दिल्ली पुलिस ने 7 साल से फरार NDPS घोषित अपराधी हरप्रीत सिंह को दिलशाद गार्डन से दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल (ISC) ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (NDPS) एक्ट के तहत घोषित अपराधी हरप्रीत सिंह उर्फ मणि को 11 मई 2026 को दिलशाद गार्डन मेट्रो स्टेशन के निकट गिरफ्तार किया। 30 वर्षीय यह आरोपी पंजाब के बठिंडा का रहने वाला है और पिछले सात वर्षों से कानून की पकड़ से बाहर था। पुलिस ने 14 मई को इस कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी दी।
मामले की पृष्ठभूमि
5 जनवरी 2018 को बठिंडा कैंट पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने हरप्रीत सिंह को उस समय पकड़ा था, जब वह एक पॉलीथीन बैग में प्रतिबंधित नशीले पदार्थ ले जा रहा था। उसके कब्जे से 'विंसरेक्स' सिरप की 8 बोतलें, 'ओनेरेक्स' सिरप की 4 बोतलें और 'कैरिसोमा' टैबलेट की 15 स्ट्रिप्स बरामद की गई थीं। इस मामले में एफआईआर नंबर 03/2018, NDPS एक्ट की धारा 22/61/85 के तहत दर्ज की गई थी।
2019 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उसे जमानत दे दी। जमानत मिलने के बाद आरोपी फरार हो गया और 23 सितंबर 2020 को उसे न्यायालय द्वारा 'घोषित अपराधी' करार दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, वह एक अन्य आपराधिक मामले में भी बठिंडा में वांछित है।
सात साल की चकमेबाजी
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी लगातार अपनी छिपने की जगहें बदलकर और पहचान छिपाकर पुलिस को चकमा देता रहा। पूछताछ में हरप्रीत सिंह ने स्वयं खुलासा किया कि फरार होने के बाद वह अपने परिवार के साथ फरीदाबाद, लोनी, हिंडन विहार और गाजियाबाद में रहा। इस दौरान उसने दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न भोजनालयों में काम किया और पुलिस की नजर से बचने के लिए रिश्तेदारों व परिचितों से न्यूनतम संपर्क रखा।
तकनीकी निगरानी और गिरफ्तारी
ISC की टीम लगातार क्रिमिनल इंटेलिजेंस, फील्ड वेरिफिकेशन और तकनीकी निगरानी के माध्यम से आरोपी का पीछा कर रही थी। जाँच में पता चला कि वह अक्सर दिल्ली के ट्रांस-यमुना इलाके में आता-जाता था और गाजियाबाद में किराए के मकानों में रह रहा था।
11 मई को हेड कांस्टेबल नेमी चंद को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी दिलशाद गार्डन क्षेत्र में प्रकट होगा। इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर शिवराज सिंह बिष्ट के नेतृत्व में और एसीपी रमेश लांबा की निगरानी में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम में एसआई रविंदर कुमार, एसआई संजय कुमार, एएसआई रतन सिंह, हेड कांस्टेबल विकास, हेड कांस्टेबल राम हरि, हेड कांस्टेबल नरेंद्र, हेड कांस्टेबल नेमी चंद और कांस्टेबल प्रवीण कुमार शामिल थे।
आगे की कानूनी कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद संबंधित पुलिस थाने को सूचित कर दिया गया है, ताकि आगे की आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके। यह गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि लंबे समय से फरार घोषित अपराधियों पर पुलिस की नजर बनी रहती है।