1 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बड़ी कार्रवाई: देहरादून BTC क्रिप्टो घोटाले का मुख्य आरोपी हेमंत शर्मा 4 दिन ED हिरासत में

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बड़ी कार्रवाई: देहरादून BTC क्रिप्टो घोटाले का मुख्य आरोपी हेमंत शर्मा 4 दिन ED हिरासत में

सारांश

देहरादून की विशेष PMLA अदालत ने BTC क्रिप्टो घोटाले के मुख्य आरोपी हेमंत ईश्वर शर्मा को 4 दिन ED हिरासत में भेजा। बिटकॉइन में निवेश का झांसा देकर ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग और 4.56 करोड़ की संपत्ति कुर्की — यह मामला उत्तराखंड में क्रिप्टो जालसाजी के बढ़ते खतरे को उजागर करता है।

मुख्य बातें

हेमंत ईश्वर शर्मा को देहरादून की विशेष PMLA अदालत ने 4 दिन की ED हिरासत में भेजा।
आरोपी पर बिटकॉइन निवेश का झांसा देकर देशभर के निवेशकों से ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।
ईडी ने 4 ठिकानों पर छापेमारी कर अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए।
आरोपी की 4.56 करोड़ रुपये की जमीन और बैंक जमा सहित संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क।
मामले में देहरादून और उधम सिंह नगर — दो जिलों में FIR दर्ज है।
आरोपी ने ईडी के कुर्की आदेशों का उल्लंघन करते हुए संपत्ति हस्तांतरित करने की कोशिश की।

देहरादून, 25 अप्रैल 2025। देहरादून की विशेष पीएमएलए अदालत ने बीटीसी फंड क्रिप्टो घोटाले के मुख्य आरोपी हेमंत ईश्वर शर्मा को चार दिन की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हिरासत में भेज दिया है। यह मामला कथित तौर पर बिटकॉइन में अवैध निवेश का झांसा देकर देशभर के निवेशकों से करोड़ों रुपये की ठगी से जुड़ा है। ईडी ने आरोपी की करीब 4.56 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं।

छापेमारी और गिरफ्तारी की पूरी कहानी

ईडी की देहरादून सब-जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत आरोपी से जुड़े चार ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान एजेंसी को कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हाथ लगे, जो मामले की जांच में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

यह कार्रवाई राजपुर थाना, देहरादून में दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर शुरू हुई थी। इसी तरह का एक अन्य मामला उधम सिंह नगर जिले के दिनेशपुर थाने में भी पंजीकृत है, जो यह संकेत देता है कि इस ठगी का दायरा एक से अधिक जिलों तक फैला हुआ था।

कैसे रची गई ठगी की साजिश

ईडी की जांच में सामने आया कि हेमंत ईश्वर शर्मा ने अपने नियंत्रण वाली एक वेबसाइट के माध्यम से देशभर के आम निवेशकों को बिटकॉइन में मोटे रिटर्न का लालच दिया। उसने यह भी दावा किया कि उसकी कंपनी से कई विदेशी नागरिक जुड़े हुए हैं, जिससे योजना को अंतरराष्ट्रीय और विश्वसनीय रंग दिया गया।

निवेशकों से जुटाई गई यह भारी रकम आरोपी ने अपने निजी बैंक खातों में स्थानांतरित की और फिर उससे अपने नाम पर अचल संपत्तियां खरीदीं। ईडी ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग का स्पष्ट मामला करार दिया है।

जब्त संपत्तियां और ईडी आदेशों का उल्लंघन

एजेंसी ने आरोपी की 4.56 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं, जिनमें भूमि और विभिन्न बैंक खातों में जमा राशि शामिल है। इससे स्पष्ट होता है कि ठगी की रकम को संपत्ति में बदलने का सुनियोजित प्रयास किया गया।

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी उजागर हुआ कि आरोपी ने ईडी के कुर्की आदेशों का उल्लंघन करते हुए इन संपत्तियों को बेचने या हस्तांतरित करने की कोशिश की। यह कदम न केवल कानूनी दृष्टि से गंभीर अपराध है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आरोपी सबूत मिटाने का प्रयास कर रहा था।

व्यापक संदर्भ: क्रिप्टो ठगी का बढ़ता खतरा

यह मामला उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें देशभर में क्रिप्टोकरेंसी की आड़ में पोंजी और पिरामिड स्कीम चलाकर आम निवेशकों को ठगा जा रहा है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के आंकड़ों के अनुसार, क्रिप्टो-संबंधी वित्तीय धोखाधड़ी के मामले पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। उत्तराखंड में यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में डिजिटल साक्षरता की कमी का फायदा उठाकर ऐसे जालसाज छोटे शहरों और कस्बों में भी अपना जाल बिछा रहे हैं।

गौरतलब है कि ईडी ने हाल के वर्षों में पीएमएलए के तहत क्रिप्टो घोटालों में कई बड़ी कार्रवाइयां की हैं, जिनमें गेनबिटकॉइन और अन्य पोंजी स्कीम मामले शामिल हैं। देहरादून का यह मामला उसी श्रृंखला की एक और कड़ी है।

फिलहाल ईडी की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और आरोपियों की पहचान तथा अतिरिक्त संपत्तियों की कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस राष्ट्रव्यापी पैटर्न का हिस्सा है जहां डिजिटल वित्तीय अज्ञानता को हथियार बनाकर छोटे शहरों के निवेशकों को लूटा जा रहा है। विडंबना यह है कि जब सरकार 'डिजिटल इंडिया' और 'फिनटेक क्रांति' का नारा बुलंद कर रही है, उसी दौर में क्रिप्टो पोंजी स्कीमें उत्तराखंड जैसे राज्यों में जड़ें जमा रही हैं जहां साइबर जागरूकता अभी भी सीमित है। ईडी की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि इस वेबसाइट को इतने लंबे समय तक संचालित होने दिया क्यों गया और कितने और निवेशक अभी भी न्याय की प्रतीक्षा में हैं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देहरादून BTC क्रिप्टो घोटाले में किसे गिरफ्तार किया गया है?
देहरादून के BTC फंड क्रिप्टो घोटाले में हेमंत ईश्वर शर्मा को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया है। विशेष PMLA अदालत ने उन्हें 4 दिन की ED हिरासत में भेजा है।
ईडी ने आरोपी की कितनी संपत्ति जब्त की है?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोपी हेमंत शर्मा की करीब 4.56 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। इनमें भूमि और बैंक खातों में जमा राशि शामिल है।
BTC फंड घोटाले में ठगी कैसे की जाती थी?
आरोपी ने एक वेबसाइट के जरिए लोगों को बिटकॉइन में निवेश पर ऊंचे रिटर्न का लालच दिया और विदेशी नागरिकों के जुड़े होने का फर्जी दावा किया। निवेशकों की रकम अपने निजी खातों में डालकर जमीन-जायदाद खरीदी गई।
इस मामले में कितने थानों में FIR दर्ज है?
इस मामले में राजपुर थाना, देहरादून और दिनेशपुर थाना, उधम सिंह नगर — दो अलग-अलग थानों में FIR दर्ज है। यह दर्शाता है कि घोटाले का दायरा एक से अधिक जिलों तक फैला था।
क्या आरोपी ने ईडी के आदेशों का उल्लंघन किया?
हां, जांच में सामने आया कि आरोपी ने ईडी की कुर्की आदेशों का उल्लंघन करते हुए जब्त संपत्तियों को बेचने या हस्तांतरित करने की कोशिश की। यह एक अतिरिक्त कानूनी अपराध है और जांच अभी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले