त्रिपुरा चिट फंड घोटाला: 13 साल से फरार मुख्य आरोपी संजीत चक्रवर्ती को सीबीआई ने कोलकाता से किया गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने त्रिपुरा चिट फंड घोटाले के मुख्य आरोपी संजीत चक्रवर्ती को 12 मई 2026 को कोलकाता से गिरफ्तार किया है। चक्रवर्ती 2013 से फरार था — जब त्रिपुरा पुलिस ने उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी — और दोनों चिट फंड मामलों में उसे फरार आरोपी के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। मुखबिर की सूचना पर लगातार प्रयासों के बाद सीबीआई ने उसे पश्चिम बंगाल की राजधानी में खोज निकाला।
कौन है संजीत चक्रवर्ती
संजीत चक्रवर्ती कोलकाता स्थित मेसर्स कॉस्मिक नेगोसिएटर्स प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं। सीबीआई की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, त्रिपुरा पुलिस द्वारा 2013 में एफआईआर दर्ज होने के बाद से वह फरार था। डीएसपीई अधिनियम, 1946 के तहत त्रिपुरा और केंद्र सरकार की अधिसूचनाओं के बाद सीबीआई ने इन मामलों को अपने हाथ में लिया था।
दोनों मामलों में आरोप
सीबीआई के बयान के अनुसार, पहले मामले में 2015 में चार्जशीट दायर की गई थी, जिसमें चक्रवर्ती और अन्य पर जनता से लगभग ₹7.48 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। दूसरे मामले में 2024 में चार्जशीट दायर की गई, जिसमें जनता से लगभग ₹27.13 लाख की ठगी का आरोप लगाया गया है। दोनों ही मामलों में चक्रवर्ती को फरार आरोपी के रूप में दर्ज किया गया था।
गिरफ्तारी और आगे की प्रक्रिया
सीबीआई ने बताया कि मुखबिर की सूचना के आधार पर लगातार प्रयासों के बाद संजीत चक्रवर्ती को कोलकाता में खोजा गया और 12 मई को गिरफ्तार कर लिया गया। अब कोलकाता के संबंधित न्यायालय से पारगमन वारंट प्राप्त करने के बाद उसे सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश करने के लिए त्रिपुरा लाया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि आगे की जांच जारी है।
त्रिपुरा चिट फंड घोटाला: पृष्ठभूमि
त्रिपुरा में हुए चिट फंड घोटालों ने पूर्वोत्तर राज्य को हिलाकर रख दिया था, क्योंकि कई अवैध चिट फंड कंपनियों ने विभिन्न पोंजी योजनाओं के तहत हजारों लोगों को ठगते हुए करोड़ों रुपये इकट्ठा किए। गौरतलब है कि त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने 2024 में चिट फंड कंपनियों द्वारा ठगे गए ग्राहकों को पैसा वापस करने के लिए एक योजना बनाने का आदेश दिया था। इससे पहले, सीबीआई ने इस घोटाले के सिलसिले में असम, तमिलनाडु और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से कई लोगों को गिरफ्तार किया था।
आगे क्या होगा
यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब त्रिपुरा उच्च न्यायालय के 2024 के आदेश के बाद पीड़ितों को मुआवज़ा देने की प्रक्रिया चल रही है। सीबीआई की बहु-राज्यीय कार्रवाई यह संकेत देती है कि जांच एजेंसी इस मामले में बचे हुए फरार आरोपियों को भी कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।