दिल्ली विश्वविद्यालय वन ईयर पीजी सीटों पर एबीवीपी का प्रदर्शन, NEP छात्रों के भविष्य पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 17 जुलाई 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन के विरुद्ध विरोध-प्रदर्शन किया, जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अंतर्गत चौथे वर्ष की पढ़ाई पूरी कर चुके छात्रों के लिए एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट (वन ईयर पीजी) कोर्स में सीटों की गंभीर कमी का मुद्दा उठाया गया। संगठन का आरोप है कि जहाँ दो वर्षीय मास्टर्स कार्यक्रम में 4,000 से 5,000 सीटें उपलब्ध हैं, वहीं वन ईयर मास्टर्स में केवल लगभग 1,000 सीटें ही रखी गई हैं, जो हजारों छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है।
मुख्य घटनाक्रम
एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले घोषणा की थी कि ऑनर्स और प्रोग्राम दोनों श्रेणियों के चौथे वर्ष के छात्र मेरिट के आधार पर वन ईयर मास्टर्स में प्रवेश ले सकेंगे। लेकिन प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने पर स्थिति बिल्कुल भिन्न निकली। प्रत्येक विभाग में केवल 35 से 40 सीटें उपलब्ध कराई गई हैं, जबकि फोर्थ ईयर पूरा करने वाले छात्रों की संख्या इससे कई गुना अधिक है।
छात्रों पर असर
गौरतलब है कि NEP के तहत चौथे वर्ष की पढ़ाई विशेष रूप से उन छात्रों के लिए थी जो एक वर्षीय मास्टर्स करना चाहते थे। ऐसे में सीटों की यह कमी उनकी पूरी शैक्षणिक योजना को प्रभावित करती है। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की पूर्व सचिव मित्रविंदा करवाल ने आरोप लगाया कि प्रोग्राम कोर्स के छात्रों को यह जानकारी ही नहीं दी गई कि प्रायोरिटी-1 श्रेणी में प्रवेश के लिए रिसर्च कार्य अनिवार्य होगा, जिस कारण कई छात्र अब प्रवेश प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
एबीवीपी के आरोप और मांगें
एबीवीपी दिल्ली के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना जमीनी वास्तविकता को समझे नीतियाँ बनाई हैं। उनके अनुसार, यदि विश्वविद्यालय ने फोर्थ ईयर कार्यक्रम लागू किया है, तो उसके अनुरूप वन ईयर मास्टर्स में पर्याप्त सीटें भी उपलब्ध करानी चाहिए थीं। संगठन ने माँग की है कि वन ईयर एमए कार्यक्रम में सीटों की संख्या बढ़ाकर उचित अनुपात सुनिश्चित किया जाए और पारदर्शी प्रवेश नीति तत्काल लागू की जाए।
प्रशासन की चुप्पी पर नाराज़गी
मित्रविंदा करवाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी एबीवीपी ने NEP के तहत फोर्थ ईयर कार्यक्रम लागू कराने के लिए आंदोलन किया था, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने इसे लागू किया। यह ऐसे समय में आया है जब NEP को लागू हुए कई वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी क्रियान्वयन की खामियाँ छात्रों को भुगतनी पड़ रही हैं। प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई अधिकारी छात्रों से बातचीत करने नहीं आया।
आगे क्या होगा
सार्थक शर्मा ने चेतावनी दी कि एबीवीपी आर्ट्स फैकल्टी से लेकर कुलपति आवास तक अपना आंदोलन जारी रखेगी। जब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी छात्रों से संवाद कर ठोस समाधान की घोषणा नहीं करता, प्रदर्शन थमने के आसार नहीं हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और सीटों पर अंतिम निर्णय ही तय करेगा कि NEP का यह अध्याय हजारों छात्रों के लिए अवसर बनेगा या संकट।