पुरी रथ यात्रा में भगदड़ जैसी स्थिति: एक बुजुर्ग की मौत, करीब 200 श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के पवित्र तटीय शहर पुरी में 16 जुलाई को विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा उत्सव के दौरान कथित भगदड़ जैसी स्थिति में दम घुटने से एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई। हालाँकि, इस मौत और भगदड़ की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सूत्रों के अनुसार, अभूतपूर्व भीड़ और लगातार बारिश के बीच घुटन तथा विभिन्न चोटों की शिकायत करने वाले करीब 200 मरीजों को पुरी के अस्पतालों और अस्थायी स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
घटनास्थल पर मौजूद एक श्रद्धालु ने बताया कि मरीचि कुंड चौक के पास या तो बाहरी घेरे की रस्सी की बैरिकेड गिर गई, या कुछ लोग अपना संतुलन खो बैठे और सड़क पर गिर पड़े। उनके अनुसार, करीब 40 से 50 लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरे, जिससे कई श्रद्धालु घायल हुए और चार से पाँच लोगों को गंभीर चोटें आई हैं।
उस श्रद्धालु ने यह भी बताया कि उन्होंने खुद करीब 20 लोगों को बचाया और उन्हें एम्बुलेंस से अस्पताल पहुँचाया। बाद में उन्हें एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत की जानकारी मिली। यह ध्यान देने योग्य है कि ये विवरण एक प्रत्यक्षदर्शी के बयान पर आधारित हैं और अधिकारियों द्वारा अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए गए हैं।
भीड़ और मौसम की दोहरी चुनौती
गुरुवार को पुरी में लाखों श्रद्धालु रथ यात्रा के दर्शन के लिए उमड़े। सूत्रों ने दावा किया कि इस वर्ष भीड़ अभूतपूर्व रही और ऊपर से लगातार बारिश ने स्थिति को और जटिल बना दिया। इन दोनों कारकों के संयोजन ने घुटन और दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा दिया। यह ऐसे समय में आया है जब बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की चुनौतियाँ राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
रथ यात्रा का आयोजन
विश्व प्रसिद्ध वार्षिक रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत निर्धारित समय से पहले 'पहंडी बीजे' अनुष्ठान के साथ हुई। इस अनुष्ठान में पवित्र भाई-बहनों और अन्य देवी-देवताओं को 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर से उनके सजे-धजे रथों तक भव्य जुलूस में ले जाया गया। घंटा, कहली और तेलिंगी बाजा जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि के बीच पुजारियों ने वैदिक मंत्रों का जाप किया और पारंपरिक ओडिसी कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुतियाँ दीं।
देवताओं को गुंडिचा मंदिर में नौ दिवसीय प्रवास के लिए ले जाया गया। हालाँकि 'पहंडी बीजे' की रस्में निर्धारित समय से पहले शुरू हुईं, उनके समापन में दो घंटे से अधिक की देरी हुई।
आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति
अभी तक प्रशासन की ओर से मौत या भगदड़ की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है। गौरतलब है कि इस प्रकार के बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की विफलता पहले भी त्रासदियों का कारण बन चुकी है। आने वाले घंटों में प्रशासनिक बयान और घायलों की स्थिति की जानकारी अपेक्षित है।