4 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का हावड़ा में ममता सरकार पर तंज: 'श्राप दे पाता तो पाकिस्तान को भस्म कर देता'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का हावड़ा में ममता सरकार पर तंज: 'श्राप दे पाता तो पाकिस्तान को भस्म कर देता'

सारांश

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पहली बार बंगाल में हनुमान कथा करने पहुँचे — और साथ लाए ममता सरकार पर तंज, पाकिस्तान पर तीखी टिप्पणी, और 'मन में मठ' का संदेश। यह महज धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश का मंच भी बना।

मुख्य बातें

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पहली बार हावड़ा, पश्चिम बंगाल में 4 सितंबर को तीन दिवसीय हनुमान कथा और दिव्य दरबार के लिए पहुँचे।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की पूर्ववर्ती सरकार ने उन्हें बंगाल में कथा करने की अनुमति नहीं दी थी।
शास्त्री ने कहा — 'ना वरदान दे सकते हैं, ना श्राप; यदि होता तो पाकिस्तान को भस्म करने का श्राप दे देते।' उन्होंने भौतिक मठ निर्माण की बजाय 'मन में मठ बनाने' की अवधारणा पर जोर दिया।
बंगाल को 'विचार, कवियों और संतों की भूमि' बताते हुए उन्होंने कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं।

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 4 सितंबर को हावड़ा में तीन दिवसीय हनुमान कथा और दिव्य दरबार से पूर्व आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पश्चिम बंगाल की पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें बंगाल में कथा करने की अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन भगवान की कृपा से अब वे यहाँ पहुँचे हैं। इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि यदि वे वरदान या श्राप देने में सक्षम होते, तो पाकिस्तान को भस्म करने का श्राप दे देते।

पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना

शास्त्री ने स्पष्ट किया कि पिछली बार ममता बनर्जी की सरकार के कार्यकाल में उन्हें बंगाल में कथा करने की अनुमति नहीं मिली थी। उन्होंने कहा, 'हो सकता है उस समय सत्ता में रहीं दीदी के कोई निजी कारण रहे हों, हमारे कोई निजी कारण नहीं थे।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके मुँह से तब निकल गया था कि 'दीदी नहीं बुलाएंगी तो जब दादा आएंगे, तब कथा करने जाएंगे' — और भगवान ने वह बात पूरी कर दी।

उन्होंने कहा कि वे सत्ता के कारण नहीं, बल्कि ठाकुर की इच्छा से कथा करते हैं। 'हम साधु हैं, हमारे पास हनुमान जी की माला है — हमने कुछ नहीं किया, भगवान ने करवाया।'

पाकिस्तान पर तीखी टिप्पणी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शास्त्री ने कहा, 'ना हम किसी को वरदान दे सकते हैं, ना श्राप। यदि ऐसा होता तो हम पाकिस्तान को भस्म करने का श्राप न दे देते।' यह टिप्पणी राष्ट्रवादी भावनाओं को संबोधित करते हुए की गई, जो उनके कार्यक्रमों में प्रमुख विषय रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी व्यक्तिगत सीमाओं को रेखांकित करने वाला वक्तव्य था, न कि किसी के प्रति वास्तविक अभिशाप।

मन परिवर्तन का संकल्प

बंगाल में पहली बार कथा करने पहुँचे शास्त्री ने कहा कि वे सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि मन परिवर्तन के लिए आए हैं। उन्होंने कहा, 'जिनके अंदर बंगाल में रहकर भारत के खिलाफ जहर भरा है, उनके अंदर हम अमृत भरने आए हैं।' उन्होंने बंगाल को विचार, कवियों, संतों और भक्तों की भूमि बताया और कहा कि राम भक्ति और राष्ट्र भक्ति यहाँ के जन-जन में समाई है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि पहले बंगाल आने पर मन में दुविधा रहती थी क्योंकि 'कुछ लोगों को हमारे आने से खुजली बहुत होती थी — अब खुजली थोड़ी कम हुई है।'

