि गांजे की यह व्यावसायिक मात्रा अंतर-राज्यीय परिवहन के ज़रिये गैर-कानूनी बिक्री के लिए लाई जा रही थी।

दोषियों की पहचान

अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए तीनों व्यक्ति ओडिशा के गंजाम जिले के निवासी हैं। इनमें कालू चरण बेहरा (निवासी: बिलिपारा, फासी, कोडला), सुधीर कुमार स्वैन (निवासी: मकरापोली, गंगापुर) और मिथुन प्रधान (निवासी: बर्तुलु, जामुनी) शामिल हैं। NCB ने अक्टूबर 2020 में सूरत की स्पेशल NDPS कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी।

अदालत का फैसला

सूरत शहर के 11वें अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने 2 जुलाई 2026 को फैसला सुनाया। तीनों दोषियों को 10-10 साल की कठोर कारावास की सजा दी गई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया गया। NCB के अनुसार, जब्त किए गए नशीले पदार्थों को पूर्व-विचारण (प्री-ट्रायल) आधार पर तय प्रक्रिया के तहत पहले ही नष्ट कर दिया गया था।

NCB की प्रतिक्रिया

NCB ने एक बयान में कहा कि यह सजा ड्रग सप्लाई चेन को तोड़ने के प्रति एजेंसी के संकल्प को और मज़बूत करती है। एजेंसी ने कहा कि अंतर-राज्यीय परिवहन नेटवर्क का उपयोग कर नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों को कानून का पूरी तरह सामना करना पड़ेगा। गौरतलब है कि यह मामला ओडिशा से गुजरात के बीच चल रहे एक सुनियोजित आपराधिक नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जो राज्यों की सीमाओं को पार कर नशे का कारोबार करता था।

आगे क्या

इस फैसले के बाद दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। NCB की यह कार्रवाई अंतर-राज्यीय नशा तस्करी के खिलाफ चल रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है, और एजेंसी ने संकेत दिया है कि ऐसे नेटवर्क की जाँच जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सिर्फ तीन वाहकों को सज़ा देने से उस आपूर्ति श्रृंखला पर कोई असर पड़ेगा जो ओडिशा से गुजरात तक फैली है। ऑपरेशन से सजा तक छह साल का अंतराल यह भी रेखांकित करता है कि NDPS मामलों में न्यायिक प्रक्रिया कितनी लंबी है — जो स्वयं में एक नीतिगत चुनौती है। NCB के बयान में 'ड्रग सप्लाई चेन तोड़ने' का दावा सराहनीय है, पर इस मामले में नेटवर्क के ऊपरी सिरे — आपूर्तिकर्ता और खरीदार — की जाँच का कोई उल्लेख नहीं है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत गांजा तस्करी मामले में किसे और कितनी सजा मिली?
सूरत की स्पेशल NDPS कोर्ट ने 2 जुलाई 2026 को कालू चरण बेहरा, सुधीर कुमार स्वैन और मिथुन प्रधान — तीनों ओडिशा के गंजाम जिले के निवासी — को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 10 साल की कठोर सजा और ₹1 लाख जुर्माना सुनाया।
NCB ने इस मामले में कितना गांजा जब्त किया था?
NCB की अहमदाबाद जोनल यूनिट ने 4-5 मई 2020 को सूरत के किम इलाके में स्थित कृष्णा इंडस्ट्री में छापे के दौरान 562.55 किलोग्राम गांजा जब्त किया था। जाँचकर्ताओं के अनुसार यह माल ओडिशा से गुजरात लाया गया था।
यह मामला कब और कैसे सामने आया?
यह मामला मई 2020 में NCB के एक ऑपरेशन के दौरान सामने आया, जब अधिकारियों ने विश्वसनीय सूचना के आधार पर सूरत के किम क्षेत्र में छापा मारा। NCB ने अक्टूबर 2020 में सूरत की स्पेशल NDPS कोर्ट में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
क्या जब्त किया गया गांजा अभी भी सुरक्षित है?
नहीं। NCB के अनुसार जब्त किए गए 562.55 किलोग्राम गांजे को तय कानूनी प्रक्रिया के तहत प्री-ट्रायल आधार पर पहले ही नष्ट कर दिया गया था।
इस फैसले का क्या महत्व है?
NCB ने कहा है कि यह सजा अंतर-राज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के प्रति एजेंसी के संकल्प को मज़बूत करती है। यह मामला ओडिशा-गुजरात के बीच संगठित नशा तस्करी के एक सुनियोजित नेटवर्क की ओर संकेत करता है।
राष्ट्र प्रेस
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