17 जुलाई 2026
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गोवा क्राइम ब्रांच ने दिल्ली एयरपोर्ट से दबोचा विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का तीसरा आरोपी

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गोवा क्राइम ब्रांच ने दिल्ली एयरपोर्ट से दबोचा विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का तीसरा आरोपी

सारांश

विदेश में नौकरी का सपना दिखाकर ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का एक और सदस्य पकड़ा गया। गोवा क्राइम ब्रांच ने हरियाणा के हरप्रीत सिंह को दिल्ली एयरपोर्ट से दबोचा — यह मामले में तीसरी गिरफ्तारी है। गिरोह पर्यटक वीजा पर लोगों को पूर्वी एशिया भेजकर कथित शोषण करता था।

मुख्य बातें

गोवा क्राइम ब्रांच ने 17 जुलाई 2026 को हरप्रीत सिंह (39) , निवासी कुरुक्षेत्र, हरियाणा को दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया।
आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 और उत्प्रवास अधिनियम 1983 की धारा 10 के तहत मामला दर्ज है।
गिरोह ने कथित तौर पर हांगकांग व अन्य देशों में नौकरी का झांसा देकर पीड़ितों से बड़ी रकम ठगी।
आरोपी बिना वैध पंजीकरण के भर्ती एजेंट के रूप में काम कर रहा था और पीड़ितों को पर्यटक वीजा पर पूर्वी एशिया भेजता था।
इस मामले में पहले अंबर सावंत और पंकज नाइक (दोनों गोवा निवासी) को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

गोवा पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 17 जुलाई 2026 को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर कथित धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सदस्य को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नई दिल्ली से गिरफ्तार किया। आरोपी लंबे समय से फरार था और उसके विरुद्ध लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी था। यह इस मामले में तीसरी गिरफ्तारी है।

गिरफ्तारी का विवरण

क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन की टीम ने पुलिस निरीक्षक किशोर रामनन के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए हरप्रीत सिंह (39 वर्ष), निवासी मदनपुर, कुरुक्षेत्र, हरियाणा को हिरासत में लिया। आरोपी को उस समय पकड़ा गया जब वह दिल्ली हवाई अड्डे से देश छोड़ने या किसी अन्य स्थान पर जाने की कोशिश कर रहा था। यह गिरफ्तारी केस नंबर 52/2026 के सिलसिले में हुई, जो 2 जून 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की विभिन्न धाराओं और उत्प्रवास अधिनियम, 1983 की धारा 10 के तहत दर्ज किया गया था।

गिरोह का मोडस ऑपरेंडी

जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर कथित तौर पर एक सुनियोजित आपराधिक साजिश रची। इस साजिश के तहत भारत के विभिन्न राज्यों के लोगों को हांगकांग और अन्य विदेशी देशों में रोजगार दिलाने का प्रलोभन दिया गया। पुलिस के अनुसार, पीड़ितों से बड़ी रकम वसूली गई और उनकी मेहनत की कमाई ठगी गई।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि हरप्रीत सिंह कथित रूप से बिना वैध पंजीकरण प्रमाण पत्र के भर्ती एजेंट के तौर पर काम कर रहा था। पुलिस का कहना है कि उसने पीड़ितों को पर्यटक वीजा के जरिए पूर्वी एशिया के कुछ देशों में भेजा, जहां उन्हें रोजगार मिलने के बजाय कथित शोषण का सामना करना पड़ा।

पूर्व में हो चुकी हैं गिरफ्तारियाँ

गोवा पुलिस के अनुसार, इस मामले में इससे पहले दो आरोपियों — अंबर सावंत और पंकज नाइक, दोनों गोवा निवासी — को गिरफ्तार किया जा चुका है। हरप्रीत सिंह इस केस में तीसरा गिरफ्तार आरोपी है। यह मामला एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है जो देश के कई राज्यों में सक्रिय रहा।

क्राइम ब्रांच की सार्वजनिक अपील

क्राइम ब्रांच ने नागरिकों से अपील की है कि विदेश में नौकरी तलाशते समय पूरी सावधानी बरतें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि विदेश में रोजगार के लिए केवल उत्प्रवास अधिनियम के तहत पंजीकृत भर्ती एजेंसियों की सेवाएं ही लें। किसी भी एजेंसी को पैसे देने या नौकरी का प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले उसकी कानूनी स्थिति और विश्वसनीयता की जांच करना अनिवार्य है।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब विदेश में रोजगार के नाम पर ठगी की घटनाएं पूरे देश में चिंता का विषय बनी हुई हैं। जांच एजेंसियां अभी भी गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

कंबोडिया और हांगकांग — को केंद्र बनाकर भारतीय युवाओं को रोजगार के नाम पर फंसाया जा रहा है। गौरतलब है कि उत्प्रवास अधिनियम दशकों पुराना है और डिजिटल युग में अवैध भर्ती के नए तरीकों से निपटने में इसकी सीमाएं उजागर होती रहती हैं। तीन गिरफ्तारियों के बावजूद गिरोह के अन्य सदस्य अभी भी फरार हैं — यह सवाल उठाता है कि क्या राज्य पुलिस के पास ऐसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को जड़ से तोड़ने के लिए पर्याप्त संसाधन और केंद्रीय समन्वय है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवा क्राइम ब्रांच ने किसे और कहाँ से गिरफ्तार किया?
गोवा क्राइम ब्रांच ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र निवासी हरप्रीत सिंह (39 वर्ष) को 17 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया। आरोपी देश छोड़ने की कोशिश कर रहा था और उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी था।
इस जॉब फ्रॉड गिरोह पर क्या आरोप हैं?
गिरोह पर आरोप है कि उसने भारत के विभिन्न राज्यों के लोगों को हांगकांग और अन्य विदेशी देशों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बड़ी रकम ठगी। पीड़ितों को पर्यटक वीजा पर पूर्वी एशिया भेजा गया, जहाँ उन्हें रोजगार की बजाय कथित शोषण का सामना करना पड़ा।
इस मामले में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं?
इस मामले में अब तक तीन आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। पहले गोवा निवासी अंबर सावंत और पंकज नाइक को गिरफ्तार किया गया था, और अब हरप्रीत सिंह तीसरे आरोपी के रूप में पकड़े गए हैं।
यह मामला किन कानूनी धाराओं के तहत दर्ज है?
यह मामला 2 जून 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की विभिन्न धाराओं और उत्प्रवास अधिनियम, 1983 की धारा 10 के तहत क्राइम ब्रांच में केस नंबर 52/2026 के रूप में दर्ज किया गया था।
विदेश में नौकरी के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
गोवा क्राइम ब्रांच के अनुसार, विदेश में रोजगार के लिए केवल उत्प्रवास अधिनियम के तहत पंजीकृत भर्ती एजेंसियों की सेवाएं लेनी चाहिए। किसी भी एजेंसी को पैसे देने या नौकरी का प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले उसकी कानूनी स्थिति और विश्वसनीयता की पूरी जांच अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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