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'मोदी कथा' लॉन्च: डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल ने PM मोदी के मानवीय व्यक्तित्व की 10 अनसुनी कहानियाँ की पेश

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'मोदी कथा' लॉन्च: डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल ने PM मोदी के मानवीय व्यक्तित्व की 10 अनसुनी कहानियाँ की पेश

सारांश

पीएम मोदी के जन्मदिन पर नई दिल्ली में लॉन्च हुई 'मोदी कथा' राजनीति से परे उनके मानवीय पक्ष की 10 सच्ची कहानियाँ समेटे है। लेखक डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल का दावा है कि संयम, क्षमाशीलता और सकारात्मकता — ये तीन गुण उनके व्यक्तित्व की असली नींव हैं।

मुख्य बातें

हरीश चंद्र बर्णवाल की पुस्तक 'मोदी कथा' का लोकार्पण 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुआ।
पुस्तक में PM मोदी के मानवीय पक्ष पर आधारित 10 सच्ची कहानियों का संकलन है।
लेखक ने मोदी की तीन विशेषताएं बताईं — देशभक्ति , सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण और इन दोनों का समन्वय।
जंतर मंतर छात्र आंदोलन में मोदी के क्षमा-निर्णय को उनके संयमी स्वभाव की मिसाल बताया गया।
पुस्तक 1990 की एक ट्रेन घटना सहित मुख्यमंत्री बनने से पहले के अनजाने प्रसंग भी समेटती है।

वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल की नई पुस्तक 'मोदी कथा' का लोकार्पण 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में किया गया — यह दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन भी है। पुस्तक में मोदी के राजनीतिक व्यक्तित्व से इतर उनके मानवीय और प्रेरक पक्ष को उजागर करने का प्रयास किया गया है।

पुस्तक का मूल विचार

लेखक डॉ. बर्णवाल के अनुसार, 'मोदी कथा' 10 सच्ची कहानियों का संकलन है जो प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व का वह पहलू सामने लाती हैं, जिससे आम जनता अपरिचित है। उन्होंने कहा, 'लोग प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक व्यक्तित्व से वाकिफ हैं, क्योंकि वे पिछले 25 सालों से सत्ता में हैं। लेकिन उनका एक मानवीय पहलू भी है, और 'मोदी कथा' में उसी पहलू को उजागर करने की कोशिश की गई है।'

पुस्तक में 1990 की एक घटना का भी उल्लेख है, जिसमें दो महिलाएँ ट्रेन यात्रा के दौरान मोदी से मिलती हैं। उनकी पूर्व धारणा थी कि नेता 'गुंडे टाइप के होते हैं', लेकिन मुलाकात के बाद उनके विचार पूरी तरह बदल जाते हैं।

व्यक्तित्व के तीन स्तंभ

डॉ. बर्णवाल ने पुस्तक में मोदी के व्यक्तित्व को तीन केंद्रीय विचारों पर टिका बताया। उन्होंने कहा, 'पहली बात — देश का हित सर्वोपरि, यानी देशभक्ति। दूसरी — सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण और उनका विजन। तीसरी — इन दोनों का समन्वय। आप उनके सभी कामों को इसी नजरिए से देख और परख सकते हैं।' लेखक का मानना है कि मोदी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि 'नकारात्मकता के चरम पर भी आप उनमें सकारात्मकता पैदा होते हुए देख सकते हैं।'

संयम और क्षमाशीलता की मिसाल

डॉ. बर्णवाल ने जंतर मंतर पर हुए एक छात्र आंदोलन का भी जिक्र किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को तत्काल क्षमा करने का निर्णय लिया था। लेखक ने इसे उनके व्यक्तित्व की मिसाल बताते हुए कहा कि 'एक झटके में बच्चों को क्षमा करना उनका स्वभाव है। उनका पूरा जीवन इसी बात के इर्द-गिर्द बुना हुआ है।' उन्होंने मोदी की 'सबसे बड़ी ताकत' के रूप में उनके संयम को रेखांकित किया — 'वे कभी भी तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देते।'

