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कामजोंग में असम राइफल्स का बायोमेट्रिक अभियान: म्यांमार के 500 विस्थापितों का डेटा दर्ज

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कामजोंग में असम राइफल्स का बायोमेट्रिक अभियान: म्यांमार के 500 विस्थापितों का डेटा दर्ज

सारांश

असम राइफल्स और मणिपुर प्रशासन ने कामजोंग के तीन गाँवों में 500 म्यांमार विस्थापितों का बायोमेट्रिक डेटा दर्ज किया — यह ऑपरेशन एंकर का दूसरा चरण है, जो सीमा सुरक्षा से आगे बढ़कर आंतरिक जवाबदेही की ओर बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

असम राइफल्स , मणिपुर पुलिस और सिविल प्रशासन ने कामजोंग जिले में म्यांमार विस्थापितों के लिए संयुक्त बायोमेट्रिक अभियान शुरू किया।
फाईकोह , शांगखालोक और अलोयो गाँवों में लगभग 500 लोगों का डेटा सफलतापूर्वक दर्ज किया गया।
यह ऑपरेशन एंकर का दूसरा चरण है; पहले चरण में भौतिक सीमा सुरक्षा और निगरानी पर ध्यान दिया गया था।
मिजोरम में 28,355 म्यांमार नागरिकों में से 98% से अधिक का बायोमेट्रिक एनरोलमेंट पूरा हो चुका है।
गृह मंत्रालय की सलाह पर मिजोरम में जुलाई 2025 से 'फॉरेनर्स आइडेंटिफिकेशन पोर्टल' के ज़रिए नामांकन जारी है।
म्यांमार में फरवरी 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से विस्थापित नागरिक पूर्वोत्तर भारत में आते रहे हैं।

असम राइफल्स ने मणिपुर पुलिस और सिविल प्रशासन के साथ मिलकर कामजोंग जिले में म्यांमार के विस्थापित नागरिकों की पहचान, सत्यापन और बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन के लिए एक संयुक्त अभियान शुरू किया है। 30 जून को शुरू हुई यह पहल ऑपरेशन एंकर के दूसरे चरण का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संवेदनशील भारत-म्यांमार सीमा पर राष्ट्रीय सुरक्षा और नियंत्रित मानवीय सहायता के बीच संतुलन बनाना है।

अभियान का विवरण और охват

कामजोंग जिले के फाईकोह, शांगखालोक और अलोयो गाँवों में यह अभियान चलाया गया, जहाँ म्यांमार में जारी अशांति से भागकर आए विस्थापित नागरिक अस्थायी रूप से शरण लिए हुए हैं। 40 नागरिक अधिकारियों, पुलिस कर्मियों, चिकित्सा कर्मचारियों और असम राइफल्स के जवानों की संयुक्त टीम ने तीनों स्थानों पर लगभग 500 लोगों का बायोमेट्रिक डेटा सफलतापूर्वक दर्ज किया।

रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि इस कवायद से प्रशासनिक योजना और सुरक्षा निगरानी के लिए एक प्रमाणित और केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि विस्थापित लोगों की पहचान का बारीकी से सत्यापन किया गया, बायोमेट्रिक डेटा दर्ज किया गया और उनकी डेमोग्राफिक प्रोफाइल का दस्तावेजीकरण किया गया।

ऑपरेशन एंकर: दो चरणों की रणनीति

लेफ्टिनेंट कर्नल रावत के अनुसार, ऑपरेशन एंकर का पहला चरण मुख्य रूप से भौतिक सीमा सुरक्षा को मजबूत करने पर केंद्रित था — इसमें बेहतर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, सघन गश्त और लक्षित बाड़ लगाने के माध्यम से अवैध सीमा-पार आवाजाही को रोकने का काम किया गया।

दूसरे चरण में परिचालन का ध्यान सीमा सुरक्षा से हटकर आंतरिक गलियारे में जवाबदेही सुनिश्चित करने की ओर स्थानांतरित हो गया है। अधिकारी के अनुसार, एक सुरक्षित बायोमेट्रिक डेटाबेस बनने से गुमनामी खत्म होगी, नागरिक प्रशासन को पारदर्शी तरीके से चिकित्सा और मानवीय सहायता पहुँचाने में मदद मिलेगी, और केंद्र व राज्य सरकारों को नीतिगत निर्णय लेने के लिए विश्वसनीय रिकॉर्ड उपलब्ध होंगे।

