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दिल्ली पुलिस ने 7 साल से फरार NDPS घोषित अपराधी हरप्रीत सिंह को दिलशाद गार्डन से दबोचा

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दिल्ली पुलिस ने 7 साल से फरार NDPS घोषित अपराधी हरप्रीत सिंह को दिलशाद गार्डन से दबोचा

सारांश

सात साल तक पहचान बदलकर और शहर-दर-शहर भटककर पुलिस को चकमा देने वाले NDPS घोषित अपराधी हरप्रीत सिंह उर्फ मणि को दिल्ली पुलिस की ISC टीम ने दिलशाद गार्डन से दबोच लिया। 2018 में बठिंडा से शुरू हुआ यह मामला अब दिल्ली-एनसीआर में समाप्त हुआ।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ISC ने 11 मई 2026 को NDPS घोषित अपराधी हरप्रीत सिंह उर्फ मणि को दिलशाद गार्डन मेट्रो स्टेशन के पास गिरफ्तार किया।
आरोपी 5 जनवरी 2018 को बठिंडा में पकड़ा गया था; 2019 में जमानत मिलने के बाद फरार हो गया।
23 सितंबर 2020 को न्यायालय ने उसे 'घोषित अपराधी' घोषित किया था।
आरोपी 7 वर्षों तक फरीदाबाद, लोनी, हिंडन विहार और गाजियाबाद में छिपता रहा।
इंस्पेक्टर शिवराज सिंह बिष्ट के नेतृत्व और एसीपी रमेश लांबा की निगरानी में विशेष टीम ने यह कार्रवाई की।
आरोपी बठिंडा के एक अन्य आपराधिक मामले में भी वांछित है।

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल (ISC) ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (NDPS) एक्ट के तहत घोषित अपराधी हरप्रीत सिंह उर्फ मणि को 11 मई 2026 को दिलशाद गार्डन मेट्रो स्टेशन के निकट गिरफ्तार किया। 30 वर्षीय यह आरोपी पंजाब के बठिंडा का रहने वाला है और पिछले सात वर्षों से कानून की पकड़ से बाहर था। पुलिस ने 14 मई को इस कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी दी।

मामले की पृष्ठभूमि

5 जनवरी 2018 को बठिंडा कैंट पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने हरप्रीत सिंह को उस समय पकड़ा था, जब वह एक पॉलीथीन बैग में प्रतिबंधित नशीले पदार्थ ले जा रहा था। उसके कब्जे से 'विंसरेक्स' सिरप की 8 बोतलें, 'ओनेरेक्स' सिरप की 4 बोतलें और 'कैरिसोमा' टैबलेट की 15 स्ट्रिप्स बरामद की गई थीं। इस मामले में एफआईआर नंबर 03/2018, NDPS एक्ट की धारा 22/61/85 के तहत दर्ज की गई थी।

2019 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उसे जमानत दे दी। जमानत मिलने के बाद आरोपी फरार हो गया और 23 सितंबर 2020 को उसे न्यायालय द्वारा 'घोषित अपराधी' करार दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, वह एक अन्य आपराधिक मामले में भी बठिंडा में वांछित है।

सात साल की चकमेबाजी

अधिकारियों ने बताया कि आरोपी लगातार अपनी छिपने की जगहें बदलकर और पहचान छिपाकर पुलिस को चकमा देता रहा। पूछताछ में हरप्रीत सिंह ने स्वयं खुलासा किया कि फरार होने के बाद वह अपने परिवार के साथ फरीदाबाद, लोनी, हिंडन विहार और गाजियाबाद में रहा। इस दौरान उसने दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न भोजनालयों में काम किया और पुलिस की नजर से बचने के लिए रिश्तेदारों व परिचितों से न्यूनतम संपर्क रखा।

तकनीकी निगरानी और गिरफ्तारी

ISC की टीम लगातार क्रिमिनल इंटेलिजेंस, फील्ड वेरिफिकेशन और तकनीकी निगरानी के माध्यम से आरोपी का पीछा कर रही थी। जाँच में पता चला कि वह अक्सर दिल्ली के ट्रांस-यमुना इलाके में आता-जाता था और गाजियाबाद में किराए के मकानों में रह रहा था।

11 मई को हेड कांस्टेबल नेमी चंद को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी दिलशाद गार्डन क्षेत्र में प्रकट होगा। इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर शिवराज सिंह बिष्ट के नेतृत्व में और एसीपी रमेश लांबा की निगरानी में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम में एसआई रविंदर कुमार, एसआई संजय कुमार, एएसआई रतन सिंह, हेड कांस्टेबल विकास, हेड कांस्टेबल राम हरि, हेड कांस्टेबल नरेंद्र, हेड कांस्टेबल नेमी चंद और कांस्टेबल प्रवीण कुमार शामिल थे।

आगे की कानूनी कार्रवाई

गिरफ्तारी के बाद संबंधित पुलिस थाने को सूचित कर दिया गया है, ताकि आगे की आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके। यह गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि लंबे समय से फरार घोषित अपराधियों पर पुलिस की नजर बनी रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यानी सात साल तक, दिल्ली-एनसीआर में खुलेआम काम करता रहा। यह सवाल उठता है कि जमानत के बाद फरार हुए घोषित अपराधियों की निगरानी के लिए अंतर-राज्यीय समन्वय कितना प्रभावी है। ISC की यह सफलता तकनीकी निगरानी की भूमिका को रेखांकित करती है, लेकिन सात साल की देरी यह भी दर्शाती है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए संसाधनों और प्राथमिकता की कमी बनी रहती है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरप्रीत सिंह उर्फ मणि कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया?
हरप्रीत सिंह उर्फ मणि पंजाब के बठिंडा का 30 वर्षीय निवासी है, जिसे NDPS एक्ट के तहत 2018 में नशीले पदार्थों के साथ पकड़ा गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद वह फरार हो गया और 2020 में उसे 'घोषित अपराधी' घोषित किया गया।
दिल्ली पुलिस ने आरोपी को कहाँ से और कैसे पकड़ा?
गुप्त सूचना के आधार पर 11 मई 2026 को दिलशाद गार्डन मेट्रो स्टेशन के पास आरोपी को पकड़ा गया। इंस्पेक्टर शिवराज सिंह बिष्ट के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने तकनीकी निगरानी और फील्ड वेरिफिकेशन के बाद यह कार्रवाई की।
आरोपी पर NDPS एक्ट की कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
आरोपी पर NDPS एक्ट की धारा 22/61/85 के तहत एफआईआर नंबर 03/2018 दर्ज है, जो बठिंडा कैंट पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। वह बठिंडा के एक अन्य आपराधिक मामले में भी वांछित है।
आरोपी सात साल तक कहाँ छिपा रहा?
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह फरीदाबाद, लोनी, हिंडन विहार और गाजियाबाद में परिवार के साथ किराए के मकानों में रहा। पुलिस की नजर से बचने के लिए उसने दिल्ली-एनसीआर के भोजनालयों में काम किया और परिचितों से दूरी बनाए रखी।
गिरफ्तारी के बाद आगे क्या कार्रवाई होगी?
दिल्ली पुलिस ISC ने संबंधित पुलिस थाने को गिरफ्तारी की सूचना दे दी है, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके। आरोपी को बठिंडा के मामले में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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