असम राइफल्स ने मणिपुर में सिविल-मिलिट्री संबंध मजबूत किए, 4 जिलों में युवा संवाद और राहत अभियान
सारांश
मुख्य बातें
असम राइफल्स ने 1 अगस्त 2026 को मणिपुर के कामजोंग, बिष्णुपुर, इंफाल पश्चिम और तेंगनौपाल जिलों में नागरिक-सैन्य संपर्क, युवा सशक्तिकरण और मानवीय सहायता के बहुआयामी कार्यक्रम संचालित किए। रक्षा प्रवक्ता के अनुसार इन पहलों का उद्देश्य सुरक्षा सहयोग को गहरा करना, स्थानीय युवाओं को दिशा देना और समाज के कमजोर वर्गों तक सहायता पहुँचाना था।
कामजोंग में सुरक्षा संवाद
शुक्रवार को कामजोंग जिले के के. अशांगखुल्लेन गाँव में वांगली कंपनी ऑपरेटिंग बेस के निकट असम राइफल्स ने एक सुरक्षा बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता एक वरिष्ठ अधिकारी ने की, जिसमें ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव और सिविल सोसायटी संगठनों के प्रतिनिधियों सहित 11 नागरिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक में मौजूदा सुरक्षा स्थिति, सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय, कानून-व्यवस्था, राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की रोकथाम और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने पर विस्तृत चर्चा हुई। वरिष्ठ अधिकारी ने सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (AFSPA) के कानूनी दायरे और उद्देश्य भी स्पष्ट किए तथा कहा कि अभियान पेशेवर तरीके से, संयम के साथ और जनता की गरिमा का सम्मान करते हुए चलाए जाते हैं। नागरिक प्रतिनिधियों ने सुरक्षा प्रयासों की सराहना की और क्षेत्रीय शांति व समावेशी विकास के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
बिष्णुपुर में युवा सहभागिता कार्यक्रम
शनिवार को बिष्णुपुर जिले के सीओबी नंबोल में असम राइफल्स ने युवाओं के लिए एक सामुदायिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। नंबोल मोंगजिंग लेकाई स्टूडेंट यूनियन क्लब और लाइब्रेरी से जुड़े 35 युवाओं ने इसमें भाग लिया।
जवानों ने करियर काउंसलिंग, कौशल विकास, शिक्षा के महत्व और सामाजिक सौहार्द में युवाओं की भूमिका पर मार्गदर्शन दिया। युवाओं को सामाजिक बुराइयों से सतर्क रहने, ऑनलाइन जानकारी साझा करने से पहले तथ्यों की जाँच करने और क्षेत्रीय स्थिरता में सक्रिय योगदान देने की सलाह दी गई। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में सामाजिक तनाव के बीच युवाओं को गलत सूचनाओं से बचाना एक अहम प्राथमिकता बन गई है।
मोरेह में मिशनरीज ऑफ चैरिटी तक राहत सामग्री
इसी दिन असम राइफल्स ने इंफाल पश्चिम जिले के मणिपुरखरी से भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित तेंगनौपाल जिले के मोरेह तक जरूरी राहत सामग्री पहुँचाने में सहायता की। मदर टेरेसा द्वारा 1950 में स्थापित 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' केंद्र में चार सिस्टर्स लगभग 60 वंचित बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और आश्रय प्रदान करती हैं।
स्थानीय परिवहन की कठिनाइयों के बावजूद असम राइफल्स ने चावल, दाल, बिस्किट, दवाएँ, सोयाबीन उत्पाद और रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुएँ वहाँ पहुँचाईं। गौरतलब है कि सीमावर्ती मोरेह क्षेत्र में नागरिक आपूर्ति श्रृंखला अक्सर बाधित रहती है, जिससे ऐसे केंद्रों पर निर्भर बच्चों की स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील हो जाती है।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
रक्षा प्रवक्ता के अनुसार कामजोंग में सुरक्षा संवाद, बिष्णुपुर में युवा सहभागिता और इंफाल पश्चिम से तेंगनौपाल तक राहत पहुँचाकर असम राइफल्स मणिपुर में आपसी विश्वास बढ़ाने, समुदायों को सशक्त करने और दीर्घकालिक शांति को बढ़ावा देने का काम कर रही है। यह पहल असम राइफल्स की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें सीमा सुरक्षा और उग्रवाद विरोधी अभियानों के साथ-साथ नागरिक जुड़ाव को भी समान महत्व दिया जाता है। आने वाले समय में ऐसे कार्यक्रमों के और जिलों में विस्तार की संभावना है।