बागलकोट सूखा: CM शिवकुमार बोले — 'चार तालुकों में एक भी फसल नहीं बची', केंद्र से कर्ज माफी की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 4 सितंबर 2026 को बागलकोट जिले के चार तालुकों का दौरा कर सूखे की भयावह स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लिया। शिरूर गांव के खेतों का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने स्पष्ट कहा कि दौरे में शामिल किसी भी इलाके में फसलें ठीक से नहीं उगी हैं। सरकार प्रभावित किसानों को राहत देने के उपायों पर विचार करेगी।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री ने शिरूर गांव में खेतों का निरीक्षण करने के बाद कहा, 'मैंने बागलकोट जिले के चार तालुकों का दौरा किया है और कहीं भी फसलें ठीक से नहीं उगी हैं। सूरजमुखी, मिर्च, कुलथी या अरहर की फसलें नहीं हैं। कुछ किसानों ने 20 से 30 एकड़ में खेती की है और उनका कहना है कि उनके पास फसल बीमा है। मैं अधिकारियों और विधायकों के साथ स्थिति पर चर्चा करूंगा और देखूंगा कि क्या राहत दी जा सकती है।'
उन्होंने यह भी बताया कि फसल बाहर से हरी-भरी दिख सकती है, लेकिन इसका अर्थ पैदावार नहीं है — सूरजमुखी सूख चुकी है और मिर्च की फसलें बीमारी की चपेट में हैं।
बारिश की कमी और सूखे का आकलन
जिला स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए शिवकुमार ने बताया कि बागलकोट में इस मौसम में बारिश में लगभग 40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है और जिले के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात हैं। उन्होंने कहा कि सरकार उन इलाकों में भी सूखे की स्थिति का आकलन कर रही है जहाँ अभी तक आधिकारिक रूप से सूखा घोषित नहीं किया गया है।
केंद्र से कर्ज माफी की माँग
शिवकुमार ने केंद्र सरकार से किसानों की मदद के लिए आगे आने और कृषि ऋण माफी पर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली पूर्व सरकार द्वारा घोषित कृषि ऋण माफी का उल्लेख करते हुए कहा, 'यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जिम्मेदारी है। उसके नेताओं को केंद्र और प्रधानमंत्री पर किसानों का कर्ज माफ करने के लिए दबाव डालना चाहिए। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने ऐसा किया था — उन्हें भी अब ऐसा करना चाहिए।'
फसल बीमा में देरी और गड़बड़ी के आरोप
फसल बीमा भुगतान में हो रही देरी पर मुख्यमंत्री ने माना कि पुराने दावों का पैसा अभी तक जारी नहीं हुआ है और इस समस्या के समाधान के लिए बैठकें की जा रही हैं। बागलकोट में फसल बीमा योजना में ₹30 करोड़ की गड़बड़ी के आरोपों पर उन्होंने कहा, 'यह पूरे राज्य में फैला नेटवर्क है। बीमा के मामले में एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। मैं इसकी रिपोर्ट मंगाऊंगा और बेंगलुरु में बैठक करूंगा।'
आगे की राह
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने किसानों की बुवाई, खेती और ट्रैक्टर चलाने में होने वाले खर्च का अध्ययन किया है और अतिरिक्त राहत के विकल्पों पर विचार जारी है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब कर्नाटक के कई उत्तरी जिले सामान्य से कम मानसून की मार झेल रहे हैं और किसान संगठन राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की माँग कर रहे हैं।