11 अगस्त 2026
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भरतपुर कोर्ट ने NCB मामले में 6 तस्करों को 15 साल की सजा सुनाई, ₹2-2 लाख जुर्माना भी

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भरतपुर कोर्ट ने NCB मामले में 6 तस्करों को 15 साल की सजा सुनाई, ₹2-2 लाख जुर्माना भी

सारांश

राजस्थान की भरतपुर NDPS कोर्ट ने झारखंड से राजस्थान तक 619 किलो डोडा चूरा की तस्करी करने वाले 6 आरोपियों को 15 साल की कठोर कैद और ₹2-2 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। NCB जयपुर की पैरवी पर आया यह फैसला 3 अक्टूबर 2021 की गिरफ्तारी के करीब पाँच साल बाद आया।

मुख्य बातें

भरतपुर की विशेष NDPS कोर्ट ने 19 जून 2026 को 6 आरोपियों को दोषी ठहराया।
सभी दोषियों को 15 साल की कठोर कैद और प्रत्येक पर ₹2 लाख जुर्माना लगाया गया।
3 अक्टूबर 2021 को अमौली टोल प्लाजा के पास 619.800 किलोग्राम डोडा चूरा जब्त हुआ था।
दोषियों में नागौर के संग्राम राम, धीमा राम, सुनील, ओमा राम, भुट्टा राम और बीकानेर के कालू राम जाट शामिल हैं।
तस्करी झारखंड से राजस्थान तक की अंतर-राज्यीय साजिश थी; NCB जयपुर जोनल यूनिट ने मामले की पैरवी की।

राजस्थान के भरतपुर स्थित विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने 19 जून 2026 को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा दर्ज अंतर-राज्यीय डोडा चूरा तस्करी मामले में 6 आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 15 साल की कठोर कैद और ₹2-2 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। NCB जयपुर जोनल यूनिट की पैरवी पर यह फैसला उस मामले में आया जिसमें 3 अक्टूबर 2021 को भरतपुर के अमौली टोल प्लाजा के पास 619.800 किलोग्राम प्रतिबंधित डोडा चूरा जब्त किया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

NCB के बयान के अनुसार, खुफिया जानकारी के आधार पर जयपुर यूनिट की टीम ने 3 अक्टूबर 2021 को अमौली टोल प्लाजा के पास एक ट्रक और उसके साथ चल रही स्विफ्ट कार को रोका। तलाशी में ट्रक से 28 बोरियों में भरा 619.800 किलोग्राम डोडा चूरा बरामद हुआ, जो नारकोटिक ड्रग्स व साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत पूर्णतः प्रतिबंधित पदार्थ है।

दोषी करार दिए गए आरोपी

विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने जिन छह व्यक्तियों को दोषी ठहराया, वे हैं — नागौर जिले के संग्राम राम बावरी, धीमा राम बिश्नोई, सुनील, ओमा राम और भुट्टा राम बावरी तथा बीकानेर जिले के कालू राम जाट। जाँच में सामने आया कि इन सभी ने झारखंड से राजस्थान तक डोडा चूरा की अवैध ढुलाई की आपराधिक साजिश रची थी।

NCB के अनुसार, भुट्टा राम इस प्रतिबंधित सामान को प्राप्त करने वाला मुख्य व्यक्ति था, जबकि शेष दोषी परिवहन, एस्कॉर्टिंग और भुगतान की व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

कानूनी आधार और सजा

इस मामले में NDPS अधिनियम, 1985 की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। विशेष कोर्ट ने सभी छह दोषियों को 15 वर्ष की कठोर कारावास के साथ-साथ प्रत्येक पर ₹2 लाख का जुर्माना लगाया। यह फैसला अंतर-राज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क के विरुद्ध न्यायिक कार्रवाई का एक उल्लेखनीय उदाहरण माना जा रहा है।

NCB की प्रतिक्रिया

NCB जयपुर जोनल यूनिट ने इस फैसले को 'नशा-मुक्त भारत' अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। बयान में कहा गया कि यूनिट की पैरवी ने यह सुनिश्चित किया कि न्याय मिले और समुदायों को नशीले पदार्थों के खतरे से बचाया जा सके। NCB ने दोहराया कि वह ड्रग नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

क्या होगा आगे

गौरतलब है कि यह मामला करीब पाँच वर्षों तक कोर्ट में चला, जो अंतर-राज्यीय नशा तस्करी के मामलों में अभियोजन की जटिलता को दर्शाता है। यह फैसला राजस्थान में सक्रिय डोडा चूरा तस्करी नेटवर्क के विरुद्ध कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उजागर करता है कि गिरफ्तारी से सजा तक पाँच साल लग गए — जो NDPS मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति का संकेत है। डोडा चूरा की अंतर-राज्यीय तस्करी राजस्थान में कोई नई घटना नहीं है; झारखंड-राजस्थान मार्ग पर ऐसे नेटवर्क पहले भी पकड़े गए हैं। असली सवाल यह है कि क्या आपूर्ति श्रृंखला के ऊपरी सिरे — यानी स्रोत और वित्तपोषक — तक कार्रवाई पहुँची, या केवल वाहक और ट्रांसपोर्टर ही दोषी ठहराए गए।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरतपुर NCB मामले में किसे और क्या सजा मिली?
विशेष NDPS कोर्ट, भरतपुर ने 6 दोषियों — संग्राम राम बावरी, धीमा राम बिश्नोई, सुनील, ओमा राम, भुट्टा राम बावरी (सभी नागौर) और कालू राम जाट (बीकानेर) — को 15 साल की कठोर कैद और ₹2-2 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला 19 जून 2026 को आया।
डोडा चूरा क्या है और यह क्यों प्रतिबंधित है?
डोडा चूरा अफीम के पौधे से प्राप्त एक नशीला पदार्थ है जिसे NDPS अधिनियम, 1985 के तहत भारत में पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। इसका दुरुपयोग नशे की लत के रूप में किया जाता है और यह अंतर-राज्यीय तस्करी नेटवर्क का प्रमुख उत्पाद रहा है।
इस मामले में NCB ने कब और कैसे कार्रवाई की?
NCB जयपुर जोनल यूनिट ने खुफिया जानकारी के आधार पर 3 अक्टूबर 2021 को भरतपुर के अमौली टोल प्लाजा के पास एक ट्रक और स्विफ्ट कार को रोका। तलाशी में 28 बोरियों में 619.800 किलोग्राम डोडा चूरा बरामद हुआ और सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
तस्करी का रूट क्या था और इसमें किसकी क्या भूमिका थी?
जाँच के अनुसार यह तस्करी झारखंड से राजस्थान तक की अंतर-राज्यीय साजिश थी। भुट्टा राम बावरी प्रतिबंधित माल प्राप्त करने वाला मुख्य व्यक्ति था, जबकि बाकी दोषी परिवहन, एस्कॉर्टिंग और भुगतान की व्यवस्था में शामिल थे।
इस फैसले का 'नशा-मुक्त भारत' अभियान पर क्या असर है?
NCB ने इस फैसले को 'नशा-मुक्त भारत' अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। यह दोषसिद्धि अंतर-राज्यीय ड्रग नेटवर्क के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की प्रभावशीलता का उदाहरण प्रस्तुत करती है और भविष्य के मामलों में अभियोजन के लिए एक मिसाल बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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