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एनसीबी की बड़ी जीत: जालंधर कोर्ट ने दो अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों को सुनाई 10 साल की कठोर सजा

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एनसीबी की बड़ी जीत: जालंधर कोर्ट ने दो अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों को सुनाई 10 साल की कठोर सजा

सारांश

पाँच साल की लंबी जाँच और अभियोजन के बाद एनसीबी को बड़ी कामयाबी मिली है। जालंधर की विशेष अदालत ने कनाडा से संचालित अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के दो भारतीय गुर्गों को 10 साल की कठोर सजा सुनाई है। फरार सरगना की तलाश अभी भी जारी है।

मुख्य बातें

जालंधर की विशेष एनडीपीएस अदालत ने अक्षिंदर सिंह सोढ़ी और अमनदीप कुमार को 10 साल के कठोर कारावास और ₹1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई।
मामला सितंबर 2019 में 115 ग्राम कोकीन , 13 ग्राम एफेड्रिन , 80 ग्राम हशीश का तेल और नशीले कैप्सूल की बरामदगी से जुड़ा है।
इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का संचालन कनाडा में बैठे एक फरार सरगना द्वारा किया जा रहा था।
फरार आरोपियों के खिलाफ एनसीबी की जाँच अभी भी जारी है; कनाडा और अन्य देशों में नेटवर्क के मॉड्यूल निष्क्रिय करने का लक्ष्य।
इसी दिन एनसीबी ने आईआईटी जोधपुर में लगभग 900 छात्रों के बीच नशा-विरोधी जागरूकता सत्र आयोजित किया।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने पंजाब में अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों की तस्करी के एक बहुचर्चित मामले में बड़ी कानूनी जीत हासिल की है — जालंधर स्थित विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने अक्षिंदर सिंह सोढ़ी और अमनदीप कुमार को 10 साल के कठोर कारावास और ₹1 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला सितंबर 2019 में एनसीबी की चंडीगढ़ जोनल यूनिट द्वारा 115 ग्राम कोकीन, 13 ग्राम एफेड्रिन, 80 ग्राम हशीश का तेल और नशीले पदार्थों के कैप्सूल की बरामदगी से जुड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

एनसीबी अधिकारियों के अनुसार, यह कोई साधारण तस्करी का मामला नहीं था। जाँच में सामने आया कि इस नेटवर्क का संचालन कनाडा में बैठे एक फरार सरगना द्वारा किया जा रहा था, जो भारत में स्थानीय गुर्गों के ज़रिये अपना कारोबार चला रहा था। अक्षिंदर सिंह सोढ़ी और अमनदीप कुमार इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भारतीय कड़ी के रूप में काम कर रहे थे।

गौरतलब है कि यह मामला उस दौर में सामने आया जब पंजाब में नशे की तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को लेकर चिंताएँ तेज़ी से बढ़ रही थीं। एनसीबी की चंडीगढ़ इकाई ने गहन जाँच के बाद यह दोषसिद्धि सुनिश्चित की।

न्यायालय का फैसला और सजा का विवरण

जालंधर की विशेष एनडीपीएस अदालत ने दोनों आरोपियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 10 वर्ष का कठोर कारावास और ₹1 लाख का जुर्माना सुनाया। एनसीबी के अनुसार, गहन जाँच और प्रभावी अभियोजन की बदौलत यह दोषसिद्धि संभव हो सकी।

बरामद सामग्री में 115 ग्राम कोकीन, 13 ग्राम एफेड्रिन, 80 ग्राम हशीश का तेल और नशीले पदार्थों के कैप्सूल शामिल थे — जो इस नेटवर्क की बहुस्तरीय आपूर्ति श्रृंखला की ओर इशारा करते हैं।

फरार आरोपियों पर जाँच जारी

एनसीबी ने स्पष्ट किया है कि कनाडा में बैठे फरार सरगना और नेटवर्क के अन्य सदस्यों के खिलाफ जाँच अभी भी जारी है। ब्यूरो का लक्ष्य कनाडा और अन्य देशों में सक्रिय इस गिरोह के सभी मॉड्यूल को निष्क्रिय करना है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत-कनाडा संबंधों में तनाव के बीच सीमापार आपराधिक नेटवर्क की जाँच कूटनीतिक रूप से भी संवेदनशील मानी जाती है।

