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ओडिशा: जादू-टोना के शक में पिता-पुत्र की हत्या, परलाखेमुंडी अदालत ने 12 दोषियों को उम्रकैद सुनाई

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ओडिशा: जादू-टोना के शक में पिता-पुत्र की हत्या, परलाखेमुंडी अदालत ने 12 दोषियों को उम्रकैद सुनाई

सारांश

ओडिशा के गजपति में जादू-टोना के संदेह पर पिता-पुत्र की नृशंस हत्या करने वाले 12 ग्रामीणों को पाँच साल बाद परलाखेमुंडी अदालत ने आजीवन कारावास सुनाया। यह फैसला राज्य में अंधविश्वास-जनित हिंसा के खिलाफ एक कड़ा न्यायिक संदेश है।

मुख्य बातें

परलाखेमुंडी की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अदालत ने 12 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
घटना 12 जून 2021 को गजपति जिले के मुथागुडा गाँव में हुई थी, जहाँ जादू-टोना के शक में लुका दलाबेहरा और पुत्र अनुका दलाबेहरा की हत्या की गई।
सभी 12 दोषी अदावा थाना क्षेत्र के मुथागुडा गाँव के निवासी हैं।
अदालत ने 'गलत तरीके से फँसाए जाने' की दलील को खारिज करते हुए गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर सजा सुनाई।
रायगढ़ा में भी उसी दिन एक अलग मामले में गुरुनाथ गौड़ा को पत्नी की हत्या के लिए आजीवन कारावास मिला।

ओडिशा के गजपति जिले में जादू-टोना के संदेह पर लुका दलाबेहरा और उनके पुत्र अनुका दलाबेहरा की नृशंस हत्या के मामले में परलाखेमुंडी की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अदालत ने 18 सितंबर 2026 को 12 आरोपियों को दोषी करार देते हुए सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह घटना 12 जून 2021 को मुथागुडा गाँव में हुई थी और पाँच वर्षों की न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने इसे सुनिश्चित दंड का मामला माना।

मुख्य घटनाक्रम

12 जून 2021 को गजपति जिले के अदावा थाना क्षेत्र के मुथागुडा गाँव में आरोपी जोशुआ गामांगो के घर के निकट ग्रामीणों की एक बैठक बुलाई गई थी। उस बैठक में आरोप लगाया गया कि लुका दलाबेहरा जादू-टोना के ज़रिये गाँव के लोगों को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

बैठक के तुरंत बाद भीड़ ने पिता-पुत्र को पकड़कर नज़दीकी कुसुमसाही गाँव के खेत में ले जाया और वहाँ बेरहमी से हत्या कर दी। अनुका दलाबेहरा की गला काटकर हत्या की गई थी।

दोषियों की पहचान

अदालत ने जिन 12 व्यक्तियों को दोषी ठहराया, वे सभी मुथागुडा गाँव के निवासी हैं — जोशुआ गामांगो, बेंजामिन गामांगो, संजय गामांगो, अभिमन्यु राइका, कंद्रा गामांगो उर्फ जानस, मिखाइल गामांगो, सेटो राइका, जिरी उर्फ जर्मिया राइका, अब्राहम बदरैता, जुनेश रैता, कुरा रैता और सोमनाथ गामांगो

13 जून 2021 को पीड़ित की पुत्री लुडिया गामांगो की लिखित शिकायत पर अदावा पुलिस ने मामला दर्ज किया था। जाँच पूरी होने के बाद पुलिस ने सभी 12 आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की।

अदालत का फैसला

अदालत ने गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों की विस्तृत समीक्षा के बाद यह स्थापित किया कि पिता-पुत्र दोनों की सुनियोजित तरीके से हत्या की गई थी। आरोपी पक्ष की ओर से उठाई गई 'गलत तरीके से फँसाए जाने' की दलील को अदालत ने खारिज कर दिया।

