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एनसीबी चंडीगढ़ की बड़ी जीत: 16.5 किलो चरस तस्करी मामले में तीन दोषियों को 12 साल तक की सजा

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एनसीबी चंडीगढ़ की बड़ी जीत: 16.5 किलो चरस तस्करी मामले में तीन दोषियों को 12 साल तक की सजा

सारांश

एनसीबी चंडीगढ़ की करीब आठ साल की कानूनी लड़ाई रंग लाई — 16.5 किलो चरस तस्करी के मामले में तीन दोषियों को सजा मिली। मुंबई से चेन्नई तक फैले इस नेटवर्क का भंडाफोड़ 2018 में हुआ था; अब 2026 में न्यायालय ने दो मुख्य दोषियों को 12 साल की कठोर कैद सुनाई।

मुख्य बातें

एनसीबी चंडीगढ़ ने 18 दिसंबर 2018 को खुदा लाहोरा पुल के पास 16.5 किलोग्राम चरस के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
तीसरे आरोपी राज कुमार उर्फ राजू को 20 दिसंबर 2018 को भुंतर से 80 ग्राम अतिरिक्त चरस के साथ पकड़ा गया।
तस्करी नेटवर्क मुंबई, गोवा, बेंगलुरु और चेन्नई तक फैला था।
विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने 15 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया; जोगिंदर सिंह और अनिल कुमार को 12 वर्ष कठोर कारावास व ₹1,00,000 जुर्माना।
राज कुमार उर्फ राजू को 1 वर्ष कठोर कारावास और ₹10,000 जुर्माना।
मादक पदार्थ तस्करी की सूचना के लिए मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 उपलब्ध है।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की चंडीगढ़ जोनल यूनिट को 15 सितंबर 2026 को एक बड़ी कानूनी सफलता मिली, जब चंडीगढ़ स्थित विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने अंतर-राज्यीय चरस तस्करी मामले में तीन आरोपियों — जोगिंदर सिंह, अनिल कुमार और राज कुमार उर्फ राजू — को दोषी करार दिया। न्यायालय ने मुख्य दो आरोपियों को 12 वर्ष के कठोर कारावास और प्रत्येक पर ₹1 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई थी गिरफ्तारी

18 दिसंबर 2018 को एनसीबी की एक टीम ने हिमाचल प्रदेश-चंडीगढ़ सीमा पर सक्रिय एक तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया। खुदा लाहोरा पुल के पास एक हुंडई वरना कार को रोका गया, जिसमें 16.5 किलोग्राम प्रतिबंधित चरस छुपाई गई थी। यह मामला एनसीबी अपराध संख्या 49/2018 के तहत दर्ज किया गया।

मौके पर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के निवासी जोगिंदर सिंह और मंडी जिले के निवासी अनिल कुमार को तत्काल गिरफ्तार किया गया। जब्त की गई चरस को मुंबई पहुँचाया जाना था, जहाँ से इसे आगे वितरित किया जाना था।

तस्करी नेटवर्क का विस्तार: मुंबई से चेन्नई तक

जाँच के दौरान सामने आया कि तस्करी नेटवर्क केवल हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ तक सीमित नहीं था। तीसरे आरोपी राज कुमार उर्फ राजू, जो कुल्लू जिले के निवासी हैं, इस रैकेट की सप्लाई चेन के महत्वपूर्ण कड़ी थे। जाँच में खुलासा हुआ कि वे अन्य दोनों आरोपियों के साथ मिलकर मुंबई, गोवा, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे महानगरों में चरस की आपूर्ति कर रहे थे।

राज कुमार को 20 दिसंबर 2018 को गिरफ्तार किया गया। भुंतर स्थित उनके आवास की तलाशी में 80 ग्राम अतिरिक्त चरस बरामद हुई। यह प्रकरण दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर दिखने वाली तस्करी की जड़ें कितनी गहरी और दूरगामी हो सकती हैं।

