एनसीबी चंडीगढ़ की बड़ी जीत: 16.5 किलो चरस तस्करी मामले में तीन दोषियों को 12 साल तक की सजा
सारांश
मुख्य बातें
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की चंडीगढ़ जोनल यूनिट को 15 सितंबर 2026 को एक बड़ी कानूनी सफलता मिली, जब चंडीगढ़ स्थित विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने अंतर-राज्यीय चरस तस्करी मामले में तीन आरोपियों — जोगिंदर सिंह, अनिल कुमार और राज कुमार उर्फ राजू — को दोषी करार दिया। न्यायालय ने मुख्य दो आरोपियों को 12 वर्ष के कठोर कारावास और प्रत्येक पर ₹1 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई थी गिरफ्तारी
18 दिसंबर 2018 को एनसीबी की एक टीम ने हिमाचल प्रदेश-चंडीगढ़ सीमा पर सक्रिय एक तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया। खुदा लाहोरा पुल के पास एक हुंडई वरना कार को रोका गया, जिसमें 16.5 किलोग्राम प्रतिबंधित चरस छुपाई गई थी। यह मामला एनसीबी अपराध संख्या 49/2018 के तहत दर्ज किया गया।
मौके पर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के निवासी जोगिंदर सिंह और मंडी जिले के निवासी अनिल कुमार को तत्काल गिरफ्तार किया गया। जब्त की गई चरस को मुंबई पहुँचाया जाना था, जहाँ से इसे आगे वितरित किया जाना था।
तस्करी नेटवर्क का विस्तार: मुंबई से चेन्नई तक
जाँच के दौरान सामने आया कि तस्करी नेटवर्क केवल हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ तक सीमित नहीं था। तीसरे आरोपी राज कुमार उर्फ राजू, जो कुल्लू जिले के निवासी हैं, इस रैकेट की सप्लाई चेन के महत्वपूर्ण कड़ी थे। जाँच में खुलासा हुआ कि वे अन्य दोनों आरोपियों के साथ मिलकर मुंबई, गोवा, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे महानगरों में चरस की आपूर्ति कर रहे थे।
राज कुमार को 20 दिसंबर 2018 को गिरफ्तार किया गया। भुंतर स्थित उनके आवास की तलाशी में 80 ग्राम अतिरिक्त चरस बरामद हुई। यह प्रकरण दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर दिखने वाली तस्करी की जड़ें कितनी गहरी और दूरगामी हो सकती हैं।
न्यायालय का फैसला और सजा
एनसीबी ने 12 जून 2019 को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत चंडीगढ़ के विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस न्यायालय के समक्ष तीनों के विरुद्ध शिकायत दाखिल की। करीब सात वर्षों तक चली मुकदमे की सुनवाई के बाद न्यायालय ने 15 सितंबर 2026 को अपना फैसला सुनाया।
जोगिंदर सिंह और अनिल कुमार को 12 वर्ष के कठोर कारावास एवं प्रत्येक को ₹1,00,000 के जुर्माने की सजा दी गई। राज कुमार उर्फ राजू को 1 वर्ष के कठोर कारावास और ₹10,000 के जुर्माने की सजा सुनाई गई। तस्करी नेटवर्क में उनकी अलग-अलग भूमिका को देखते हुए सजा में यह अंतर रखा गया।
एनसीबी की प्रतिक्रिया और आगे की राह
एनसीबी ने इस फैसले को मादक पदार्थ विरोधी अभियान में पेशेवर जाँच और प्रभावी अभियोजन की मिसाल बताया। ब्यूरो ने कहा कि वह नशामुक्त भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा।
गौरतलब है कि यह मामला उस दौर की तस्करी से जुड़ा है, जब हिमाचल प्रदेश के कुल्लू-मनाली क्षेत्र से महानगरों तक चरस की आपूर्ति के मामले तेजी से बढ़ रहे थे। यह सफल दोषसिद्धि उन तस्करों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है जो अंतर-राज्यीय नेटवर्क के जरिए प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति करते हैं।
एनडीपीएस मामलों की सूचना देने के लिए जनता मानस राष्ट्रीय हेल्पलाइन (टोल-फ्री: 1933) पर संपर्क कर सकती है। सूचना देने वाले की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है।