दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र: MP के सोयाबीन किसानों को प्रमाणित बीज दो, बाहरी निर्यात पर रोक लगाओ
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 22 मई 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर राज्य के सोयाबीन किसानों के लिए गुणवत्तायुक्त प्रमाणित बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने की माँग की है। इसके साथ ही उन्होंने अन्य राज्यों को सोयाबीन बीज के निर्यात और परिवहन पर तत्काल रोक लगाने तथा बीज प्रमाणीकरण संस्था में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच कराने का आग्रह किया है।
पत्र में क्या उठाए गए मुद्दे
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में कृषि सलाहकार परिषद, मध्यप्रदेश के पूर्व सदस्य केदार सिरोही द्वारा भेजे गए ईमेल का हवाला दिया। उनके अनुसार किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर प्रमाणित बीज न मिलने से कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और किसानों की आर्थिक स्थिति और कमज़ोर हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि बीज प्रमाणीकरण प्रक्रिया में यदि किसी प्रकार की अनियमितता हो रही है, तो उसकी जाँच कर उचित कार्रवाई की जाए।
मध्यप्रदेश की सोयाबीन में अग्रणी भूमिका
मध्यप्रदेश देश में सोयाबीन उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। ऐसे में यदि राज्य से बीज का निर्यात बेरोकटोक जारी रहा, तो स्थानीय किसानों के लिए बुवाई के मौसम में बीज की कमी की आशंका बनी रहती है। दिग्विजय सिंह ने इसी बिंदु को केंद्र में रखते हुए माँग की है कि प्रदेश में पर्याप्त बीज भंडार बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह किया है कि किसानों के हितों से जुड़े इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएँ। उन्होंने इसे केवल कृषि का नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका का सवाल बताया।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ बुवाई सीजन नज़दीक है और किसान बीज की खरीद की तैयारी में जुटे हैं। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में सोयाबीन किसानों की समस्याएँ — चाहे वह नकली बीज हों या उचित मूल्य न मिलना — पिछले कई वर्षों से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रही हैं। कांग्रेस द्वारा यह पत्र राज्य सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत भी देखा जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार इस माँग पर क्या रुख अपनाती है और बुवाई सीजन से पहले किसानों को राहत मिल पाती है या नहीं।