न्यायालय का फैसला और सजा

एनसीबी ने 12 जून 2019 को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत चंडीगढ़ के विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस न्यायालय के समक्ष तीनों के विरुद्ध शिकायत दाखिल की। करीब सात वर्षों तक चली मुकदमे की सुनवाई के बाद न्यायालय ने 15 सितंबर 2026 को अपना फैसला सुनाया।

जोगिंदर सिंह और अनिल कुमार को 12 वर्ष के कठोर कारावास एवं प्रत्येक को ₹1,00,000 के जुर्माने की सजा दी गई। राज कुमार उर्फ राजू को 1 वर्ष के कठोर कारावास और ₹10,000 के जुर्माने की सजा सुनाई गई। तस्करी नेटवर्क में उनकी अलग-अलग भूमिका को देखते हुए सजा में यह अंतर रखा गया।

एनसीबी की प्रतिक्रिया और आगे की राह

एनसीबी ने इस फैसले को मादक पदार्थ विरोधी अभियान में पेशेवर जाँच और प्रभावी अभियोजन की मिसाल बताया। ब्यूरो ने कहा कि वह नशामुक्त भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा।

गौरतलब है कि यह मामला उस दौर की तस्करी से जुड़ा है, जब हिमाचल प्रदेश के कुल्लू-मनाली क्षेत्र से महानगरों तक चरस की आपूर्ति के मामले तेजी से बढ़ रहे थे। यह सफल दोषसिद्धि उन तस्करों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है जो अंतर-राज्यीय नेटवर्क के जरिए प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति करते हैं।

एनडीपीएस मामलों की सूचना देने के लिए जनता मानस राष्ट्रीय हेल्पलाइन (टोल-फ्री: 1933) पर संपर्क कर सकती है। सूचना देने वाले की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी दर्शाती है कि एनडीपीएस मामलों में न्यायिक प्रक्रिया औसतन सात-आठ साल खींचती है — जो अभियोजन की गति पर गंभीर सवाल उठाती है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू-मनाली क्षेत्र से महानगरों तक चरस की आपूर्ति एक दशक से जारी है, और एकल गिरफ्तारियाँ नेटवर्क की कमर तोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या ऐसे मामलों में आपूर्ति श्रृंखला के ऊपरी सिरे तक जाँच पहुँचती है, या केवल वाहक-स्तर के दोषी पकड़े जाते हैं।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीबी चंडीगढ़ का यह चरस तस्करी मामला क्या है?
यह मामला 18 दिसंबर 2018 को चंडीगढ़ के खुदा लाहोरा पुल के पास हुई कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें एनसीबी ने 16.5 किलोग्राम चरस के साथ दो आरोपियों को पकड़ा था। जाँच में तीसरे आरोपी का भी नाम सामने आया, जो मुंबई, गोवा, बेंगलुरु और चेन्नई तक ड्रग आपूर्ति का हिस्सा था।
इस मामले में न्यायालय ने क्या सजा सुनाई?
चंडीगढ़ के विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने 15 सितंबर 2026 को जोगिंदर सिंह और अनिल कुमार को 12 वर्ष के कठोर कारावास और ₹1,00,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। राज कुमार उर्फ राजू को 1 वर्ष के कठोर कारावास और ₹10,000 के जुर्माने की सजा मिली।
चरस की तस्करी किन शहरों में की जा रही थी?
जाँच के अनुसार, जब्त की गई 16.5 किलोग्राम चरस मुंबई भेजी जानी थी, जहाँ से इसे गोवा, बेंगलुरु और चेन्नई में वितरित किया जाना था। यह एक संगठित अंतर-राज्यीय तस्करी नेटवर्क था।
इस मामले में एनडीपीएस अधिनियम के तहत शिकायत कब दर्ज हुई?
एनसीबी ने 12 जून 2019 को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत तीनों आरोपियों के विरुद्ध विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस न्यायालय, चंडीगढ़ के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी।
मादक पदार्थ तस्करी की सूचना कैसे दें?
नागरिक मादक पदार्थ तस्करी की सूचना मानस राष्ट्रीय हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1933 पर दे सकते हैं। एनसीबी के अनुसार, सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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