26 जुलाई 2026
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महिला आरक्षण विधेयक गिरने से महागठबंधन का लोकतंत्र विरोधी चेहरा सामने आया: उपेंद्र कुशवाहा

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महिला आरक्षण विधेयक गिरने से महागठबंधन का लोकतंत्र विरोधी चेहरा सामने आया: उपेंद्र कुशवाहा

सारांश

महिला आरक्षण विधेयक के असफल होने पर उपेंद्र कुशवाहा ने इसे राजनीतिक इतिहास का काला दिन बताया है। उन्होंने महागठबंधन की चालाकी के कारण नागरिकों के अधिकारों के हनन की कड़ी निंदा की है।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण विधेयक का असफल होना एक गंभीर राजनीतिक घटना है।
महागठबंधन की रणनीतियों ने महिलाओं और युवाओं के अधिकारों को प्रभावित किया।
परिसीमन विधेयक का उद्देश्य समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
बिहार में सीटों की संख्या में वृद्धि से आम जनता को लाभ मिल सकता था।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा इस मुद्दे पर सक्रियता से कार्यरत है।

पटना, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने लोकसभा में महिला शक्ति वंदन अधिनियम के असफल होने को भारत के राजनीतिक इतिहास का एक काला दिन बताया।

उन्होंने रविवार को एक बयान में कहा कि यह स्पष्ट है कि एनडीए सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक के माध्यम से लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा में महिलाओं और युवाओं के लिए अवसर प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया, जिन्होंने इस महत्वपूर्ण विधेयक को सदन में पेश किया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री कुशवाहा ने कहा कि परिसीमन विधेयक का संबंध लोकतंत्र की नींव 'समान प्रतिनिधित्व' के सिद्धांत से हैं। पिछले कई दशकों में देश की जनसंख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिससे कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या इतनी बढ़ गई है कि एक प्रतिनिधि के लिए सभी समस्याओं का समाधान करना कठिन हो गया है।

उन्होंने कहा, "परिसीमन के द्वारा सीटों का पुनर्गठन होना था, जिससे हर नागरिक की आवाज विधायिका (लोकसभा और विधानसभा) में समान रूप से सुनाई देती, लेकिन महागठबंधन की चालाकी के कारण महिलाओं, युवाओं और सभी नागरिकों का अधिकार उनसे छिन गया है, जिसकी हम कड़ी निंदा करते हैं।"

उन्होने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुसार परिसीमन विधेयक से पूरे देश में लोकसभा और राज्यों की विधानसभा में सीटों की संख्या में डेढ़ गुनी वृद्धि होती। बिहार में भी लोकसभा की सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 और विधानसभा में 243 से बढ़कर 365 हो जाती, जिससे बिहार के आम जन को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक लाभ मिलता। दूसरी ओर, महिला आरक्षण विधेयक से एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती, जो उनके लिए नए अवसरों का सृजन करती।

आपको बता दें कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने परिसीमन के मुद्दे को लंबे समय से उठाया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने बिक्रमगंज, गया, मुजफ्फरपुर, और पटना में 'संवैधानिक अधिकार-परिसीमन सुधार' विषय पर महारैली का आयोजन भी किया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक का क्या महत्व है?
महिला आरक्षण विधेयक महिलाओं को राजनीति में एक तिहाई सीटें आरक्षित कर नए अवसर प्रदान करता है।
उपेंद्र कुशवाहा ने इस विधेयक पर क्या कहा?
उपेंद्र कुशवाहा ने इसे राजनीतिक इतिहास का काला दिन बताया और महागठबंधन की चालाकी की आलोचना की।
परिसीमन विधेयक का क्या उद्देश्य है?
परिसीमन विधेयक का उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों में सीटों का पुनर्गठन करना है।
महागठबंधन की नीति पर कुशवाहा का क्या मत है?
कुशवाहा का कहना है कि महागठबंधन की चालाकी ने नागरिकों के अधिकारों का हनन किया है।
इस मुद्दे पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा का दृष्टिकोण क्या है?
राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने इस मुद्दे पर महारैली आयोजित कर संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की बात की है।
राष्ट्र प्रेस
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