टीकमगढ़ में बनेगा नया मेडिकल कॉलेज, CM मोहन यादव ने ₹189 करोड़ के 72 विकास कार्यों का किया लोकार्पण
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार, 17 जुलाई को टीकमगढ़ जिले में एक बड़ी स्वास्थ्य सुविधा का ऐलान करते हुए कहा कि जिले में सर्व-सुविधायुक्त मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जाएगी, जिसका भूमि-पूजन शीघ्र आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने ₹189 करोड़ से अधिक लागत के 72 विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण किया, जिसमें पुनर्विकसित टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन भी सम्मिलित है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री यादव ने खरगापुर में आयोजित कार्यक्रम में जतारा, खरगापुर और बड़ा गांव में नवनिर्मित सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण किया। उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं के हितग्राहियों को सीधे हितलाभ भी वितरित किए। पुनर्विकसित टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन को अमृत भारत रेलवे स्टेशन योजना के अंतर्गत तैयार किया गया है।
सांदीपनि विद्यालयों का महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि सांदीपनि विद्यालय बच्चों को संस्कार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक साथ प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने इन विद्यालयों को भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता के प्रतीक के रूप में रेखांकित किया और कहा कि बदलते समय में युवा पीढ़ी को ऐसे शिक्षण संस्थानों की आवश्यकता है जो उन्हें आगे बढ़ने के लिए तैयार करें।
समान नागरिक संहिता और बुंदेलखंड विकास
यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश विवाह, तलाक और वसीयत के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि इससे मुस्लिम महिलाओं को उनके उचित अधिकार प्राप्त होंगे। साथ ही उन्होंने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को बुंदेलखंड के किसानों के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।
विपक्ष पर निशाना
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि प्रदेश में 55 वर्षों की कांग्रेस सरकार के दौरान बुंदेलखंड के किसानों को नदी परियोजनाओं का कोई लाभ नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने कभी नदी जोड़ो परियोजना के लिए ठोस काम नहीं किया और अब 'झूठे आंदोलन' कर रहा है।
आम जनता पर असर
प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज से बुंदेलखंड क्षेत्र के निवासियों को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएँ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी, जिससे उन्हें दूरदराज़ के शहरों में जाने की आवश्यकता कम होगी। केन-बेतवा परियोजना के पूर्ण होने पर इस क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल मिलने की उम्मीद है, जो दशकों से पानी की किल्लत झेलते आए हैं।