मणिपुर में असम राइफल्स का बड़ा सर्च ऑपरेशन: उखरूल में सेना, BSF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
असम राइफल्स ने 15 जुलाई 2025 को मणिपुर के उखरूल जिले के टीएम कासोम इलाके में भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और मणिपुर पुलिस के साथ मिलकर एक बड़ा संयुक्त सर्च और सैनिटाइजेशन अभियान चलाया। यह ऑपरेशन उग्रवाद विरोधी प्रयासों को और धार देने के उद्देश्य से मंगलवार की सुबह शुरू किया गया।
ऑपरेशन की पृष्ठभूमि
असम राइफल्स के अनुसार, यह संयुक्त अभियान राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर शांगशाक के निकट नुंगशांग क्षेत्र में राष्ट्रविरोधी तत्वों द्वारा किए गए घात लगाकर हमले (अंबुश) के बाद शुरू किया गया। इस हमले ने सुरक्षा एजेंसियों को पूरे इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य घटनाक्रम
चारों सुरक्षा बलों ने आपसी समन्वय के साथ टीएम कासोम इलाके की गहन तलाशी ली। अभियान का मुख्य उद्देश्य पूरे क्षेत्र को सुरक्षित बनाना, संदिग्ध गतिविधियों पर रोक लगाना और उग्रवादियों के विरुद्ध कार्रवाई को और मज़बूत करना था। सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार इस क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए हैं ताकि भविष्य में किसी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि को रोका जा सके।
सीमा प्रबंधन की पहल
गौरतलब है कि इससे पहले 30 जून को असम राइफल्स ने सिविल प्रशासन और मणिपुर पुलिस के साथ मिलकर सीमावर्ती कामजोंग जिले में म्यांमार से आए विस्थापित नागरिकों की पहचान, सत्यापन और बायोमेट्रिक पंजीकरण के लिए एक अलग संयुक्त अभियान चलाया था। पूर्वी मणिपुर का कामजोंग जिला म्यांमार के साथ बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जो इसे संवेदनशील बनाता है।
रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने उस अभियान के बारे में बताया था कि यह पहल सीमा प्रबंधन को मज़बूत करने और म्यांमार से आए विस्थापित लोगों तक नियंत्रित एवं व्यवस्थित मानवीय सहायता पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उस अभियान में 40 अधिकारियों और कर्मियों की संयुक्त टीम शामिल थी, जिसमें नागरिक प्रशासन, पुलिस, चिकित्सा विभाग और असम राइफल्स के जवान शामिल थे।
आम जनता पर असर
यह ऑपरेशन ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में लंबे समय से जातीय तनाव और उग्रवादी गतिविधियाँ सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। सुरक्षा बलों की बढ़ी हुई उपस्थिति और सक्रिय अभियानों से स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा का भाव बढ़ाने की उम्मीद है।
आगे की राह
सुरक्षा एजेंसियाँ उखरूल और आसपास के संवेदनशील इलाकों में निगरानी जारी रखेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बहु-एजेंसी समन्वय और सीमा प्रबंधन की दोहरी रणनीति मणिपुर में दीर्घकालिक स्थिरता के लिए ज़रूरी है।