धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का हावड़ा में ममता सरकार पर तंज: 'श्राप दे पाता तो पाकिस्तान को भस्म कर देता'
सारांश
मुख्य बातें
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 4 सितंबर को हावड़ा में तीन दिवसीय हनुमान कथा और दिव्य दरबार से पूर्व आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पश्चिम बंगाल की पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें बंगाल में कथा करने की अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन भगवान की कृपा से अब वे यहाँ पहुँचे हैं। इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि यदि वे वरदान या श्राप देने में सक्षम होते, तो पाकिस्तान को भस्म करने का श्राप दे देते।
पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना
शास्त्री ने स्पष्ट किया कि पिछली बार ममता बनर्जी की सरकार के कार्यकाल में उन्हें बंगाल में कथा करने की अनुमति नहीं मिली थी। उन्होंने कहा, 'हो सकता है उस समय सत्ता में रहीं दीदी के कोई निजी कारण रहे हों, हमारे कोई निजी कारण नहीं थे।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके मुँह से तब निकल गया था कि 'दीदी नहीं बुलाएंगी तो जब दादा आएंगे, तब कथा करने जाएंगे' — और भगवान ने वह बात पूरी कर दी।
उन्होंने कहा कि वे सत्ता के कारण नहीं, बल्कि ठाकुर की इच्छा से कथा करते हैं। 'हम साधु हैं, हमारे पास हनुमान जी की माला है — हमने कुछ नहीं किया, भगवान ने करवाया।'
पाकिस्तान पर तीखी टिप्पणी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शास्त्री ने कहा, 'ना हम किसी को वरदान दे सकते हैं, ना श्राप। यदि ऐसा होता तो हम पाकिस्तान को भस्म करने का श्राप न दे देते।' यह टिप्पणी राष्ट्रवादी भावनाओं को संबोधित करते हुए की गई, जो उनके कार्यक्रमों में प्रमुख विषय रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी व्यक्तिगत सीमाओं को रेखांकित करने वाला वक्तव्य था, न कि किसी के प्रति वास्तविक अभिशाप।
मन परिवर्तन का संकल्प
बंगाल में पहली बार कथा करने पहुँचे शास्त्री ने कहा कि वे सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि मन परिवर्तन के लिए आए हैं। उन्होंने कहा, 'जिनके अंदर बंगाल में रहकर भारत के खिलाफ जहर भरा है, उनके अंदर हम अमृत भरने आए हैं।' उन्होंने बंगाल को विचार, कवियों, संतों और भक्तों की भूमि बताया और कहा कि राम भक्ति और राष्ट्र भक्ति यहाँ के जन-जन में समाई है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि पहले बंगाल आने पर मन में दुविधा रहती थी क्योंकि 'कुछ लोगों को हमारे आने से खुजली बहुत होती थी — अब खुजली थोड़ी कम हुई है।'
मठ और आध्यात्मिकता पर विचार
शास्त्री ने भौतिक मठों के निर्माण की बजाय मन में मठ बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'मन में मठ बनाया जाएगा, वो कभी गिराया नहीं जाएगा। मठ बनाने की सोचेंगे, फिर सीएम से गुहार लगाएंगे, फिर जमीन लेंगे — हम में और आप में क्या अंतर रहा?' उनके अनुसार वे 'झंझटों में फंसने वाले गुरू' नहीं हैं।
उन्होंने उपस्थित लोगों को कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे प्यार लेने नहीं, बल्कि जगाने आए हैं — 'जो जागे, वो सिकंदर, जो जागे, वो महान।' आगामी दिनों में हावड़ा में हनुमान कथा और दिव्य दरबार के आयोजन से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।