16 सितंबर 2026
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असम राइफल्स ने मणिपुर में सिविल-मिलिट्री संबंध मजबूत किए, 4 जिलों में युवा संवाद और राहत अभियान

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असम राइफल्स ने मणिपुर में सिविल-मिलिट्री संबंध मजबूत किए, 4 जिलों में युवा संवाद और राहत अभियान

सारांश

असम राइफल्स ने मणिपुर के 4 जिलों में एक साथ तीन मोर्चों पर काम किया — कामजोंग में सुरक्षा संवाद, बिष्णुपुर में 35 युवाओं को करियर मार्गदर्शन और मोरेह में मदर टेरेसा के केंद्र तक 60 वंचित बच्चों के लिए राहत सामग्री पहुँचाई।

मुख्य बातें

असम राइफल्स ने 1 अगस्त 2026 को मणिपुर के 4 जिलों में बहुआयामी नागरिक-सैन्य कार्यक्रम संचालित किए।
अशांगखुल्लेन गाँव में सुरक्षा बैठक में 11 नागरिक प्रतिनिधि शामिल हुए; AFSPA के उद्देश्य और दायरे पर स्पष्टीकरण दिया गया।
बिष्णुपुर में 35 युवाओं को करियर काउंसलिंग, कौशल विकास और ऑनलाइन तथ्य-जाँच पर मार्गदर्शन दिया गया।
मोरेह स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी केंद्र तक चावल, दाल, दवाएँ सहित राहत सामग्री पहुँचाई गई; केंद्र में 60 वंचित बच्चे रहते हैं।
यह केंद्र मदर टेरेसा द्वारा 1950 में स्थापित किया गया था और भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित है।

असम राइफल्स ने 1 अगस्त 2026 को मणिपुर के कामजोंग, बिष्णुपुर, इंफाल पश्चिम और तेंगनौपाल जिलों में नागरिक-सैन्य संपर्क, युवा सशक्तिकरण और मानवीय सहायता के बहुआयामी कार्यक्रम संचालित किए। रक्षा प्रवक्ता के अनुसार इन पहलों का उद्देश्य सुरक्षा सहयोग को गहरा करना, स्थानीय युवाओं को दिशा देना और समाज के कमजोर वर्गों तक सहायता पहुँचाना था।

कामजोंग में सुरक्षा संवाद

शुक्रवार को कामजोंग जिले के के. अशांगखुल्लेन गाँव में वांगली कंपनी ऑपरेटिंग बेस के निकट असम राइफल्स ने एक सुरक्षा बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता एक वरिष्ठ अधिकारी ने की, जिसमें ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव और सिविल सोसायटी संगठनों के प्रतिनिधियों सहित 11 नागरिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक में मौजूदा सुरक्षा स्थिति, सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय, कानून-व्यवस्था, राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की रोकथाम और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने पर विस्तृत चर्चा हुई। वरिष्ठ अधिकारी ने सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (AFSPA) के कानूनी दायरे और उद्देश्य भी स्पष्ट किए तथा कहा कि अभियान पेशेवर तरीके से, संयम के साथ और जनता की गरिमा का सम्मान करते हुए चलाए जाते हैं। नागरिक प्रतिनिधियों ने सुरक्षा प्रयासों की सराहना की और क्षेत्रीय शांति व समावेशी विकास के प्रति अपना समर्थन दोहराया।

बिष्णुपुर में युवा सहभागिता कार्यक्रम

शनिवार को बिष्णुपुर जिले के सीओबी नंबोल में असम राइफल्स ने युवाओं के लिए एक सामुदायिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। नंबोल मोंगजिंग लेकाई स्टूडेंट यूनियन क्लब और लाइब्रेरी से जुड़े 35 युवाओं ने इसमें भाग लिया।

जवानों ने करियर काउंसलिंग, कौशल विकास, शिक्षा के महत्व और सामाजिक सौहार्द में युवाओं की भूमिका पर मार्गदर्शन दिया। युवाओं को सामाजिक बुराइयों से सतर्क रहने, ऑनलाइन जानकारी साझा करने से पहले तथ्यों की जाँच करने और क्षेत्रीय स्थिरता में सक्रिय योगदान देने की सलाह दी गई। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में सामाजिक तनाव के बीच युवाओं को गलत सूचनाओं से बचाना एक अहम प्राथमिकता बन गई है।

मोरेह में मिशनरीज ऑफ चैरिटी तक राहत सामग्री

इसी दिन असम राइफल्स ने इंफाल पश्चिम जिले के मणिपुरखरी से भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित तेंगनौपाल जिले के मोरेह तक जरूरी राहत सामग्री पहुँचाने में सहायता की। मदर टेरेसा द्वारा 1950 में स्थापित 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' केंद्र में चार सिस्टर्स लगभग 60 वंचित बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और आश्रय प्रदान करती हैं।

