दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र, 'ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग' लागू करने की मांग

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दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र, 'ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग' लागू करने की मांग

सारांश

दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर 'ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग' लागू करने की माँग की है — बीज खरीद से लेकर फसल बीमा तक की जटिलताओं को दूर करने का आग्रह। मुख्यमंत्री निवास पर हुई मुलाकात में गेहूं खरीदी की दिक्कतें भी उठाई गईं, जबकि 80 लाख मीट्रिक टन से अधिक स्लॉट पहले ही बुक हो चुके हैं।

मुख्य बातें

दिग्विजय सिंह ने 5 मई को मुख्यमंत्री डॉ.
मोहन यादव को पत्र लिखकर 'ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग' नीति शीघ्र लागू करने की माँग की।
किसान नेता केदार सिरोही के सुझाव का समर्थन करते हुए बीज खरीद, ट्रांसफार्मर, फसल विक्रय और ऋण प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया गया।
फसल बीमा क्लेम की जटिलता और खाद उपलब्धता में पारदर्शिता की कमी को प्रमुख समस्याओं के रूप में उठाया गया।
शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री निवास पर हुई मुलाकात में गेहूं खरीदी की प्रक्रियागत दिक्कतें भी चर्चा में रहीं।
CM मोहन यादव ने बताया कि 80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदी के स्लॉट पहले ही बुक हो चुके हैं।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश के किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए 'ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग' नीति शीघ्र लागू करने की मांग की है। 5 मई को भेजे गए इस पत्र में उन्होंने कृषि क्षेत्र की प्रशासनिक जटिलताओं को दूर कर खेती को सरल, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

किसानों की मुख्य समस्याएँ

दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में किसान नेता केदार सिरोही के सुझाव का समर्थन करते हुए कहा कि जिस प्रकार 'ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस' के माध्यम से व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया, उसी तर्ज पर कृषि क्षेत्र में भी सुधार अपरिहार्य है। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रदेश के किसान बीज खरीद, ट्रांसफार्मर बदलवाने, फसल विक्रय, ऋण लेने एवं चुकाने जैसी बुनियादी प्रक्रियाओं में अनावश्यक बाधाओं का सामना करते हैं।

इसके अतिरिक्त, फसल बीमा क्लेम की प्रक्रिया अत्यधिक जटिल बताई गई है और खाद की उपलब्धता में पारदर्शिता की कमी को भी एक गंभीर समस्या के रूप में उठाया गया है। उनके अनुसार, 'खेती करने में आसानी' की नीति लागू कर इन समस्याओं का व्यापक समाधान संभव है।

नीतिगत सुझाव

दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि कृषि से जुड़े सभी विभागों की व्यापक समीक्षा की जाए और नीति निर्माण में किसान प्रतिनिधियों तथा कृषि वैज्ञानिकों से परामर्श लिया जाए। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश की कृषि व्यवस्था को अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री को शीघ्र आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध भी किया गया है।

मुख्यमंत्री निवास पर मुलाकात

इससे पहले शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री निवास पर दिग्विजय सिंह और मुख्यमंत्री मोहन यादव के बीच मुलाकात हुई, जिसमें किसानों से जुड़े मुद्दे — विशेषकर गेहूं खरीदी की मौजूदा प्रक्रिया में आ रही दिक्कतें — केंद्र में रहीं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को किसानों की परेशानियों से अवगत कराया और समय पर समाधान की जरूरत पर जोर दिया, ताकि गेहूं खरीदी सुचारु रूप से हो सके।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि 80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदी के स्लॉट पहले ही बुक किए जा चुके हैं और प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए व्यवस्थाओं पर निरंतर नज़र रखी जा रही है।

अन्य चर्चाएँ

बैठक के दौरान दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को अपने गृह नगर राघौगढ़ में इस महीने के अंत में होने वाले एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। दिग्विजय सिंह के कार्यालय ने बैठक की पुष्टि की, हालाँकि चर्चा का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया।

आगे क्या

गौरतलब है कि यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद का मौसम चरम पर है और किसान संगठन प्रक्रियागत सुधारों की माँग उठा रहे हैं। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय 'ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग' के प्रस्ताव पर कितनी शीघ्रता से कार्यवाही करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर जमीनी स्तर पर किसानों की शिकायतें बताती हैं कि संख्याएँ और अनुभव अक्सर अलग-अलग होते हैं। 'ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग' एक सार्थक विचार है, लेकिन इसके लिए केवल पत्राचार नहीं, बल्कि विभागीय जवाबदेही और स्वतंत्र निगरानी तंत्र की आवश्यकता होगी।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग' क्या है और दिग्विजय सिंह ने इसकी माँग क्यों की?
'ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग' एक प्रस्तावित नीति है जो 'ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस' की तर्ज पर कृषि क्षेत्र की प्रशासनिक जटिलताओं को सरल बनाने की बात करती है। दिग्विजय सिंह ने यह माँग इसलिए उठाई क्योंकि मध्य प्रदेश के किसान बीज खरीद, फसल बीमा क्लेम और ऋण प्रक्रियाओं में अनावश्यक बाधाओं का सामना कर रहे हैं।
दिग्विजय सिंह और CM मोहन यादव की मुलाकात में क्या हुआ?
शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री निवास पर हुई बैठक में दिग्विजय सिंह ने किसानों की समस्याएँ, विशेषकर गेहूं खरीदी की प्रक्रियागत दिक्कतें, उठाईं। CM मोहन यादव ने आश्वासन दिया कि 80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदी के स्लॉट बुक हो चुके हैं और व्यवस्थाओं पर नज़र रखी जा रही है।
मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी की स्थिति क्या है?
CM मोहन यादव के अनुसार, 80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदी के स्लॉट पहले ही बुक किए जा चुके हैं और प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। हालाँकि, दिग्विजय सिंह ने खरीदी में आ रही दिक्कतों का उल्लेख करते हुए समय पर समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
किसान नेता केदार सिरोही का इस मामले में क्या योगदान है?
किसान नेता केदार सिरोही ने 'ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग' का मूल सुझाव दिया था, जिसका दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में समर्थन किया। सिरोही के सुझाव के आधार पर ही कृषि विभागों की व्यापक समीक्षा और किसान प्रतिनिधियों से परामर्श लेने की माँग की गई है।
दिग्विजय सिंह ने CM को और क्या निमंत्रण दिया?
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को अपने गृह नगर राघौगढ़ में इस महीने के अंत में होने वाले एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया। बैठक का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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