कर्नाटक सूखा: गडग में 50 साल का सबसे बड़ा संकट, CM शिवकुमार ने जल्द दूसरी सूची का दिया भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 1 सितंबर को गडग में जिला-स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक के बाद स्पष्ट किया कि राज्य सरकार निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत विस्तृत मूल्यांकन पूरा करने के बाद सूखा प्रभावित तालुकों की दूसरी सूची शीघ्र जारी करेगी। उन्होंने गडग को पिछले पाँच दशकों का सबसे भीषण सूखा बताया, जहाँ इस वर्ष वर्षा सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम रही है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने गडग के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में जिला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और उसके बाद मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, 'हमें गाइडलाइंस के मुताबिक सूखा-ग्रस्त इलाकों की घोषणा करनी होती है। इसी के अनुसार, हम एक स्टडी कर रहे हैं और जल्द ही दूसरी लिस्ट जारी करेंगे।' अब तक जिले में केवल गजेंद्रगढ़ तालुक को ही सूखा-ग्रस्त घोषित किया गया है, जबकि जिला प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में सभी विधायकों ने गडग जिले के सभी तालुकों को सूखा-ग्रस्त घोषित करने की माँग का ज्ञापन सौंपा है।
किसानों की स्थिति
शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने हेलीकॉप्टर से इलाके का हवाई सर्वेक्षण किया और व्यक्तिगत रूप से किसानों के खेतों में जाकर कपास, मूंगफली, मक्का और सूरजमुखी की फसलों का निरीक्षण किया। उनके अनुसार, कई स्थानों पर बुवाई ही नहीं हो सकी और जहाँ हुई भी वहाँ किसानों को अनुमानतः केवल 10 से 15 प्रतिशत फसल मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि किसानों की आजीविका गंभीर खतरे में है और लोग परेशान हैं।
केंद्र सरकार से सहायता की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिला प्रभारी मंत्री ने हर तालुक का दौरा कर जमीनी रिपोर्ट सौंपी है और अधिकारी भी अपना स्वतंत्र आकलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'दोनों रिपोर्टों की जाँच की जानी है और केंद्र को एक रिपोर्ट सौंपी जानी है।' शिवकुमार ने यह भी रेखांकित किया कि राज्य की सूखा आकलन रिपोर्ट केंद्रीय दल की रिपोर्ट से मेल खानी चाहिए, तभी केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता मिल सकेगी।
सरकार की तत्काल राहत
राज्य सरकार ने अब तक पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र को ₹1 करोड़ आवंटित किए हैं। इसके अतिरिक्त, आपातकालीन ज़रूरतों के लिए डिप्टी कमिश्नरों के पास अलग से फंड रखा गया है। शिवकुमार ने यह भी घोषणा की कि 5 सितंबर से 'प्रजा सेवा आंदोलन' शुरू किया जाएगा, जिससे प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाया जाएगा और नागरिकों को शिकायत निवारण के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
अन्य मुद्दे और आगे की राह
बैठक में विधायक एच.के. पाटिल ने क्लाउड सीडिंग का प्रस्ताव रखा, जबकि अन्य विधायकों ने सिंचाई, बेन्निहल्ला और विभिन्न विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दे उठाए। शिवकुमार ने कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए इन परियोजनाओं पर कार्रवाई की जाएगी। सरकार गारंटी योजनाओं के लाभार्थियों का पुनः सत्यापन कर रही है और पंचायत-स्तरीय समितियाँ गठित की जा रही हैं ताकि योजनाओं का लाभ सही व्यक्तियों तक पहुँचे। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि सरकार के 100-दिन के कार्यक्रम के दौरान उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक किया जाएगा।