स्थानीय परिवहन की कठिनाइयों के बावजूद असम राइफल्स ने चावल, दाल, बिस्किट, दवाएँ, सोयाबीन उत्पाद और रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुएँ वहाँ पहुँचाईं। गौरतलब है कि सीमावर्ती मोरेह क्षेत्र में नागरिक आपूर्ति श्रृंखला अक्सर बाधित रहती है, जिससे ऐसे केंद्रों पर निर्भर बच्चों की स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील हो जाती है।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

रक्षा प्रवक्ता के अनुसार कामजोंग में सुरक्षा संवाद, बिष्णुपुर में युवा सहभागिता और इंफाल पश्चिम से तेंगनौपाल तक राहत पहुँचाकर असम राइफल्स मणिपुर में आपसी विश्वास बढ़ाने, समुदायों को सशक्त करने और दीर्घकालिक शांति को बढ़ावा देने का काम कर रही है। यह पहल असम राइफल्स की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें सीमा सुरक्षा और उग्रवाद विरोधी अभियानों के साथ-साथ नागरिक जुड़ाव को भी समान महत्व दिया जाता है। आने वाले समय में ऐसे कार्यक्रमों के और जिलों में विस्तार की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

युवा सहभागिता और मानवीय सहायता — यह तीनों मिलकर एक सुनियोजित 'सॉफ्ट पावर' रणनीति की तस्वीर बनाते हैं। हालाँकि ऐसे कार्यक्रमों की दीर्घकालिक प्रभावशीलता तब ही आँकी जा सकती है जब ज़मीनी स्तर पर सामुदायिक विश्वास के मापन-योग्य संकेतक सामने आएँ। AFSPA पर स्पष्टीकरण का प्रयास सकारात्मक है, लेकिन इस कानून को लेकर नागरिक समाज की आपत्तियाँ गहरी और पुरानी हैं — एक बैठक से वे पूरी तरह नहीं सुलझतीं।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम राइफल्स ने मणिपुर में कौन-कौन से कार्यक्रम चलाए?
असम राइफल्स ने 1 अगस्त 2026 को कामजोंग में सुरक्षा बैठक, बिष्णुपुर में युवा सामुदायिक संवाद और तेंगनौपाल के मोरेह में मिशनरीज ऑफ चैरिटी केंद्र तक राहत सामग्री पहुँचाने के कार्यक्रम आयोजित किए। ये पहल कामजोंग, बिष्णुपुर, इंफाल पश्चिम और तेंगनौपाल — चार जिलों में एक साथ हुईं।
मोरेह के मिशनरीज ऑफ चैरिटी केंद्र को राहत क्यों भेजी गई?
मोरेह भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित है जहाँ स्थानीय परिवहन की कठिनाइयों के कारण नागरिक आपूर्ति अक्सर बाधित रहती है। मदर टेरेसा द्वारा 1950 में स्थापित इस केंद्र में चार सिस्टर्स लगभग 60 वंचित बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और आश्रय देती हैं, इसलिए असम राइफल्स ने चावल, दाल, दवाएँ और अन्य आवश्यक सामग्री वहाँ पहुँचाई।
कामजोंग की सुरक्षा बैठक में क्या हुआ?
कामजोंग के के. अशांगखुल्लेन गाँव में हुई बैठक में 11 नागरिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वरिष्ठ अधिकारी ने AFSPA के कानूनी दायरे की व्याख्या की और सुरक्षा बलों के संयमित आचरण पर बल दिया; सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की रोकथाम पर भी चर्चा हुई।
बिष्णुपुर में युवा कार्यक्रम से किसे लाभ मिला?
नंबोल मोंगजिंग लेकाई स्टूडेंट यूनियन क्लब और लाइब्रेरी से जुड़े 35 युवाओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। उन्हें करियर काउंसलिंग, कौशल विकास और ऑनलाइन जानकारी की तथ्य-जाँच के बारे में मार्गदर्शन दिया गया।
असम राइफल्स के ये कार्यक्रम मणिपुर की स्थिति के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
मणिपुर में जारी सामाजिक तनाव के बीच सुरक्षा बलों और नागरिक समुदायों के बीच विश्वास बनाना रणनीतिक रूप से जरूरी है। रक्षा प्रवक्ता के अनुसार ये कार्यक्रम दीर्घकालिक शांति, समुदाय सशक्तिकरण और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
राष्ट्र प्रेस
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