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हकीमपुर बॉर्डर पर जुटे करीब 300 बांग्लादेशी, बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद वापसी की तैयारी

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हकीमपुर बॉर्डर पर जुटे करीब 300 बांग्लादेशी, बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद वापसी की तैयारी

सारांश

बंगाल के हकीमपुर बॉर्डर पर 3 जून को करीब 300 बांग्लादेशी नागरिक — महिलाएँ, बच्चे और मज़दूर — सामान समेट कर पहुँचे। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की चेतावनी और राज्य की ‘पहचान-हटाना-वापसी’ नीति के बीच, प्रशासन बायोमेट्रिक सत्यापन कर वापसी की प्रक्रिया चला रहा है।

मुख्य बातें

हकीमपुर बॉर्डर (उत्तर 24 परगना) पर 3 जून को लगभग 300 बांग्लादेशी नागरिक वापसी के लिए जुटे।
भीड़ में पुरुष, महिलाएँ और बड़ी संख्या में बच्चे शामिल; अधिकांश ने खुद को बंगाल में काम करने वाले मज़दूर बताया।
प्रशासन ने दस्तावेज़ जाँच के साथ बायोमेट्रिक सत्यापन शुरू किया।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को स्वेच्छा से लौटने या निकाले जाने की चेतावनी दी थी।
राज्य सरकार ‘पहचान, हटाना और वापसी’ नीति के तहत जिला स्तर पर होल्डिंग सेंटर बना रही है।

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट क्षेत्र स्थित हकीमपुर बॉर्डर पर बुधवार, 3 जून को बांग्लादेश लौटने के इच्छुक लगभग 300 बांग्लादेशी नागरिकों की भीड़ जुट गई, जिनमें पुरुष, महिलाएँ और बच्चे शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, सीमा पर पहुँचे इन लोगों की दस्तावेज़ जाँच और बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसके बाद उन्हें वापस भेजे जाने की तैयारी है।

सीमा पर क्या दिखा

हकीमपुर बॉर्डर के पास बुधवार सुबह से ही बांग्लादेशी नागरिक बड़ी संख्या में जुटने लगे। वीडियो में कई लोग कंधों पर कपड़ों के थैले टाँगे और सामान सँभालते नज़र आए, जबकि कई महिलाएँ बच्चों को गोद में लिए दिखीं। भीड़ में बच्चों की उपस्थिति विशेष रूप से अधिक रही।

लौटने वालों ने क्या कहा

सीमा पर मौजूद कई बांग्लादेशी नागरिकों ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि वे बंगाल में मज़दूरी का काम करते थे और उनके पास भारत में रहने का कोई वैध दस्तावेज़ नहीं है। उनका कहना था, ‘सरकार ने कहा है कि हम बांग्लादेशियों को नहीं रखेंगे, इसलिए हम वापस जा रहे हैं।’

प्रशासनिक कार्रवाई

पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मौके पर पहुँचकर सभी लोगों की पहचान की जाँच शुरू कर दी है। दस्तावेज़ों के सत्यापन के साथ-साथ बायोमेट्रिक जाँच भी की जा रही है, ताकि नागरिकता और पहचान की पुष्टि हो सके। सुरक्षा एजेंसियाँ पूरे घटनाक्रम पर निगरानी बनाए हुए हैं।

लगातार बढ़ रहा सिलसिला

जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से विभिन्न राज्यों में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के समूह लगातार हकीमपुर सीमा पर पहुँच रहे हैं। बुधवार को जुटी भीड़ पिछले दिनों की तुलना में अधिक रही। प्रशासन का कहना है कि सत्यापन पूरा होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

सरकार की नीति और चेतावनी

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सरकार अवैध प्रवासियों को ‘पहचानने, हटाने और वापस भेजने’ की नीति पर काम कर रही है। इसके तहत बीते दिनों जिला स्तर पर होल्डिंग सेंटर बनाने का भी निर्णय लिया गया था। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हाल ही में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को चेतावनी दी थी कि वे या तो स्वेच्छा से लौट जाएँ, अन्यथा उन्हें वापस भेज दिया जाएगा। आने वाले दिनों में हकीमपुर सहित अन्य सीमा चौकियों पर भी इसी तरह की भीड़ देखी जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बंगाल की बदलती राजनीतिक रेखा का संकेत है — जहाँ अवैध प्रवास का मुद्दा अब चुनावी बयानबाज़ी से उतरकर प्रशासनिक कार्रवाई में बदलता दिख रहा है। असली परीक्षा यह है कि क्या बायोमेट्रिक सत्यापन एक पारदर्शी, मानवाधिकार-अनुरूप प्रक्रिया के रूप में चलेगा, या जल्दबाज़ी में पहचान की गलतियों को जन्म देगा। बच्चों और महिलाओं की बड़ी संख्या यह सवाल भी खड़ा करती है कि वर्षों से चल रहे अनौपचारिक श्रम-बाज़ार पर अब किसकी जवाबदेही तय होगी। बिना स्पष्ट कानूनी ढाँचे और दोनों देशों के समन्वय के, यह सिलसिला बार-बार दोहराए जाने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हकीमपुर बॉर्डर पर 3 जून को क्या हुआ?
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट स्थित हकीमपुर बॉर्डर पर बुधवार, 3 जून को लगभग 300 बांग्लादेशी नागरिक वापसी के इरादे से जुटे। इनमें पुरुष, महिलाएँ और बच्चे शामिल हैं, जिनकी पहचान और बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई है।
ये बांग्लादेशी नागरिक स्वेच्छा से क्यों लौट रहे हैं?
सीमा पर पहुँचे कई लोगों ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि वे बंगाल में मज़दूरी करते थे और उनके पास भारत में रहने का कोई वैध दस्तावेज़ नहीं है। राज्य सरकार के सख्त रुख और मुख्यमंत्री की चेतावनी के बाद उन्होंने स्वेच्छा से वापस लौटने का निर्णय लिया।
बायोमेट्रिक सत्यापन में क्या जाँचा जा रहा है?
प्रशासन सीमा पर पहुँचे लोगों के दस्तावेज़ों के साथ-साथ बायोमेट्रिक डेटा की जाँच कर रहा है, ताकि उनकी नागरिकता और पहचान की पुष्टि हो सके। यह सत्यापन पूरा होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई और वापसी की प्रक्रिया तय की जाएगी।
पश्चिम बंगाल सरकार की अवैध प्रवासियों पर क्या नीति है?
राज्य सरकार ‘पहचानने, हटाने और वापस भेजने’ की नीति पर काम कर रही है। इसके तहत जिला स्तर पर होल्डिंग सेंटर बनाने का निर्णय लिया गया है, और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को स्वेच्छा से लौटने या निष्कासन का सामना करने की चेतावनी दी थी।
क्या ऐसी घटनाएँ और सीमा चौकियों पर भी हो रही हैं?
रिपोर्टों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से विभिन्न राज्यों से बांग्लादेशी नागरिकों के समूह लगातार हकीमपुर सीमा पर पहुँच रहे हैं। बुधवार को जुटी भीड़ पिछले दिनों की तुलना में अधिक रही, और प्रशासन अन्य सीमा बिंदुओं पर भी निगरानी कड़ी कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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