गजपति के पुलिस अधीक्षक प्रह्लाद सहाय मीणा ने इस फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए जाँच दल, अभियोजन अधिकारी और न्यायालय के कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों की सराहना की।

रायगढ़ा में एक अन्य फैसला

उसी दिन रायगढ़ा जिले की एक स्थानीय अदालत ने भी पत्नी की हत्या के मामले में गुरुनाथ गौड़ा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। गुरुनाथ गौड़ा काशीपुर थाना क्षेत्र के भाटीपास गाँव के निवासी हैं।

अभियोजन के अनुसार, 5 फरवरी 2024 को पारिवारिक विवाद के दौरान गुरुनाथ ने अपनी पत्नी पुष्पा गौड़ा पर कुल्हाड़ी से हमला किया था। गंभीर रूप से घायल पुष्पा को थुआमुलरामपुर के अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ

ओडिशा में जादू-टोना के नाम पर हत्या की यह कोई पहली घटना नहीं है। राज्य में ऐसी घटनाएँ पिछले दो दशकों से चिंता का विषय रही हैं, विशेषकर आदिवासी-बहुल जिलों में। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जागरूकता अभियानों और कड़े कानूनी प्रावधानों के बावजूद अंधविश्वास-जनित हिंसा पर पूर्णतः लगाम नहीं लग पाई है। इस फैसले को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अधिकांश आदिवासी-बहुल जिलों में। यह फैसला तब आया है जब राज्य सरकार अंधविश्वास-विरोधी कानूनों को सख्त बनाने पर विचार कर रही है। असली सवाल यह है कि केवल न्यायिक दंड से क्या काम चलेगा, या इसके साथ-साथ सामुदायिक जागरूकता और सामाजिक सुधार की भी उतनी ही ज़रूरत है। 12 लोगों को उम्रकैद एक मज़बूत संदेश ज़रूर है, लेकिन जब तक अंधविश्वास की जड़ें नहीं कटतीं, ऐसी त्रासदियाँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा के गजपति जिले में जादू-टोना हत्याकांड क्या था?
12 जून 2021 को गजपति जिले के मुथागुडा गाँव में जादू-टोना के संदेह पर लुका दलाबेहरा और उनके पुत्र अनुका दलाबेहरा को भीड़ ने कुसुमसाही गाँव के खेत में ले जाकर बेरहमी से मार डाला था। अनुका की गला काटकर हत्या की गई थी।
परलाखेमुंडी अदालत ने इस मामले में क्या फैसला सुनाया?
परलाखेमुंडी की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अदालत ने 12 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर 'गलत तरीके से फँसाए जाने' की दलील को खारिज किया।
इस मामले में कितने और कौन लोग दोषी पाए गए?
कुल 12 व्यक्ति दोषी पाए गए — जोशुआ गामांगो, बेंजामिन गामांगो, संजय गामांगो, अभिमन्यु राइका, कंद्रा गामांगो उर्फ जानस, मिखाइल गामांगो, सेटो राइका, जिरी उर्फ जर्मिया राइका, अब्राहम बदरैता, जुनेश रैता, कुरा रैता और सोमनाथ गामांगो। सभी मुथागुडा गाँव के निवासी हैं।
यह मामला पुलिस में कैसे और कब दर्ज हुआ?
घटना के अगले दिन, 13 जून 2021 को, पीड़ित लुका दलाबेहरा की पुत्री लुडिया गामांगो की लिखित शिकायत पर अदावा पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। जाँच के बाद पुलिस ने सभी 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
ओडिशा में जादू-टोना के नाम पर हिंसा कितनी बड़ी समस्या है?
ओडिशा, विशेष रूप से आदिवासी-बहुल जिलों में, जादू-टोना के नाम पर हिंसा एक गंभीर और लंबे समय से चली आ रही समस्या है। सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, जागरूकता अभियानों और कानूनी प्रावधानों के बावजूद ऐसी घटनाएँ पूरी तरह नहीं थमी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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