जेनरेशन Z के लिए सीख

युवा पीढ़ी के लिए पुस्तक की प्रासंगिकता पर डॉ. बर्णवाल ने कहा, 'आज की जेनजी तेजी से आगे बढ़ रही है, जो अच्छा है। लेकिन तेजी से आगे बढ़ने के साथ अनुभव कहाँ से लाएंगे? संयम, समर्पण और प्रतिबद्धता के बिना सब कुछ अधूरा रहता है।' उन्होंने यह भी कहा कि मोदी स्वयं जेनरेशन Z से सीखते हैं और उसे आत्मसात करते हैं — यह आदान-प्रदान एकतरफा नहीं है।

लोकार्पण का संदर्भ

पुस्तक का विमोचन 17 सितंबर को मोदी के जन्मदिन पर जानबूझकर चुना गया, ताकि इसका भावनात्मक और सांस्कृतिक संदर्भ स्पष्ट रहे। डॉ. बर्णवाल ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा, 'यह हमारा सौभाग्य है कि देश को आप जैसे व्यक्ति मिले।' 'मोदी कथा' मुख्यमंत्री बनने से पहले के उन वर्षों की भी पड़ताल करती है, जब मोदी के व्यक्तित्व की संवेदनशीलता और संजीदगी सार्वजनिक दृष्टि से ओझल थी। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए भी प्रासंगिक बताई जा रही है जो नेतृत्व और जीवन-दर्शन पर वैकल्पिक दृष्टि की तलाश में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे उनके जन्मदिन पर जारी करना स्वाभाविक रूप से इसे प्रचारात्मक रंग देता है — यह तथ्य पाठक को ध्यान में रखना चाहिए। पुस्तक की '10 सच्ची कहानियाँ' स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं, और लेखक स्वयं मोदी के प्रशंसक हैं — इसलिए इसे जीवनी के बजाय समर्थन-साहित्य की श्रेणी में रखना अधिक उचित है। यह पुस्तक उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें राजनेताओं पर व्यक्तित्व-केंद्रित साहित्य राजनीतिक समर्थन का एक सांस्कृतिक माध्यम बन चुका है। पत्रकारिता की कसौटी पर यह रचना कम और एक नेता की छवि-निर्माण का प्रयास अधिक प्रतीत होती है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'मोदी कथा' पुस्तक क्या है?
'मोदी कथा' वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल द्वारा लिखित पुस्तक है, जिसमें PM नरेंद्र मोदी के मानवीय व्यक्तित्व पर आधारित 10 कहानियाँ संकलित हैं। इसका लोकार्पण 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में मोदी के जन्मदिन के अवसर पर किया गया।
'मोदी कथा' के लेखक कौन हैं?
इस पुस्तक के लेखक डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल हैं, जो वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं। उन्होंने मोदी के राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय पक्ष को सामने लाने के लिए यह पुस्तक लिखी।
पुस्तक में किन कहानियों का जिक्र है?
पुस्तक में 1990 की एक ट्रेन यात्रा की कहानी शामिल है, जिसमें दो महिलाएँ मोदी से मिलने के बाद अपनी धारणा बदलती हैं। इसके अलावा जंतर मंतर छात्र आंदोलन में उनके क्षमा-निर्णय जैसी घटनाएँ भी इस संकलन में हैं।
लेखक के अनुसार युवाओं के लिए मोदी से सबसे बड़ी सीख क्या है?
डॉ. बर्णवाल के अनुसार, तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन संयम, समर्पण और प्रतिबद्धता के बिना यह अधूरा है। उनका मानना है कि मोदी स्वयं जेनरेशन Z से सीखते हैं और यह आदान-प्रदान एकतरफा नहीं है।
पुस्तक का लोकार्पण 17 सितंबर को ही क्यों किया गया?
17 सितंबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। लेखक डॉ. बर्णवाल ने इस तिथि को चुनकर पुस्तक के भावनात्मक और सांस्कृतिक संदर्भ को रेखांकित किया।
राष्ट्र प्रेस
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