गोवा क्राइम ब्रांच ने दिल्ली एयरपोर्ट से दबोचा विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का तीसरा आरोपी
सारांश
मुख्य बातें
गोवा पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 17 जुलाई 2026 को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर कथित धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सदस्य को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नई दिल्ली से गिरफ्तार किया। आरोपी लंबे समय से फरार था और उसके विरुद्ध लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी था। यह इस मामले में तीसरी गिरफ्तारी है।
गिरफ्तारी का विवरण
क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन की टीम ने पुलिस निरीक्षक किशोर रामनन के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए हरप्रीत सिंह (39 वर्ष), निवासी मदनपुर, कुरुक्षेत्र, हरियाणा को हिरासत में लिया। आरोपी को उस समय पकड़ा गया जब वह दिल्ली हवाई अड्डे से देश छोड़ने या किसी अन्य स्थान पर जाने की कोशिश कर रहा था। यह गिरफ्तारी केस नंबर 52/2026 के सिलसिले में हुई, जो 2 जून 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की विभिन्न धाराओं और उत्प्रवास अधिनियम, 1983 की धारा 10 के तहत दर्ज किया गया था।
गिरोह का मोडस ऑपरेंडी
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर कथित तौर पर एक सुनियोजित आपराधिक साजिश रची। इस साजिश के तहत भारत के विभिन्न राज्यों के लोगों को हांगकांग और अन्य विदेशी देशों में रोजगार दिलाने का प्रलोभन दिया गया। पुलिस के अनुसार, पीड़ितों से बड़ी रकम वसूली गई और उनकी मेहनत की कमाई ठगी गई।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि हरप्रीत सिंह कथित रूप से बिना वैध पंजीकरण प्रमाण पत्र के भर्ती एजेंट के तौर पर काम कर रहा था। पुलिस का कहना है कि उसने पीड़ितों को पर्यटक वीजा के जरिए पूर्वी एशिया के कुछ देशों में भेजा, जहां उन्हें रोजगार मिलने के बजाय कथित शोषण का सामना करना पड़ा।
पूर्व में हो चुकी हैं गिरफ्तारियाँ
गोवा पुलिस के अनुसार, इस मामले में इससे पहले दो आरोपियों — अंबर सावंत और पंकज नाइक, दोनों गोवा निवासी — को गिरफ्तार किया जा चुका है। हरप्रीत सिंह इस केस में तीसरा गिरफ्तार आरोपी है। यह मामला एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है जो देश के कई राज्यों में सक्रिय रहा।
क्राइम ब्रांच की सार्वजनिक अपील
क्राइम ब्रांच ने नागरिकों से अपील की है कि विदेश में नौकरी तलाशते समय पूरी सावधानी बरतें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि विदेश में रोजगार के लिए केवल उत्प्रवास अधिनियम के तहत पंजीकृत भर्ती एजेंसियों की सेवाएं ही लें। किसी भी एजेंसी को पैसे देने या नौकरी का प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले उसकी कानूनी स्थिति और विश्वसनीयता की जांच करना अनिवार्य है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब विदेश में रोजगार के नाम पर ठगी की घटनाएं पूरे देश में चिंता का विषय बनी हुई हैं। जांच एजेंसियां अभी भी गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हैं।