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गौतम अदाणी की 'वंदे भारतम' पहल को 26,000 से अधिक आवेदन, युवाओं में 'विकसित भारत' की उम्मीद

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गौतम अदाणी की 'वंदे भारतम' पहल को 26,000 से अधिक आवेदन, युवाओं में 'विकसित भारत' की उम्मीद

सारांश

'वंदे भारतम' के पहले संस्करण को 26,000 से अधिक आवेदन मिले — हर राज्य से, हर तबके से। गौतम अदाणी का संदेश साफ़ है: भारत की अगली विकास गाथा महानगरों से नहीं, छोटे शहरों और गाँवों की प्रतिभाओं से लिखी जाएगी।

मुख्य बातें

गौतम अदाणी ने 15 अगस्त 2026 को 'वंदे भारतम' पहल के पहले संस्करण के सफल समापन की घोषणा की।
पहल को देश भर से 26,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए; हर राज्य का प्रतिनिधित्व रहा।
प्रतिभागियों में युवा स्टार्टअप संस्थापक, महिला उद्यमी , ग्रामीण नवाचारकर्ता और टियर-2 व टियर-3 शहरों के युवा शामिल।
अदाणी ने एक्स पर कहा — "मेरे लिए वे सभी विजेता हैं और उनकी यात्रा अभी शुरू हुई है।" प्रतिभागियों को निवेशकों और मेंटर्स से सीधे जुड़ने का अवसर मिला।

अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर घोषणा की कि उनकी पहल 'वंदे भारतम' का पहला संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है, जिसे देश भर से 26,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। अदाणी ने कहा कि भारत के युवाओं में अपार क्षमता है और यही प्रतिभाएँ आने वाले वर्षों में 'विकसित भारत' के निर्माण की नींव रखेंगी।

वंदे भारतम पहल: मुख्य घटनाक्रम

'वंदे भारतम' पहल के पहले संस्करण में भारत के हर राज्य का प्रतिनिधित्व देखने को मिला। इसमें युवा स्टार्टअप संस्थापक, महिला उद्यमी, ग्रामीण नवाचारकर्ता और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों के प्रतिभाशाली युवा शामिल रहे, जिन्होंने अपने नवाचारों और समस्या समाधान क्षमता के ज़रिए अलग पहचान बनाई।

गौतम अदाणी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "26,000 से अधिक आवेदन आए। देश के हर राज्य का प्रतिनिधित्व हुआ। युवा संस्थापक, महिला उद्यमी, ग्रामीण नवाचारकर्ता और छोटे शहरों से आने वाले समस्या समाधानकर्ता इसमें शामिल हुए। मेरे लिए वे सभी विजेता हैं और उनकी यात्रा अभी शुरू हुई है।"

प्रतिभा की विविधता और गहराई

अदाणी ने कहा कि इस पहल से सबसे अधिक प्रभावित करने वाली बात देश भर में मौजूद प्रतिभा की गहराई और विविधता रही। उनके अनुसार, भारत में प्रतिभा केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है — छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद हैं जो नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेज़ी से विस्तार पा रहा है और सरकार भी युवा उद्यमिता को बढ़ावा देने की नीतियाँ लागू कर रही है।

प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया

कार्यक्रम में भाग लेने वाले कई प्रतिभागियों ने इस प्लेटफॉर्म की सराहना की। उनका कहना था कि इस पहल ने उन्हें सीधे निवेशकों और मेंटर्स से जुड़ने का अवसर दिया, जिससे उनके विचारों और व्यवसायों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

स्वतंत्रता दिवस पर अदाणी का संदेश

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संदेश में गौतम अदाणी ने देश के विकास, विश्वास और मूल्यों के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, "15 अगस्त मेरे लिए केवल जश्न का दिन नहीं है, बल्कि आभार का दिन भी है। यह हमें सिखाता है कि कोई भी बड़ा बदलाव त्याग और धैर्य के बिना संभव नहीं होता।"

उन्होंने यह भी कहा कि जीवन के निर्णायक क्षणों में अपनी मान्यताओं, मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति सच्चे बने रहना सबसे महत्वपूर्ण होता है।

आगे की राह

अदाणी ने विश्वास जताया कि देश के युवा, उद्यमी और नवाचारकर्ता आने वाले वर्षों में भारत को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँगे। उन्होंने कहा, "भारत की अगली पीढ़ी के निर्माता और नवप्रवर्तक हमारे बीच मौजूद हैं। हमें सिर्फ उन्हें पहचानना, उनका समर्थन करना और उन्हें अवसर देना है।" 'वंदे भारतम' के अगले संस्करण को लेकर उद्योग जगत में उत्सुकता है, और यह देखना होगा कि यह पहल टियर-2 व टियर-3 शहरों की प्रतिभाओं को किस हद तक मुख्यधारा की उद्यमिता से जोड़ पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 आवेदनों की संख्या प्रभावशाली है, लेकिन असली कसौटी यह है कि इनमें से कितने प्रतिभागियों को दीर्घकालिक फंडिंग, मेंटरशिप और बाज़ार तक पहुँच वास्तव में मिलती है। कॉर्पोरेट-प्रायोजित युवा उद्यमिता कार्यक्रमों का इतिहास बताता है कि बड़े आँकड़े अक्सर चुनिंदा विजेताओं तक सिमट जाते हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों की प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का दावा तभी सार्थक होगा जब इसके परिणाम पारदर्शी रूप से सामने आएँ। स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए इस संदेश की भावना सकारात्मक है, पर क्रियान्वयन का ब्यौरा अभी सामने आना बाकी है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौतम अदाणी की 'वंदे भारतम' पहल क्या है?
'वंदे भारतम' अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी द्वारा शुरू की गई एक उद्यमिता और नवाचार पहल है, जिसका उद्देश्य देश भर के युवा स्टार्टअप संस्थापकों, महिला उद्यमियों और ग्रामीण नवाचारकर्ताओं को निवेशकों व मेंटर्स से जोड़ना है। इसके पहले संस्करण को 26,000 से अधिक आवेदन मिले और हर राज्य का प्रतिनिधित्व रहा।
'वंदे भारतम' पहल में कितने आवेदन आए और किन्हें शामिल किया गया?
पहल के पहले संस्करण में देश भर से 26,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इसमें युवा स्टार्टअप संस्थापक, महिला उद्यमी, ग्रामीण नवाचारकर्ता और टियर-2 व टियर-3 शहरों के प्रतिभाशाली युवा शामिल रहे।
गौतम अदाणी ने स्वतंत्रता दिवस पर युवाओं के बारे में क्या कहा?
अदाणी ने कहा कि देश के युवाओं में अपार क्षमता है और यही प्रतिभाएँ भविष्य के 'विकसित भारत' के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। उन्होंने ज़ोर दिया कि भारत की अगली पीढ़ी के निर्माता और नवप्रवर्तक पहले से ही देश में मौजूद हैं — ज़रूरत केवल उन्हें पहचानने और उचित अवसर देने की है।
इस पहल से प्रतिभागियों को क्या फायदा हुआ?
प्रतिभागियों को सीधे निवेशकों और मेंटर्स से जुड़ने का अवसर मिला, जिससे उनके विचारों और व्यवसायों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम ने खासतौर पर उन युवाओं को मंच दिया जो टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों से आए थे।
क्या 'वंदे भारतम' का अगला संस्करण आएगा?
गौतम अदाणी ने पहले संस्करण के सफल समापन की घोषणा की है, लेकिन अगले संस्करण की तारीख या विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यह यात्रा जारी रहेगी और युवाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी पूरे समाज की है।
राष्ट्र प्रेस
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