मिजोरम में व्यापक नामांकन अभियान

गौरतलब है कि मणिपुर सरकार पहले ही राज्य के कई जिलों में म्यांमार के विस्थापित नागरिकों का बायोमेट्रिक नामांकन कर चुकी है। पड़ोसी राज्य मिजोरम में अधिकारियों ने 28,355 म्यांमार नागरिकों — जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं — में से 98 प्रतिशत से अधिक का बायोमेट्रिक एनरोलमेंट पूरा कर लिया है।

ये विस्थापित नागरिक फरवरी 2021 में म्यांमार में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद अलग-अलग चरणों में मिजोरम के 11 जिलों में आकर बसे हैं। गृह मंत्रालय की सलाह पर, मिजोरम में जुलाई 2025 से 'फॉरेनर्स आइडेंटिफिकेशन पोर्टल' और 'बायोमेट्रिक एनरोलमेंट सिस्टम' के ज़रिए म्यांमार और बांग्लादेशी दोनों तरह के शरणार्थियों के लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है।

सीमा प्रबंधन की चुनौती

यह ऐसे समय में आया है जब कामजोंग जिले की म्यांमार के साथ बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है, जो अवैध आवाजाही के लिहाज से संवेदनशील मानी जाती है। लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने इस पहल को म्यांमार के विस्थापित नागरिकों को नियंत्रित मानवीय सहायता सुनिश्चित करते हुए सीमा प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

आने वाले समय में इस डेटाबेस के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारें सीमा प्रशासन तथा आंतरिक सुरक्षा पर और अधिक सुविचारित नीतिगत निर्णय ले सकेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आंतरिक प्रशासन की चुनौती के रूप में देख रही है — यह नीतिगत परिपक्वता का संकेत है। हालाँकि, बिना बाड़ वाली सीमा और बढ़ती संख्या को देखते हुए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि डेटाबेस बनने के बाद इन विस्थापितों की कानूनी स्थिति का निर्धारण कैसे होगा। भारत शरणार्थी सम्मेलन 1951 का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, इसलिए इन लोगों के भविष्य पर नीति अभी भी अस्पष्ट है। बायोमेट्रिक पंजीकरण एक ज़रूरी पहला कदम है, लेकिन बिना स्पष्ट कानूनी ढाँचे के यह डेटाबेस नीति नहीं, केवल रिकॉर्ड बनकर रह सकता है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम राइफल्स का कामजोंग में बायोमेट्रिक अभियान क्या है?
यह असम राइफल्स, मणिपुर पुलिस और सिविल प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया अभियान है, जिसमें कामजोंग जिले के तीन गाँवों में म्यांमार के लगभग 500 विस्थापित नागरिकों की पहचान सत्यापित कर बायोमेट्रिक डेटा दर्ज किया गया। यह ऑपरेशन एंकर के दूसरे चरण का हिस्सा है।
ऑपरेशन एंकर क्या है और इसके चरण कौन-से हैं?
ऑपरेशन एंकर एक नागरिक-सैन्य पहल है जिसका उद्देश्य भारत-म्यांमार सीमा पर राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय निगरानी के बीच संतुलन बनाना है। पहले चरण में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, सघन गश्त और बाड़ लगाकर अवैध आवाजाही रोकी गई, जबकि दूसरे चरण में विस्थापितों का बायोमेट्रिक दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।
मिजोरम में म्यांमार विस्थापितों के बायोमेट्रिक नामांकन की स्थिति क्या है?
मिजोरम में अधिकारियों ने 28,355 म्यांमार नागरिकों में से 98 प्रतिशत से अधिक का बायोमेट्रिक एनरोलमेंट पूरा कर लिया है। गृह मंत्रालय की सलाह पर जुलाई 2025 से 'फॉरेनर्स आइडेंटिफिकेशन पोर्टल' और 'बायोमेट्रिक एनरोलमेंट सिस्टम' के ज़रिए यह प्रक्रिया चल रही है।
म्यांमार के नागरिक मणिपुर और मिजोरम में क्यों आए हैं?
फरवरी 2021 में म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद वहाँ जारी अशांति के कारण हज़ारों नागरिक भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में शरण लेने आए हैं। ये लोग अलग-अलग चरणों में मिजोरम के 11 जिलों और मणिपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में आकर बसे हैं।
बायोमेट्रिक डेटाबेस से क्या फायदा होगा?
अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षित बायोमेट्रिक डेटाबेस से गुमनामी खत्म होगी और पारदर्शी तरीके से चिकित्सा व मानवीय सहायता पहुँचाना संभव होगा। साथ ही, केंद्र और राज्य सरकारों को सीमा प्रशासन तथा आंतरिक सुरक्षा पर सुविचारित नीतिगत निर्णय लेने के लिए विश्वसनीय रिकॉर्ड उपलब्ध होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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