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डूसू चुनाव 2026: एनएसयूआई का टिकट कटा, दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय लड़कर 30,615 वोटों से जीता उपाध्यक्ष पद

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डूसू चुनाव 2026: एनएसयूआई का टिकट कटा, दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय लड़कर 30,615 वोटों से जीता उपाध्यक्ष पद

सारांश

एनएसयूआई ने टिकट काटा, पर दीपांशु शौकीन ने हार नहीं मानी। डूसू 2026 में निर्दलीय लड़े और 30,615 वोटों से उपाध्यक्ष बन गए — दूसरे स्थान के उम्मीदवार से लगभग दोगुने वोट। बाकी तीन पदों पर एबीवीपी का कब्जा।

मुख्य बातें

दीपांशु शौकीन ने डूसू 2026 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 30,615 वोट पाकर उपाध्यक्ष पद जीता।
एनएसयूआई द्वारा टिकट काटे जाने के बाद शौकीन ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान (16,910 वोट) से 13,705 वोटों के बड़े अंतर से जीते।
अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के यश डबास ( 24,576 वोट ), सचिव पद पर रिया छावड़ी ( 21,650 वोट ) और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्यराज सिंह ( 16,615 वोट ) विजयी रहे।
अध्यक्ष पद पर 4,310 छात्रों ने नोटा को वोट दिया — पारंपरिक दलों से असंतोष का संकेत।
संयुक्त सचिव पद केवल 837 वोटों के मामूली अंतर से एबीवीपी ने जीता।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के 2026 चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) द्वारा टिकट न दिए जाने के बाद शौकीन ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से लगभग दोगुने वोट हासिल करके जीत का परचम लहराया।

मतदान के आँकड़े और जीत का अंतर

उपाध्यक्ष पद के लिए कुल 60,854 वोट डाले गए। दीपांशु शौकीन को 30,615 वोट मिले, जबकि इशू मौर्या को 16,910, वीर चतरथ को 4,313 और अरण्य सिंह राठौड़ को 2,274 वोट मिले। शौकीन और दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार के बीच 13,705 वोटों का अंतर इस जीत को और भी उल्लेखनीय बनाता है।

गौरतलब है कि किसी बड़े छात्र संगठन के समर्थन के बिना, केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता और ज़मीनी संपर्क के दम पर इतनी बड़ी जीत हासिल करना असाधारण माना जा रहा है। डीयू से जुड़े छात्रों के बीच शौकीन की स्वीकार्यता और पहुँच का यह सबसे बड़ा प्रमाण है।

विजेता की प्रतिक्रिया

जीत के बाद दीपांशु शौकीन ने कहा, 'छात्रों ने मुझ पर भरोसा किया है। मैंने सिर्फ उनकी आवाज बनने की कोशिश की है। अब जिम्मेदारी और बढ़ गई है। मेरा वादा है कि छात्रों के हित के लिए डूसू जवाबदेह बनेगा।' शौकीन ने यह भी कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों को वह नहीं भूलेंगे और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाएँगे।

तीन अन्य पदों पर एबीवीपी का दबदबा

डूसू के शेष तीनों प्रमुख पदों — अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव — पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के उम्मीदवार विजयी रहे।

अध्यक्ष पद के लिए कुल 60,845 वोट डाले गए, जिनमें एबीवीपी के यश डबास को 24,576 और एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। इस पद पर 4,310 छात्रों ने नोटा का विकल्प चुना, जो एक उल्लेखनीय आँकड़ा है।

सचिव पद के लिए 60,776 वोट पड़े। एबीवीपी की रिया छावड़ी को 21,650 और एनएसयूआई की नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिले। पंकज कुमार को 7,639 और नोटा को 7,884 वोट प्राप्त हुए।

संयुक्त सचिव पद के लिए 60,825 वोट डाले गए। एबीवीपी के लक्ष्यराज सिंह को 16,615, विशेष यादव को 15,778, एनएसयूआई के गोपाल चौधरी को 15,206 और नोटा को 7,389 वोट मिले। यह सीट महज़ 837 वोटों के अंतर से एबीवीपी के खाते में गई।

आम जनता पर असर और राजनीतिक संदेश

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय विश्वविद्यालयों की छात्र राजनीति में बड़े दलों के छात्र संगठनों का वर्चस्व लगातार बना रहा है। शौकीन की जीत यह संकेत देती है कि छात्र मतदाता पारंपरिक दलीय ढाँचे से इतर व्यक्तित्व और जमीनी जुड़ाव को प्राथमिकता देने लगे हैं। यह एनएसयूआई के लिए एक महत्वपूर्ण सबक भी है — टिकट आवंटन में की गई चूक ने पार्टी को उस उम्मीदवार से वंचित कर दिया जो सबसे अधिक वोट पाने वाला साबित हुआ।

आने वाले दिनों में नई डूसू कार्यकारिणी का गठन होगा, जहाँ एबीवीपी के तीन पदाधिकारियों और निर्दलीय उपाध्यक्ष के बीच तालमेल कैसे बनता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि जनाधार से। एनएसयूआई ने जिस उम्मीदवार को नकारा, वही उपाध्यक्ष पद पर सबसे अधिक वोट पाने वाला निकला — यह संगठनात्मक विफलता का ठोस प्रमाण है। दूसरी ओर, अध्यक्ष पद पर 4,310 नोटा वोट यह बताते हैं कि एक बड़ा वर्ग दोनों प्रमुख संगठनों से असंतुष्ट है। डूसू की नई कार्यकारिणी में एबीवीपी के तीन पदाधिकारी और एक निर्दलीय उपाध्यक्ष होंगे — यह संरचना सहयोग और टकराव दोनों की संभावनाएँ एक साथ खोलती है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डूसू चुनाव 2026 में उपाध्यक्ष पद किसने जीता?
निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने डूसू 2026 में उपाध्यक्ष पद जीता। उन्हें कुल 30,615 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहे इशू मौर्या को 16,910 वोट मिले।
दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय चुनाव क्यों लड़ा?
एनएसयूआई ने डूसू 2026 के लिए दीपांशु शौकीन को टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव में उतरने का फैसला किया। उनकी जीत ने साबित किया कि उनका ज़मीनी जनाधार संगठनात्मक समर्थन से कहीं अधिक मजबूत था।
डूसू 2026 में अध्यक्ष पद पर कौन जीता?
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के यश डबास ने अध्यक्ष पद जीता। उन्हें 24,576 वोट मिले, जबकि एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले।
डूसू 2026 में एबीवीपी का प्रदर्शन कैसा रहा?
एबीवीपी ने डूसू 2026 के तीन प्रमुख पद — अध्यक्ष (यश डबास), सचिव (रिया छावड़ी) और संयुक्त सचिव (लक्ष्यराज सिंह) — जीते। केवल उपाध्यक्ष पद निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने जीता।
डूसू 2026 के नतीजे एनएसयूआई के लिए क्या संदेश देते हैं?
एनएसयूआई के लिए यह चुनाव दोहरा झटका रहा — जिस उम्मीदवार का टिकट काटा गया, वह उपाध्यक्ष पद पर सबसे अधिक वोट पाने वाला बना, और अन्य पदों पर भी पार्टी एबीवीपी से पीछे रही। यह संगठन की टिकट वितरण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
राष्ट्र प्रेस
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