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हकीमपुर चेक पोस्ट पर 100 से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिए, पश्चिम बंगाल की 'डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट' नीति का असर

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हकीमपुर चेक पोस्ट पर 100 से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिए, पश्चिम बंगाल की 'डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट' नीति का असर

सारांश

पश्चिम बंगाल में BJP सरकार की 'डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट' नीति का असर दिखने लगा है — हकीमपुर चेक पोस्ट पर 100 से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिए स्वेच्छा से लौटने पहुँचे। 23 मई के होल्डिंग सेंटर आदेश और मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी के सख्त निर्देशों के बाद यह प्रवृत्ति तेज़ हुई है।

मुख्य बातें

हकीमपुर चेक पोस्ट , उत्तर 24 परगना पर मंगलवार, 26 मई को 100 से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिए बांग्लादेश लौटने के लिए एकत्रित हुए।
मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी के निर्देश पर पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों के विरुद्ध कार्रवाई तेज़ की गई है।
23 मई को सभी जिलों को डिटेक्टेड डिफॉल्ट होल्डिंग सेंटर बनाने के आदेश जारी किए गए; संदिग्धों को अधिकतम 30 दिन रखा जा सकेगा।
जाँच के दौरान बायोमेट्रिक डेटा लिया जाएगा और केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
यह प्रक्रिया इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 और केंद्र सरकार की गाइडलाइन के तहत संचालित है।

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हकीमपुर चेक पोस्ट पर मंगलवार, 26 मई को 100 से अधिक अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए — पुरुष और महिलाएँ दोनों — स्वेच्छा से बांग्लादेश लौटने के लिए एकत्रित हुए। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी के निर्देश पर अवैध प्रवासियों के विरुद्ध कार्रवाई तेज हो गई है, जिसके चलते बड़ी संख्या में घुसपैठिए सीमा की ओर लौट रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बसीरहाट उपखंड के स्वरूपनगर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिथारी हकीमपुर ग्राम पंचायत के हकीमपुर चेक पोस्ट पर मंगलवार सुबह से ही घुसपैठियों की भीड़ जमा होने लगी। अधिकारियों के अनुसार, ये लोग पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे थे। इससे पहले भी इसी चेक पोस्ट पर 100 से अधिक बांग्लादेशी नागरिक जमा हो चुके हैं, जो दर्शाता है कि यह प्रवृत्ति लगातार जारी है।

सरकार की 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट' नीति

पश्चिम बंगाल सरकार ने 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट' नीति लागू की है। 23 मई को सभी जिलों को जारी आदेश में जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया कि ऐसे डिटेक्टेड डिफॉल्ट होल्डिंग सेंटर स्थापित किए जाएँ, जहाँ संदिग्ध विदेशी नागरिकों को अधिकतम 30 दिन तक रखा जा सके।

इस अवधि में संबंधित व्यक्तियों के दस्तावेज़, पहचान और नागरिकता की जाँच की जाएगी। जाँच के दौरान बायोमेट्रिक डेटा लिया जाएगा और जानकारी केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। पहचान की पुष्टि के बाद संबंधित व्यक्तियों को सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपा जाएगा, जो उन्हें उनके देश वापस भेजेगा।

कानूनी आधार और केंद्र की भूमिका

राज्य सरकार के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत की जा रही है। सरकार का कहना है कि यह कदम केंद्र सरकार की उस गाइडलाइन के अनुरूप है, जिसमें अवैध बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं से निपटने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, होल्डिंग सेंटर अस्थायी व्यवस्था होंगे।

मुख्यमंत्री का निर्देश

कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें पुलिस के हवाले किया जाए। उन्होंने कहा था कि इसके बाद BSF उन्हें उनके देश वापस भेजेगी। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अवैध प्रवासन को लेकर प्रशासनिक रवैये में स्पष्ट बदलाव देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि होल्डिंग सेंटरों के निर्देश जारी होने के बाद से सीमा पर लौटने वाले बांग्लादेशियों की संख्या में तेज़ी आई है। आने वाले दिनों में राज्य के अन्य जिलों से भी ऐसे मामले सामने आने की संभावना है, क्योंकि जिला प्रशासन को सक्रिय रूप से संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान करने के आदेश दिए गए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर क्रियान्वयन की क्षमता और मानवाधिकार मानकों का पालन अभी परखा जाना बाकी है। यह भी उल्लेखनीय है कि दशकों से यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श में रहा है, पर ज़मीनी कार्रवाई हमेशा चुनावी चक्र से जुड़ी रही है — इस बार की निरंतरता ही इसकी विश्वसनीयता तय करेगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हकीमपुर चेक पोस्ट पर क्या हुआ?
26 मई को उत्तर 24 परगना के हकीमपुर चेक पोस्ट पर 100 से अधिक अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए बांग्लादेश लौटने के लिए एकत्रित हुए। ये लोग पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे थे।
पश्चिम बंगाल की 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट' नीति क्या है?
यह पश्चिम बंगाल सरकार की वह नीति है जिसके तहत अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें होल्डिंग सेंटर में रखा जाता है और फिर BSF के माध्यम से वापस उनके देश भेजा जाता है। यह प्रक्रिया इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 और केंद्र सरकार की गाइडलाइन के तहत की जा रही है।
होल्डिंग सेंटर में संदिग्धों को कितने दिन रखा जा सकता है?
23 मई के आदेश के अनुसार, संदिग्ध विदेशी नागरिकों को होल्डिंग सेंटर में अधिकतम 30 दिन तक रखा जा सकता है। इस दौरान उनके दस्तावेज़, पहचान और नागरिकता की जाँच की जाएगी और बायोमेट्रिक डेटा लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने इस मामले में क्या कहा?
मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने निर्देश दिया कि अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें पुलिस के हवाले किया जाए, जिसके बाद BSF उन्हें उनके देश वापस भेजेगी। उनके इस निर्देश के बाद से सीमा पर स्वैच्छिक रूप से लौटने वाले घुसपैठियों की संख्या में वृद्धि देखी गई है।
यह कार्रवाई किस कानून के तहत हो रही है?
यह पूरी प्रक्रिया इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत संचालित है। राज्य सरकार का कहना है कि यह केंद्र सरकार की उस गाइडलाइन के अनुरूप है जो अवैध बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं से निपटने की प्रक्रिया निर्धारित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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