15 जुलाई 2026
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मणिपुर में असम राइफल्स का बड़ा सर्च ऑपरेशन: उखरूल में सेना, BSF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

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मणिपुर में असम राइफल्स का बड़ा सर्च ऑपरेशन: उखरूल में सेना, BSF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

सारांश

NH-202 पर घात लगाकर हमले के बाद असम राइफल्स ने उखरूल में सेना, BSF और मणिपुर पुलिस के साथ बड़ा संयुक्त सर्च ऑपरेशन चलाया। यह अभियान मणिपुर में बहु-एजेंसी उग्रवाद विरोधी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें सीमा प्रबंधन और विस्थापित नागरिकों का पंजीकरण भी शामिल है।

मुख्य बातें

असम राइफल्स , भारतीय सेना , BSF और मणिपुर पुलिस ने 15 जुलाई 2025 को उखरूल जिले के टीएम कासोम में संयुक्त सर्च ऑपरेशन चलाया।
यह अभियान राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर शांगशाक के पास नुंगशांग क्षेत्र में हुए अंबुश के बाद शुरू किया गया।
30 जून को कामजोंग जिले में 40 अधिकारियों और कर्मियों की टीम ने म्यांमार से आए विस्थापित नागरिकों का बायोमेट्रिक पंजीकरण किया था।
रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने सीमा प्रबंधन और मानवीय सहायता को इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बताया।
कामजोंग जिला म्यांमार के साथ बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जो इसे सुरक्षा दृष्टि से संवेदनशील बनाता है।

असम राइफल्स ने 15 जुलाई 2025 को मणिपुर के उखरूल जिले के टीएम कासोम इलाके में भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और मणिपुर पुलिस के साथ मिलकर एक बड़ा संयुक्त सर्च और सैनिटाइजेशन अभियान चलाया। यह ऑपरेशन उग्रवाद विरोधी प्रयासों को और धार देने के उद्देश्य से मंगलवार की सुबह शुरू किया गया।

ऑपरेशन की पृष्ठभूमि

असम राइफल्स के अनुसार, यह संयुक्त अभियान राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर शांगशाक के निकट नुंगशांग क्षेत्र में राष्ट्रविरोधी तत्वों द्वारा किए गए घात लगाकर हमले (अंबुश) के बाद शुरू किया गया। इस हमले ने सुरक्षा एजेंसियों को पूरे इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाने के लिए प्रेरित किया।

मुख्य घटनाक्रम

चारों सुरक्षा बलों ने आपसी समन्वय के साथ टीएम कासोम इलाके की गहन तलाशी ली। अभियान का मुख्य उद्देश्य पूरे क्षेत्र को सुरक्षित बनाना, संदिग्ध गतिविधियों पर रोक लगाना और उग्रवादियों के विरुद्ध कार्रवाई को और मज़बूत करना था। सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार इस क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए हैं ताकि भविष्य में किसी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि को रोका जा सके।

सीमा प्रबंधन की पहल

गौरतलब है कि इससे पहले 30 जून को असम राइफल्स ने सिविल प्रशासन और मणिपुर पुलिस के साथ मिलकर सीमावर्ती कामजोंग जिले में म्यांमार से आए विस्थापित नागरिकों की पहचान, सत्यापन और बायोमेट्रिक पंजीकरण के लिए एक अलग संयुक्त अभियान चलाया था। पूर्वी मणिपुर का कामजोंग जिला म्यांमार के साथ बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जो इसे संवेदनशील बनाता है।

रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने उस अभियान के बारे में बताया था कि यह पहल सीमा प्रबंधन को मज़बूत करने और म्यांमार से आए विस्थापित लोगों तक नियंत्रित एवं व्यवस्थित मानवीय सहायता पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उस अभियान में 40 अधिकारियों और कर्मियों की संयुक्त टीम शामिल थी, जिसमें नागरिक प्रशासन, पुलिस, चिकित्सा विभाग और असम राइफल्स के जवान शामिल थे।

आम जनता पर असर

यह ऑपरेशन ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में लंबे समय से जातीय तनाव और उग्रवादी गतिविधियाँ सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। सुरक्षा बलों की बढ़ी हुई उपस्थिति और सक्रिय अभियानों से स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा का भाव बढ़ाने की उम्मीद है।

आगे की राह

सुरक्षा एजेंसियाँ उखरूल और आसपास के संवेदनशील इलाकों में निगरानी जारी रखेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बहु-एजेंसी समन्वय और सीमा प्रबंधन की दोहरी रणनीति मणिपुर में दीर्घकालिक स्थिरता के लिए ज़रूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

NH-202 जैसे प्रमुख राजमार्ग पर अंबुश की घटनाएँ यह भी संकेत देती हैं कि उग्रवादी तत्व अभी भी संगठित और सक्रिय हैं। म्यांमार सीमा पर बायोमेट्रिक पंजीकरण अभियान सीमा प्रबंधन की दिशा में ज़रूरी कदम है, लेकिन बिना बाड़ वाली सीमा की दीर्घकालिक चुनौती का समाधान केवल अभियानों से नहीं होगा — इसके लिए ठोस नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में असम राइफल्स का यह सर्च ऑपरेशन क्यों चलाया गया?
यह ऑपरेशन राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर शांगशाक के पास नुंगशांग क्षेत्र में राष्ट्रविरोधी तत्वों द्वारा किए गए घात लगाकर हमले (अंबुश) के बाद शुरू किया गया। सुरक्षा बलों का उद्देश्य इलाके को सुरक्षित बनाना और उग्रवादी गतिविधियों पर रोक लगाना था।
इस संयुक्त अभियान में कौन-कौन सी सुरक्षा एजेंसियाँ शामिल थीं?
इस अभियान में असम राइफल्स, भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और मणिपुर पुलिस ने मिलकर भाग लिया। चारों एजेंसियों ने उखरूल जिले के टीएम कासोम इलाके में समन्वित तलाशी और सैनिटाइजेशन अभियान चलाया।
कामजोंग जिले में 30 जून का अभियान क्या था?
30 जून को असम राइफल्स ने सिविल प्रशासन और मणिपुर पुलिस के साथ मिलकर कामजोंग जिले में म्यांमार से आए विस्थापित नागरिकों की पहचान, सत्यापन और बायोमेट्रिक पंजीकरण के लिए अभियान चलाया था। इसमें 40 अधिकारियों और कर्मियों की संयुक्त टीम शामिल थी।
कामजोंग जिला सुरक्षा की दृष्टि से क्यों संवेदनशील है?
पूर्वी मणिपुर का कामजोंग जिला म्यांमार के साथ बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है। इससे अवैध घुसपैठ और विस्थापित नागरिकों की आवाजाही पर नियंत्रण रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
मणिपुर में सुरक्षा बलों की इन कार्रवाइयों का आम नागरिकों पर क्या असर होगा?
इन अभियानों का उद्देश्य उग्रवादी गतिविधियों पर रोक लगाकर आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही, म्यांमार से आए विस्थापित लोगों तक नियंत्रित और व्यवस्थित मानवीय सहायता पहुँचाना भी इन अभियानों का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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