छात्र वीजा पाबंदियों से अमेरिकी इनोवेशन को खतरा, द्विदलीय सांसदों ने ट्रंप प्रशासन को चेताया
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी कांग्रेस के एक द्विदलीय समूह ने 23 मई 2026 को ट्रंप प्रशासन को चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए प्रस्तावित वीजा पाबंदियाँ अमेरिका की तकनीकी बढ़त, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और अनुसंधान नेतृत्व को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती हैं। चार सांसदों ने होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी मार्कवेन मुलिन और ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट के डायरेक्टर रस वॉट को तीन पन्नों का पत्र लिखकर मौजूदा वीजा ढाँचे को बनाए रखने का आग्रह किया है।
पत्र में क्या है और किसने लिखा
इस पत्र पर प्रतिनिधियों सैम लिकार्डो, जे ओबरनोल्टे, मारिया सालाजार और राजा कृष्णमूर्ति के हस्ताक्षर हैं। पत्र में एफ-1 और जे-1 वीजा धारकों के लिए प्रचलित 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (स्थिति की अवधि) प्रणाली को एक निश्चित चार साल की प्रवेश अवधि से बदलने के प्रस्ताव का विरोध किया गया है। सांसदों का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) कार्यक्रमों में दीर्घकालिक पढ़ाई के लिए आवश्यक लचीलापन प्रदान करती है, जहाँ डॉक्टरेट की पढ़ाई अक्सर छह वर्षों से अधिक चलती है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
पत्र में सर्वे डेटा का हवाला देते हुए बताया गया कि यदि चार साल की तय सीमा लागू होती है, तो लगभग आधे अंतरराष्ट्रीय ग्रेजुएट छात्र और पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता अमेरिका में पढ़ाई का विकल्प नहीं चुनेंगे। सांसदों ने रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय छात्र हर वर्ष स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में लगभग $43 बिलियन का योगदान देते हैं और 3,55,000 से अधिक अमेरिकी नौकरियों को सहारा देते हैं। पत्र में आगाह किया गया कि यदि विदेशी STEM स्नातकों की संख्या में एक-तिहाई की भी कमी आई, तो अमेरिका अपने उच्च-कुशल STEM कार्यबल का 6 से 11 प्रतिशत खो सकता है।
GDP और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर चेतावनी
सांसदों ने अनुमान लगाया कि ऐसी कमी से एक दशक के भीतर अमेरिकी GDP में प्रतिवर्ष $240 बिलियन से $481 बिलियन तक की गिरावट आ सकती है। उन्होंने विशेष रूप से चीन का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय छात्रों को निकाला गया, तो वे अपने देश लौटकर विदेशी कंपनियों को अमेरिका के विरुद्ध प्रतिस्पर्धा में मदद करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी वर्चस्व की होड़ पहले से ही तेज है।
निगरानी बनाम प्रतिबंध का तर्क
सांसदों ने माना कि प्रशासन विदेशी छात्रों पर कड़ी निगरानी चाहता है और विदेशी विरोधियों को विश्वविद्यालयों के दुरुपयोग से रोकना चाहता है। हालाँकि, उन्होंने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय छात्र पहले से ही 'सबसे अच्छी तरह जाँचे-परखे और लगातार निगरानी में रहने वाले गैर-आप्रवासी समूहों' में शामिल हैं। उन्होंने स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम (SEVIS) का उल्लेख किया, जो डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी को विदेशी छात्रों की रियल-टाइम निगरानी की सुविधा देता है।
आगे क्या होगा
सांसदों ने प्रशासन से 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' प्रणाली को बनाए रखने और वीजा प्रोसेसिंग में ऐसी कुशल नीतियाँ सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों और विद्वानों के लिए स्थिर माहौल बनाए। गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह पत्र उस व्यापक बहस का हिस्सा है जो अमेरिका में आप्रवासन नीति और तकनीकी नवाचार के भविष्य को लेकर जारी है।