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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता बरकरार रखी, H-1B पर 3 लाख भारतीयों को राहत

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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता बरकरार रखी, H-1B पर 3 लाख भारतीयों को राहत

सारांश

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के कार्यकारी आदेश को पलटते हुए जन्मसिद्ध नागरिकता को संवैधानिक रूप से बरकरार रखा — यह एच-1बी पर रह रहे 3 लाख भारतीयों के लिए बड़ी जीत है, जिनके बच्चे अब जन्म लेते ही अमेरिकी नागरिक होंगे। ट्रंप ने कांग्रेस से कानून बनाने की माँग की है।

मुख्य बातें

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 30 जून 2026 को जन्मसिद्ध नागरिकता को संवैधानिक रूप से बरकरार रखा।
एच-1बी वर्क वीजा पर रह रहे करीब 3 लाख भारतीयों के बच्चों को अब जन्म लेते ही अमेरिकी नागरिकता मिलेगी।
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत के फैसले में 14वें संशोधन की पुष्टि की।
राष्ट्रपति ट्रंप ने फैसले को 'देश के लिए बुरी खबर' बताया और ट्रुथ सोशल पर कांग्रेस से कानून बनाने की माँग की।
भारतीय मूल की सांसद प्रमिला जयपाल ने फैसले का स्वागत किया।
छात्र वीजा, विजिटर वीजा और अन्य अस्थायी वीजाधारकों के बच्चों पर भी यह फैसला लागू होगा।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 30 जून 2026 को एक ऐतिहासिक फैसले में अमेरिका में जन्म लेने वाले सभी बच्चों की नागरिकता के अधिकार को संवैधानिक रूप से बरकरार रखा, जिससे एच-1बी वर्क वीजा पर रह रहे करीब 3 लाख भारतीयों को बड़ी राहत मिली है। यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को सीधी चुनौती देता है, जिसमें अस्थायी वीजाधारकों के यहाँ जन्मे बच्चों को नागरिकता से वंचित करने की कोशिश की गई थी।

फैसले में क्या कहा गया

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत के फैसले में लिखा, 'हम संविधान के 14वें संशोधन में किए गए उस वादे को निभाते हैं, जिसमें अमेरिका में जन्म लेने वाले सभी लोगों को नागरिकता देने की बात कही गई है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकता का अर्थ देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूर्ण भागीदारी का अधिकार है — 'तब भी और आज भी।'

यह संशोधन 1866 में पारित और 1868 में लागू हुआ था। इसका मूल उद्देश्य गृहयुद्ध के बाद मुक्त किए गए दासों और उनके बच्चों को पूर्ण अमेरिकी नागरिकता प्रदान करना था। सुप्रीम कोर्ट ने इस सौ वर्ष से अधिक पुरानी व्यवस्था को बदलने की ट्रंप की कोशिश को खारिज कर दिया।

भारतीय प्रवासियों पर असर

एच-1बी वीजाधारक भारतीयों के लिए यह फैसला विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि ग्रीन कार्ड की लंबी प्रतीक्षा सूची के चलते इनमें से कई लोगों को स्वयं अमेरिकी नागरिकता पाने में कई दशक लग सकते हैं। इस फैसले के बाद छात्र वीजा, विजिटर वीजा और अन्य अस्थायी वीजा पर रहने वाले लोगों के बच्चों को भी जन्म लेते ही अमेरिकी नागरिकता मिलेगी और उन्हें जीवनभर अमेरिका में रहने का अधिकार होगा।

इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट संस्था के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने कहा, 'आज का फैसला इस बात की मजबूत पुष्टि करता है कि अमेरिका में किसे अपना माना जाता है। ट्रंप के इस आदेश से भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रवासी परिवार सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले थे।' उन्होंने आगे कहा, 'आज सुप्रीम कोर्ट ने उन परिवारों को देखा और कहा: आपके बच्चे अमेरिकी हैं। वे यहीं के हैं।'

ट्रंप की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति

फैसले पर नाराजगी जताते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे 'देश के लिए बुरी खबर' बताया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'हम कांग्रेस में कानून बनाकर इसे आसानी से बदल सकते हैं। इसके लिए संविधान में लंबा और मुश्किल संशोधन करने की ज़रूरत नहीं है।' हालाँकि, कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्ट संवैधानिक फैसले के बाद कोई भी साधारण कानून अदालत में टिकना मुश्किल होगा।

गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही यह कार्यकारी आदेश जारी किया था। उनका तर्क था कि यह कदम मुख्य रूप से तथाकथित 'बर्थ टूरिज़्म' को रोकने के लिए था — जिसमें कुछ लोग टूरिस्ट वीजा पर अमेरिका आकर बच्चे को जन्म दिलाते हैं। लेकिन उन्होंने यह प्रतिबंध एच-1बी और अन्य वैध अस्थायी वीजाधारकों पर भी लागू करने की कोशिश की, जो आलोचकों के अनुसार कानूनी रूप से देश में रह रहे लोगों के साथ अन्याय था।

राजनीतिक समर्थन और विरोध

भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर फैसले का स्वागत करते हुए लिखा, 'मैं खुद एक प्रवासी हूँ। मैं जानती हूँ कि जब इस देश के वादे निभाए जाते हैं तो उनका क्या मतलब होता है, और जब उन्हें तोड़ा जाता है तो उसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।' उन्होंने यह भी कहा, 'हमारे संविधान में कोई अपवाद नहीं है। जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता इस देश का कानून है, और आज सुप्रीम कोर्ट ने इसे फिर से स्पष्ट कर दिया है।'

आगे क्या होगा

ट्रंप प्रशासन कथित तौर पर अमेरिकी कांग्रेस के माध्यम से विधायी रास्ता अपनाने पर विचार कर रहा है, लेकिन इसके लिए दोनों सदनों में पर्याप्त बहुमत और संवैधानिक अनुकूलता — दोनों की ज़रूरत होगी। फिलहाल यह फैसला लाखों भारतीय प्रवासी परिवारों के लिए एक निर्णायक कानूनी सुरक्षा कवच बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो स्पष्ट रूप से कानूनी अतिक्रमण था। गौरतलब है कि ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा सूची में फँसे भारतीय तकनीकी कर्मचारियों के लिए जन्मसिद्ध नागरिकता अक्सर एकमात्र तत्काल कानूनी सुरक्षा होती है। ट्रंप का कांग्रेस से कानून बनवाने का आह्वान राजनीतिक रूप से महत्त्वाकांक्षी तो है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की इस स्पष्ट संवैधानिक व्याख्या के सामने कोई भी साधारण विधेयक टिकना मुश्किल होगा।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जन्मसिद्ध नागरिकता फैसले का क्या मतलब है?
सुप्रीम कोर्ट ने 30 जून 2026 को फैसला दिया कि अमेरिका में जन्म लेने वाले सभी बच्चों को — चाहे उनके माता-पिता किसी भी वीजा पर हों — अमेरिकी नागरिकता मिलेगी। यह संविधान के 14वें संशोधन की पुष्टि है, जो 1868 से लागू है।
इस फैसले से H-1B वीजा पर रह रहे भारतीयों को क्या फायदा होगा?
एच-1बी वीजाधारक भारतीयों के अमेरिका में जन्मे बच्चों को अब जन्म लेते ही अमेरिकी नागरिकता मिलेगी और उन्हें जीवनभर अमेरिका में रहने का अधिकार होगा। यह उन लाखों भारतीयों के लिए अहम है जो ग्रीन कार्ड के लिए दशकों तक प्रतीक्षा करते हैं।
ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की कोशिश क्यों की थी?
ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में कार्यकारी आदेश जारी कर कहा था कि अस्थायी वीजाधारकों और अवैध प्रवासियों के यहाँ जन्मे बच्चों को नागरिकता नहीं मिलेगी। उनका तर्क था कि यह 'बर्थ टूरिज़्म' रोकने के लिए ज़रूरी था, लेकिन यह प्रतिबंध एच-1बी जैसे वैध वीजाधारकों पर भी लागू किया गया था।
ट्रंप अब क्या करेंगे — क्या यह फैसला पलट सकता है?
ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस से कानून बनाकर इसे बदलने की माँग की है। हालाँकि, कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की इस स्पष्ट संवैधानिक व्याख्या के बाद कोई भी साधारण कानून अदालत में टिकना बेहद मुश्किल होगा।
14वाँ संशोधन क्या है और यह मामले से कैसे जुड़ा है?
अमेरिकी संविधान का 14वाँ संशोधन 1868 में लागू हुआ था, जिसका मूल उद्देश्य गृहयुद्ध के बाद मुक्त किए गए दासों को पूर्ण नागरिकता देना था। इसमें स्पष्ट लिखा है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले सभी व्यक्ति अमेरिकी नागरिक हैं — सुप्रीम कोर्ट ने इसी प्रावधान के आधार पर ट्रंप के आदेश को खारिज किया।
राष्ट्र प्रेस
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