क्या पेइचिंग में भारतीय दूतावास में 'विश्व हिंदी दिवस' का आयोजन गरिमामय रहा?

Click to start listening
क्या पेइचिंग में भारतीय दूतावास में 'विश्व हिंदी दिवस' का आयोजन गरिमामय रहा?

सारांश

बीजिंग में विश्व हिंदी दिवस का आयोजन भारतीय दूतावास में धूमधाम से मनाया गया। राजदूत प्रदीप रावत ने हिंदी के वैश्विक महत्व पर जोर दिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। जानिए इस विशेष अवसर की खास बातें!

Key Takeaways

  • विश्व हिंदी दिवस का आयोजन भारतीय दूतावास में हुआ।
  • राजदूत ने हिंदी की वैश्विक पहचान पर बात की।
  • चीनी छात्रों ने हिंदी गीत गाए।
  • कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने चार चाँद लगा दिए।
  • हिंदी भाषा का महत्व भारत-चीन संबंधों को मजबूत कर रहा है।

बीजिंग, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। चीन की राजधानी पेइचिंग में शनिवार को भारतीय दूतावास का परिसर हिंदी की आवाज़ों, मुस्कान और आत्मीय संवादों से गूंज उठा। यह अवसर विश्व हिंदी दिवस का था, जिसे हर वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। हालांकि विश्वविद्यालयों में छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए यह आयोजन एक सप्ताह पहले आयोजित किया गया, लेकिन उत्साह और भावनाओं में कोई कमी नहीं आई।

इस कार्यक्रम में पेकिंग विश्वविद्यालय, पेइचिंग विदेशी अध्ययन विश्वविद्यालय, और छिंग्हुवा विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थानों से हिंदी पढ़ने वाले चीनी छात्र, हिंदी पढ़ाने वाले भारतीय और चीनी शिक्षक, और भारत-चीन संबंधों के अध्ययनकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। दूतावास का सभागार उस दृश्य का साक्षी बना, जहाँ हिंदी की किताबें ज़िंदगी में उतरती दिखाई दीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत के राजदूत प्रदीप रावत ने कहा कि इस गरिमामय अवसर पर हिंदी की उस जीवंत चेतना का उत्सव मनाया जा रहा है, जिसकी गूंज आज पूरी दुनिया में सुनाई देती है। उन्होंने बताया कि हिंदी अब भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक वैश्विक संवाद का पुल बन चुकी है। जब कोई भाषा अपनी भौगोलिक सीमाओं से आगे बढ़कर सम्मान और अपनापन पाती है, तो यह उसकी सांस्कृतिक शक्ति और सार्वभौमिक अपील का प्रमाण होता है।

राजदूत ने हिंदी की सरलता, समावेशिता और भावनात्मक अभिव्यक्ति की ताकत पर चर्चा करते हुए कहा कि यही गुण इसे सीखने और अपनाने के लिए आकर्षक बनाते हैं। हिंदी केवल शब्दों का माध्यम नहीं है, बल्कि दिलों को जोड़ने वाली भाषा है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि चीन में हिंदी की बढ़ती लोकप्रियता भारत-चीन के ऐतिहासिक संबंधों को नई गहराई दे रही है। आज चीन में हिंदी का अध्ययन केवल एक अकादमिक विषय नहीं है, बल्कि भारत की संस्कृति, साहित्य, दर्शन, सिनेमा और समाज को समझने का एक सशक्त साधन बन चुका है।

उन्होंने हिंदी शिक्षकों और विद्वानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी भाषा का विस्तार उन्हीं के कंधों पर टिका होता है। ये शिक्षक केवल व्याकरण नहीं पढ़ाते, बल्कि दो संस्कृतियों के बीच सेतु बनते हैं। इसी क्रम में उन्होंने चीन में भारत अध्ययन से जुड़े विद्वानों, विशेष रूप से प्रोफेसर च्यांग चिनखुई के योगदान की सराहना की और इसे भारत-चीन शैक्षणिक संवाद की मजबूत नींव बताया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छिंग्हुवा विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड एरिया स्टडीज़ के प्रोफेसर और डायरेक्टर प्रो. च्यांग चिनखुई ने अपने संबोधन में हिंदी को एक भावनात्मक और सांस्कृतिक पहचान बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी उनके लिए केवल एक भाषा नहीं, बल्कि 'घर जैसी और परिवार जैसी' है। उनके शब्दों में, हिंदी में बोलना भारत के बारे में बोलने और भारत से प्रेम करने जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई देशों में जाने के बावजूद, उन्हें भारत में ही घर जैसा एहसास होता है।

प्रो. च्यांग ने बताया कि उनका सपना है कि वे अपने छात्रों को भारत ले जाएं, ताकि वे केवल पर्यटन न करें, बल्कि भारत को महसूस करें, उसे समझें और छू सकें। वेदों, पुराणों और महाकाव्यों जैसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों के अध्ययन के माध्यम से वे दोनों सभ्यताओं के बीच के गहरे संबंधों को तलाशना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी अब केवल भारत की भाषा नहीं रह गई, बल्कि चीन में उनके 'हिंदी परिवार' के लिए यह अपनी भाषा बन चुकी है। उनके लिए हर दिन हिंदी दिवस है।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को और जीवंत बना दिया। विभिन्न विश्वविद्यालयों के चीनी छात्रों ने हिंदी गीत गाकर सबका दिल जीत लिया। वहीं चीनी इंटरनेट इन्फ्लुएंसर मीरा और अंजलि की हंसी-मजाक से भरी 'जुगलबंदी' ने सभागार को ठहाकों से गूंजा दिया।

समापन सत्र में विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित कविता, लेख लेखन और वीडियो प्रतियोगिता के विजेताओं के नामों की घोषणा की गई। राजदूत प्रदीप रावत और प्रो. च्यांग चिनखुई ने विजेताओं को उपहार देकर सम्मानित किया।

यह आयोजन स्पष्ट रूप से यह संदेश दे गया कि भाषा केवल संवाद का साधन नहीं होती, बल्कि वह रिश्तों की नींव रखती है। हिंदी के माध्यम से भारत और चीन के बीच जो सांस्कृतिक और मानवीय संवाद पनप रहा है, वह आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों को और आत्मीय और मजबूत बनाने की क्षमता रखता है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

Point of View

बल्कि भारत-चीन संबंधों को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाता है। हिंदी का बढ़ता महत्व एक मजबूत सांस्कृतिक संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
NationPress
21/02/2026

Frequently Asked Questions

विश्व हिंदी दिवस कब मनाया जाता है?
विश्व हिंदी दिवस हर साल 10 जनवरी को मनाया जाता है।
इस वर्ष विश्व हिंदी दिवस का आयोजन कहाँ हुआ?
इस वर्ष का आयोजन बीजिंग में भारतीय दूतावास में हुआ।
राजदूत प्रदीप रावत ने क्या कहा?
उन्होंने हिंदी की वैश्विक पहचान और इसके महत्व पर जोर दिया।
कार्यक्रम में कौन-कौन से विश्वविद्यालयों के छात्र शामिल हुए?
पेकिंग विश्वविद्यालय, पेइचिंग विदेशी अध्ययन विश्वविद्यालय, और छिंग्हुवा विश्वविद्यालय के छात्र शामिल हुए।
क्या सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी कार्यक्रम का हिस्सा थीं?
हाँ, विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों ने हिंदी गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं।
Nation Press