मठ और आध्यात्मिकता पर विचार

शास्त्री ने भौतिक मठों के निर्माण की बजाय मन में मठ बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'मन में मठ बनाया जाएगा, वो कभी गिराया नहीं जाएगा। मठ बनाने की सोचेंगे, फिर सीएम से गुहार लगाएंगे, फिर जमीन लेंगे — हम में और आप में क्या अंतर रहा?' उनके अनुसार वे 'झंझटों में फंसने वाले गुरू' नहीं हैं।

उन्होंने उपस्थित लोगों को कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे प्यार लेने नहीं, बल्कि जगाने आए हैं — 'जो जागे, वो सिकंदर, जो जागे, वो महान।' आगामी दिनों में हावड़ा में हनुमान कथा और दिव्य दरबार के आयोजन से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि स्पष्ट रूप से राजनीतिक संदेश से भरा है — 'दीदी नहीं बुलाएंगी, दादा आएंगे' वाली टिप्पणी और ममता सरकार पर सीधा निशाना इसे रेखांकित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल में सत्ता-परिवर्तन की बहस तेज है और धार्मिक आयोजन राजनीतिक गोलबंदी के मंच बनते जा रहे हैं। पाकिस्तान वाली टिप्पणी भले ही काल्पनिक संदर्भ में कही गई हो, परंतु इस तरह के वक्तव्य भीड़ की भावनाओं को उद्वेलित करने में सक्षम हैं — और मीडिया में इनकी व्याख्या अक्सर संदर्भ से परे होती है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है, वह यह है कि शास्त्री का 'मन में मठ' वाला दर्शन उनके व्यापक सामाजिक प्रभाव की रणनीति को दर्शाता है — संस्थागत ढाँचे से परे, सीधे जन-मानस तक पहुँचने की कोशिश।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पाकिस्तान के बारे में क्या कहा?
शास्त्री ने हावड़ा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे न किसी को वरदान दे सकते हैं, न श्राप — लेकिन यदि ऐसी शक्ति होती, तो वे पाकिस्तान को भस्म करने का श्राप दे देते। यह टिप्पणी उन्होंने अपनी सीमाओं को स्पष्ट करते हुए की, न कि किसी वास्तविक अभिशाप के रूप में।
धीरेंद्र शास्त्री को पहले बंगाल में कथा की अनुमति क्यों नहीं मिली थी?
शास्त्री के अनुसार, पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में उन्हें बंगाल में कथा करने की अनुमति नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार के 'निजी कारण' रहे होंगे, जबकि उनकी ओर से कोई निजी कारण नहीं था।
धीरेंद्र शास्त्री का 'दीदी नहीं बुलाएंगी तो दादा आएंगे' से क्या आशय था?
यह उनका वह वक्तव्य था जो पूर्ववर्ती सरकार द्वारा अनुमति न मिलने पर उनके मुँह से निकला था। 'दादा' से आशय BJP नेतृत्व से था। उन्होंने कहा कि भगवान ने उनकी यह बात पूरी कर दी, क्योंकि अब सत्ता परिवर्तन के बाद वे बंगाल में कथा कर पा रहे हैं।
हावड़ा में धीरेंद्र शास्त्री का कार्यक्रम क्या है?
शास्त्री हावड़ा में तीन दिवसीय हनुमान कथा और दिव्य दरबार का आयोजन कर रहे हैं। यह बंगाल में उनकी पहली कथा है। कार्यक्रम से पहले उन्होंने 4 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
धीरेंद्र शास्त्री ने 'मन में मठ' से क्या समझाया?
शास्त्री ने कहा कि वे भौतिक मठ बनाने में विश्वास नहीं रखते क्योंकि उन्हें कभी भी गिराया जा सकता है। उनके अनुसार, लोगों के मन में मठ बनाना उनका लक्ष्य है — जो न गिरे, न छिने। यह उनकी आध्यात्मिक और सामाजिक रणनीति का केंद्रीय विचार है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले