मणिपुर में असम राइफल्स ने विश्व धरोहर दिवस पर सांस्कृतिक संरक्षण की पहल की
सारांश
मुख्य बातें
इंफाल, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। असम राइफल्स ने शनिवार को विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चंदेल जिले के सेहलोन गांव के स्थानीय समुदाय के साथ सहयोग किया।
इस पहल को इस तरह से तैयार किया गया था कि क्षेत्र की समृद्ध विरासत की देखभाल के प्रति सामूहिक भावना का विकास हो सके। यह मणिपुर के वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में खास तौर पर महत्वपूर्ण है, जहाँ स्थानीय पहचान और पारंपरिक रीति-रिवाजों का संरक्षण सामुदायिक एकता के लिए एक आवश्यक आधार बनाता है।
दिन की शुरुआत सामूहिक स्वच्छता अभियान से हुई, जिसमें असम राइफल्स के जवानों ने स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर गांव के साझा स्थानों को फिर से संवारने का कार्य किया। इस प्रकार उन्होंने विरासत स्थलों के संरक्षण और सम्मान की आवश्यकता की एक ठोस मिसाल पेश की।
सामूहिक प्रयास की भावना आगे चलकर एक जागरूकता अभियान में परिवर्तित हुई, जिसमें पूरे गांव में संरक्षण के विषय पर चर्चा के लिए जानकारी से भरे पोस्टर लगाए गए। इसके बाद एक गहन चर्चा सत्र आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय इतिहास के संरक्षण की महत्वपूर्णता पर प्रकाश डाला गया।
स्कूल के बच्चों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए, जिससे माहौल उत्सवपूर्ण हो गया। उन्होंने लयबद्ध कहानियों के माध्यम से गांव की विरासत को जीवंत किया। लगभग 58 ग्रामीणों ने इन उत्सवों में पूरे उत्साह के साथ भाग लिया, और यह आयोजन केवल एक औपचारिकता न रहकर सामुदायिक संबंधों को मज़बूत करने का एक सफल मंच बन गया। साझा इतिहास और सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए इस कार्यक्रम ने राज्य के भीतर स्थायी शांति और आपसी सम्मान को बढ़ावा देने में सांस्कृतिक एकता के महत्व को रेखांकित किया।
असम राइफल्स ने जमीनी स्तर पर आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए शनिवार को काकचिंग जिले के काकचिंग गैरीसन में एक सप्ताह तक चलने वाली बेकरी कौशल विकास कार्यशाला का आयोजन किया। यह गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम 13 अप्रैल को शुरू हुआ और पिछले महीने 'ऑपरेशन सद्भावना' के तहत सेरू गांव में एक आधुनिक बेकरी की स्थापना के बाद की गई एक आवश्यक पहल है। मणिपुर के मौजूदा हालात को देखते हुए इस तरह की पहल सामुदायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह युवाओं और महिलाओं को आर्थिक स्थिरता की ओर ले जाने का एक सकारात्मक मार्ग प्रदान करती है।
इस कार्यशाला में सेरू और काकचिंग के पांच प्रतिभागियों को—जिनमें एक महिला और चार पुरुष शामिल थे—ब्रेड, पेस्ट्री और कुकीज बनाने की बारीकियों में व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया गया। खाना बनाने की बुनियादी तैयारी से आगे बढ़ते हुए, यह पाठ्यक्रम शौकिया बेकिंग और पेशेवर खुदरा प्रबंधन के बीच के अंतर को पाटने के लिए तैयार किया गया था।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि लाभार्थी सेरू समुदाय को पहले से उपलब्ध कराए गए पेशेवर-स्तर के उपकरणों का सही उपयोग कर सकें। इन व्यक्तियों को व्यावहारिक और बाजार-उन्मुख कौशल से लैस करके, यह कार्यक्रम आत्मनिर्भरता और छोटे पैमाने पर उद्यमिता की भावना को प्रोत्साहित करता है।
मानव पूंजी में किया गया यह निवेश न केवल स्थायी आय का निर्माण करता है, बल्कि जिले में स्थिरता लाने वाली शक्ति के रूप में भी कार्य करता है। यह ठोस और कौशल-आधारित सशक्तिकरण के माध्यम से सुरक्षा बलों और स्थानीय आबादी के बीच के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करता है और उनकी स्थायी साझेदारी को और सुदृढ़ बनाता है।