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एनसीबी की बड़ी जीत: अहमदाबाद ड्रग तस्कर को 10 साल कठोर कारावास, जोधपुर मामले में भी सजा

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एनसीबी की बड़ी जीत: अहमदाबाद ड्रग तस्कर को 10 साल कठोर कारावास, जोधपुर मामले में भी सजा

सारांश

एनसीबी को दो अलग-अलग राज्यों में बड़ी कानूनी जीत मिली है। वडोदरा और अजमेर की विशेष अदालतों ने मेफेड्रोन और अफीम तस्करी के दो दोषियों को 10-10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई — यह अंतरराज्यीय नशा नेटवर्क के खिलाफ एनसीबी के बढ़ते अभियान का प्रमाण है।

मुख्य बातें

वडोदरा विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने असलम अहमद पठान को 10 साल कठोर कारावास और ₹1 लाख जुर्माना सुनाया।
पठान को अप्रैल 2021 में 99 ग्राम मेफेड्रोन (एमडी) के साथ पकड़ा गया था, जो मुंबई से अहमदाबाद लाई जा रही थी।
अजमेर विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने जवाहरलाल को 40.850 किलोग्राम अफीम तस्करी में 10 साल कठोर कारावास और ₹1 लाख जुर्माना दिया।
अफीम बिहार के शेरघाटी से राजस्थान के पाली भेजी जा रही थी; 19 मई 2020 को गेगल टोल प्लाजा पर बरामद हुई।
दोनों मामलों में एनसीबी ने अभियोजन का नेतृत्व किया और विशेष न्यायालयों ने एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत दोष सिद्ध किया।

वडोदरा स्थित विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने 15 जून 2026 को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा दर्ज 2021 के एक अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी मामले में दोषी को 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹1 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई। यह सजा एनसीबी की उस व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है, जो देशभर में अवैध नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए चलाई जा रही है।

अहमदाबाद मामला: मुंबई से आ रहा था मेफेड्रोन

अहमदाबाद के शाहपुर निवासी असलम अहमद पठान को अप्रैल 2021 में 99 ग्राम मेफेड्रोन (एमडी) के साथ गिरफ्तार किया गया था। एनसीबी के अनुसार, यह प्रतिबंधित मादक पदार्थ मुंबई से अहमदाबाद लाया जा रहा था। विशेष न्यायालय ने साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पठान को दोषी करार देते हुए एनडीपीएस अधिनियम के तहत कठोर सजा सुनाई।

गौरतलब है कि मेफेड्रोन एक सिंथेटिक उत्तेजक पदार्थ है, जिसे भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है और जिसकी तस्करी हाल के वर्षों में पश्चिमी भारत में तेज़ी से बढ़ी है।

राजस्थान मामला: ट्रक के ईंधन टैंक में छुपाई थी 40 किलो अफीम

इसी सप्ताह, एनसीबी की जयपुर जोनल यूनिट ने एक अलग अंतरराज्यीय अफीम तस्करी मामले में भी सफलता हासिल की। अजमेर स्थित विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने राजस्थान के जोधपुर जिले के डांगियावास निवासी जवाहरलाल (पिता: साहिराम) को दोषी पाया।

यह मामला 19 मई 2020 का है। एनसीबी को एक ट्रक में अवैध अफीम की तस्करी की विशिष्ट सूचना मिली थी, जिसके बाद अधिकारियों ने अजमेर के गेगल टोल प्लाजा के निकट नाकाबंदी की। तलाशी में ट्रक के ईंधन टैंक के पास एक विशेष रूप से तैयार छुपे हुए डिब्बे से 22 पैकेट बरामद हुए, जिनमें कुल 40.850 किलोग्राम अफीम थी।

जाँच में सामने आया कि यह प्रतिबंधित सामग्री बिहार के शेरघाटी से लाई गई थी और राजस्थान के पाली पहुँचाई जानी थी। न्यायालय ने जवाहरलाल को 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹1 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई।

एनसीबी की कार्रवाई का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब एनसीबी पश्चिम और उत्तर भारत में अंतरराज्यीय मादक पदार्थ नेटवर्क के विरुद्ध अभियान तेज़ कर रही है। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स दोनों पर कड़ी सजा का प्रावधान है। दोनों मामलों में विशेष न्यायालयों द्वारा अधिकतम सजा का दिया जाना इस बात का संकेत है कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य ठोस थे।

आगे क्या

दोनों दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। एनसीबी के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इन मामलों से जुड़े नेटवर्क की जाँच अभी जारी है और आगे और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या व्यक्तिगत दोषसिद्धि अंतरराज्यीय नशा नेटवर्क को वास्तव में कमज़ोर करती है। मुंबई-अहमदाबाद मेफेड्रोन रूट और बिहार-राजस्थान अफीम कॉरिडोर दोनों पुराने और सुस्थापित मार्ग हैं — एक तस्कर की सजा से आपूर्ति श्रृंखला बाधित नहीं होती। एनसीबी की सफलता दर तभी सार्थक होगी जब नेटवर्क के संचालकों तक जाँच पहुँचे, न केवल वाहकों तक।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असलम अहमद पठान को किस मामले में सजा मिली?
अहमदाबाद के शाहपुर निवासी असलम अहमद पठान को अप्रैल 2021 में 99 ग्राम मेफेड्रोन (एमडी) के साथ गिरफ्तार किया गया था, जो मुंबई से अहमदाबाद लाई जा रही थी। वडोदरा विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने उन्हें 10 साल कठोर कारावास और ₹1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई।
राजस्थान के जवाहरलाल को किस आरोप में दोषी पाया गया?
जोधपुर के डांगियावास निवासी जवाहरलाल को 19 मई 2020 को अजमेर के गेगल टोल प्लाजा पर 40.850 किलोग्राम अफीम के साथ पकड़ा गया था। यह अफीम बिहार के शेरघाटी से राजस्थान के पाली ले जाई जा रही थी और ट्रक के ईंधन टैंक के पास छुपाई गई थी।
एनडीपीएस अधिनियम के तहत ड्रग तस्करी पर क्या सजा होती है?
नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर मात्रा और पदार्थ के प्रकार के आधार पर 10 से 20 साल तक कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। दोनों मामलों में न्यायालय ने 10 साल की सजा सुनाई।
एनसीबी की जयपुर जोनल यूनिट ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
एनसीबी की जयपुर जोनल यूनिट ने राजस्थान अफीम तस्करी मामले की जाँच की और अजमेर की विशेष एनडीपीएस अदालत में अभियोजन का नेतृत्व किया। जोधपुर यूनिट ने मूल मामला दर्ज किया था और गेगल टोल प्लाजा पर नाकाबंदी कर बरामदगी की थी।
क्या दोषी उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं?
हाँ, एनडीपीएस अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय के फैसले के विरुद्ध संबंधित उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है। दोनों दोषियों के पास यह कानूनी विकल्प उपलब्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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