एनसीबी की बड़ी जीत: अहमदाबाद ड्रग तस्कर को 10 साल कठोर कारावास, जोधपुर मामले में भी सजा
सारांश
मुख्य बातें
वडोदरा स्थित विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने 15 जून 2026 को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा दर्ज 2021 के एक अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी मामले में दोषी को 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹1 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई। यह सजा एनसीबी की उस व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है, जो देशभर में अवैध नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए चलाई जा रही है।
अहमदाबाद मामला: मुंबई से आ रहा था मेफेड्रोन
अहमदाबाद के शाहपुर निवासी असलम अहमद पठान को अप्रैल 2021 में 99 ग्राम मेफेड्रोन (एमडी) के साथ गिरफ्तार किया गया था। एनसीबी के अनुसार, यह प्रतिबंधित मादक पदार्थ मुंबई से अहमदाबाद लाया जा रहा था। विशेष न्यायालय ने साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पठान को दोषी करार देते हुए एनडीपीएस अधिनियम के तहत कठोर सजा सुनाई।
गौरतलब है कि मेफेड्रोन एक सिंथेटिक उत्तेजक पदार्थ है, जिसे भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है और जिसकी तस्करी हाल के वर्षों में पश्चिमी भारत में तेज़ी से बढ़ी है।
राजस्थान मामला: ट्रक के ईंधन टैंक में छुपाई थी 40 किलो अफीम
इसी सप्ताह, एनसीबी की जयपुर जोनल यूनिट ने एक अलग अंतरराज्यीय अफीम तस्करी मामले में भी सफलता हासिल की। अजमेर स्थित विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने राजस्थान के जोधपुर जिले के डांगियावास निवासी जवाहरलाल (पिता: साहिराम) को दोषी पाया।
यह मामला 19 मई 2020 का है। एनसीबी को एक ट्रक में अवैध अफीम की तस्करी की विशिष्ट सूचना मिली थी, जिसके बाद अधिकारियों ने अजमेर के गेगल टोल प्लाजा के निकट नाकाबंदी की। तलाशी में ट्रक के ईंधन टैंक के पास एक विशेष रूप से तैयार छुपे हुए डिब्बे से 22 पैकेट बरामद हुए, जिनमें कुल 40.850 किलोग्राम अफीम थी।
जाँच में सामने आया कि यह प्रतिबंधित सामग्री बिहार के शेरघाटी से लाई गई थी और राजस्थान के पाली पहुँचाई जानी थी। न्यायालय ने जवाहरलाल को 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹1 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई।
एनसीबी की कार्रवाई का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब एनसीबी पश्चिम और उत्तर भारत में अंतरराज्यीय मादक पदार्थ नेटवर्क के विरुद्ध अभियान तेज़ कर रही है। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स दोनों पर कड़ी सजा का प्रावधान है। दोनों मामलों में विशेष न्यायालयों द्वारा अधिकतम सजा का दिया जाना इस बात का संकेत है कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य ठोस थे।
आगे क्या
दोनों दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। एनसीबी के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इन मामलों से जुड़े नेटवर्क की जाँच अभी जारी है और आगे और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।