आईआईटी जोधपुर में जागरूकता अभियान

इसी दिन एक अलग घटनाक्रम में एनसीबी ने आईआईटी जोधपुर के परिसर में एक जागरूकता सत्र आयोजित किया, जिसमें लगभग 900 छात्रों ने भाग लिया। एनसीबी के सहायक निदेशक के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों को मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खतरों, व्यक्तियों, परिवारों और समाज पर इसके हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया।

अधिकारियों ने अवसाद और तनाव जैसे प्रमुख कारकों पर विशेष ध्यान दिया, जिन्हें नशे की लत का एक बड़ा कारण माना जाता है। छात्रों को 'क्या करें और क्या न करें' की व्यावहारिक जानकारी भी दी गई।

आगे क्या

एनसीबी के अनुसार, फरार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय के ज़रिये इस नेटवर्क की जड़ें उखाड़ने का प्रयास किया जाएगा। यह फैसला ड्रग तस्करी के मामलों में त्वरित और प्रभावी अभियोजन की दिशा में एनसीबी की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब कनाडा में बैठे फरार सरगना तक पहुँचा जाएगा — जो इस पूरे नेटवर्क की धुरी है। भारत-कनाडा के बीच मौजूदा कूटनीतिक तनाव को देखते हुए यह प्रत्यर्पण प्रक्रिया जटिल हो सकती है। पंजाब में अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क की जड़ें गहरी हैं और केवल स्थानीय गुर्गों को सजा दिलाने से आपूर्ति श्रृंखला नहीं टूटती। एनसीबी की आईआईटी जोधपुर जैसे संस्थानों में जागरूकता पहल सराहनीय है, परंतु माँग-पक्ष पर दीर्घकालिक नीतिगत हस्तक्षेप के बिना अभियोजन की सफलताएँ अधूरी रहेंगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीबी के इस मामले में किन्हें और क्या सजा मिली?
जालंधर की विशेष एनडीपीएस अदालत ने अक्षिंदर सिंह सोढ़ी और अमनदीप कुमार को 10 साल के कठोर कारावास और ₹1 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई है। दोनों को एनडीपीएस अधिनियम के तहत दोषी पाया गया।
2019 में पंजाब में एनसीबी ने क्या बरामद किया था?
सितंबर 2019 में एनसीबी की चंडीगढ़ जोनल यूनिट ने 115 ग्राम कोकीन, 13 ग्राम एफेड्रिन, 80 ग्राम हशीश का तेल और नशीले पदार्थों के कैप्सूल बरामद किए थे। यह बरामदगी एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करने का आधार बनी।
इस ड्रग नेटवर्क का संचालन कहाँ से हो रहा था?
जाँच के अनुसार इस नेटवर्क का मुख्य सरगना कनाडा में स्थित है और वह फरार है। वह भारत में स्थानीय गुर्गों के ज़रिये अपना कारोबार चला रहा था। एनसीबी ने कहा है कि फरार आरोपियों के खिलाफ जाँच अभी भी जारी है।
एनसीबी ने आईआईटी जोधपुर में क्या कार्यक्रम आयोजित किया?
एनसीबी के सहायक निदेशक के नेतृत्व में आईआईटी जोधपुर में एक नशा-विरोधी जागरूकता सत्र आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 900 छात्रों ने भाग लिया। इसमें मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खतरों, अवसाद और तनाव जैसे कारकों पर चर्चा की गई।
क्या इस मामले में अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं?
हाँ, एनसीबी के अनुसार कनाडा में बैठे मुख्य सरगना सहित कुछ आरोपी अभी भी फरार हैं। ब्यूरो ने कहा है कि इन फरार आरोपियों और कनाडा व अन्य देशों में नेटवर्क के मॉड्यूल को निष्क्रिय करने के लिए जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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