दिग्विजय सिंह ने पीयूष गोयल को लिखा पत्र: MP बासमती GI टैग और जैविक कपास घोटाले पर उच्चस्तरीय बैठक की मांग

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दिग्विजय सिंह ने पीयूष गोयल को लिखा पत्र: MP बासमती GI टैग और जैविक कपास घोटाले पर उच्चस्तरीय बैठक की मांग

सारांश

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर दो बड़े कृषि मुद्दे उठाए हैं — बासमती चावल का लंबित GI टैग और जैविक कपास निर्यात में कथित धोखाधड़ी। उनका आरोप है कि बीटी कपास को ऑर्गेनिक बताकर निर्यात किया जा रहा है, जिससे किसान और भारत की अंतरराष्ट्रीय साख दोनों को नुकसान हो रहा है।

Key Takeaways

  • दिग्विजय सिंह ने 29 अप्रैल 2026 को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय बैठक की मांग की।
  • मध्यप्रदेश के बासमती चावल उत्पादक किसान कई वर्षों से GI टैग की मांग कर रहे हैं, अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं।
  • GI टैग के अभाव में अन्य राज्यों के व्यापारी MP की बासमती को अपने राज्य के नाम से निर्यात कर रहे हैं।
  • कथित तौर पर साधारण बीटी कपास को ऑर्गेनिक प्रमाणित कर निर्यात किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
  • सिंह यह मुद्दा राज्यसभा में और प्रधानमंत्री को पत्र के ज़रिए पहले भी उठा चुके हैं।
  • प्रस्तावित बैठक में शिवराज सिंह चौहान और एपीडा के अधिकारियों की उपस्थिति की मांग।

कांग्रेस नेता एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 29 अप्रैल 2026 को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश के बासमती चावल की जी.आई. टैगिंग और जैविक कपास निर्यात में कथित अनियमितताओं पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने इस बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

बासमती चावल का GI टैग विवाद

दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में कहा कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल उत्पादक किसान कई वर्षों से भौगोलिक संकेत (GI) टैग की मांग करते आ रहे हैं, परंतु अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जी.आई. टैग के अभाव में अन्य राज्यों के व्यापारी मध्यप्रदेश में उत्पादित बासमती चावल को अपने राज्य के नाम से निर्यात कर रहे हैं। इससे राज्य के किसानों को सीधी आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है और उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा।

जैविक कपास निर्यात में कथित अनियमितताएँ

सिंह ने जैविक कपास के मामले में भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, कुछ व्यापारियों, प्रमाणन एजेंसियों एवं संबंधित अधिकारियों की कथित मिलीभगत से साधारण बीटी कपास को ऑर्गेनिक कपास के रूप में प्रमाणित कर निर्यात किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों से न केवल वास्तविक जैविक किसानों को नुकसान हो रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख भी प्रभावित हुई है।

पूर्व में भी उठाया जा चुका है मुद्दा

दिग्विजय सिंह ने बताया कि वे इन दोनों मुद्दों को पूर्व में राज्यसभा में उठा चुके हैं और इस संबंध में प्रधानमंत्री तथा संबंधित मंत्रियों को भी पत्र लिख चुके हैं। गौरतलब है कि बावजूद इसके अब तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है, जिसके चलते उन्होंने एक बार पुनः केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट करने का प्रयास किया है।

प्रस्तावित बैठक का उद्देश्य

प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक में बासमती चावल की जी.आई. टैगिंग की प्रक्रिया में तेज़ी लाने तथा जैविक कपास के उत्पादन और निर्यात प्रणाली में सुधार जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा करने का प्रस्ताव रखा गया है। सिंह ने आशा व्यक्त की है कि केंद्र सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही बैठक के लिए समय निर्धारित करेगी, ताकि मध्यप्रदेश के किसानों को न्याय मिल सके और निर्यात प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या बैठक शीघ्र आयोजित की जाती है।

Point of View

तो यह केवल किसानों की नहीं, बल्कि भारत के 'ऑर्गेनिक इंडिया' ब्रांड की विश्वसनीयता पर भी सीधा प्रहार है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक जैविक बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। केंद्र सरकार की चुप्पी — राज्यसभा में सवाल और प्रधानमंत्री को पत्र के बावजूद — यह सवाल खड़ा करती है कि क्या कृषि निर्यात नीति में जवाबदेही का कोई तंत्र वास्तव में काम कर रहा है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

मध्यप्रदेश के बासमती चावल को GI टैग क्यों नहीं मिला है?
दिग्विजय सिंह के अनुसार, मध्यप्रदेश के बासमती उत्पादक कई वर्षों से GI टैग की मांग कर रहे हैं लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। GI टैग के अभाव में अन्य राज्यों के व्यापारी MP की बासमती को अपने राज्य के नाम से निर्यात कर रहे हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
जैविक कपास निर्यात में क्या अनियमितता का आरोप लगाया गया है?
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि कुछ व्यापारियों, प्रमाणन एजेंसियों और अधिकारियों की कथित मिलीभगत से साधारण बीटी कपास को ऑर्गेनिक कपास के रूप में प्रमाणित कर निर्यात किया गया है। इससे वास्तविक जैविक किसानों को नुकसान हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख प्रभावित हुई है।
दिग्विजय सिंह ने किस बैठक की मांग की है और उसमें कौन शामिल होंगे?
उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से उच्चस्तरीय बैठक बुलाने की मांग की है, जिसमें कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और एपीडा के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। इस बैठक में बासमती GI टैगिंग और जैविक कपास निर्यात सुधार पर चर्चा प्रस्तावित है।
क्या यह मुद्दा पहले भी संसद में उठाया गया है?
हाँ, दिग्विजय सिंह के अनुसार वे इन दोनों मुद्दों को पूर्व में राज्यसभा में उठा चुके हैं और प्रधानमंत्री तथा संबंधित मंत्रियों को पत्र भी लिख चुके हैं। उनका कहना है कि बावजूद इसके अब तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है।
GI टैग न मिलने से MP के किसानों को क्या नुकसान हो रहा है?
GI टैग के अभाव में मध्यप्रदेश के बासमती चावल की अलग पहचान अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में स्थापित नहीं हो पाती। अन्य राज्यों के व्यापारी इस चावल को अपने राज्य के नाम से निर्यात कर मुनाफा कमाते हैं, जबकि MP के किसान उचित मूल्य और ब्रांड पहचान दोनों से वंचित रहते हैं।
Nation Press