31 जुलाई 2026
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तलाबीरा-II क्लीन चिट के बाद शिवसेना (यूबीटी) का BJP पर हमला, मनमोहन सिंह की आत्मा से माफी की माँग

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तलाबीरा-II क्लीन चिट के बाद शिवसेना (यूबीटी) का BJP पर हमला, मनमोहन सिंह की आत्मा से माफी की माँग

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने तलाबीरा-II कोल ब्लॉक मामले में डॉ. मनमोहन सिंह के विरुद्ध कार्यवाही समाप्त की — 20 साल बाद। शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' में सवाल उठाया: जो न्याय जीते-जी न मिला, उसके लिए क्या BJP अब भी माफी माँगेगी?

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने जुलाई 2026 में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट मंजूर कर डॉ.
मनमोहन सिंह के विरुद्ध तलाबीरा-II कोल ब्लॉक मामले में आपराधिक कार्यवाही समाप्त की।
मामला 2005 में ओडिशा की तलाबीरा-2 खदान को हिंडाल्को को कथित अनियमित आवंटन से जुड़ा था; 2015 में विशेष अदालत ने समन जारी किया था।
शिवसेना (यूबीटी) ने मुखपत्र 'सामना' में संपादकीय प्रकाशित कर प्रधानमंत्री से डॉ.
सिंह की आत्मा से माफी माँगने की माँग की।
संपादकीय में कहा गया कि 20 वर्षों की राजनीतिक आरोपों की छाया ने विरोधियों को UPA सरकार के विरुद्ध अनुचित लाभ उठाने का मौका दिया।
मनमोहन सिंह का निधन 26 दिसंबर 2024 को हुआ था; यह क्लीन चिट मरणोपरांत मिली।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तलाबीरा-II कोल ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को मरणोपरांत क्लीन चिट दिए जाने के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा प्रहार किया। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट ने प्रधानमंत्री से डॉ. सिंह की आत्मा से सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की।

मामले की पृष्ठभूमि

तलाबीरा-II कोल ब्लॉक मामला वर्ष 2005 में ओडिशा स्थित तलाबीरा-2 कोयला खदान को हिंडाल्को कंपनी को कथित तौर पर अनियमित तरीके से आवंटित करने से जुड़ा था। 2015 में एक विशेष अदालत ने डॉ. सिंह सहित कई अन्य लोगों को समन जारी किया था, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। जुलाई 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए डॉ. सिंह के विरुद्ध चल रही आपराधिक कार्यवाही को पूरी तरह समाप्त कर दिया।

शिवसेना (यूबीटी) का रुख

'सामना' के संपादकीय में कहा गया कि डॉ. मनमोहन सिंह हर मायने में 'मिस्टर क्लीन' थे और उनकी ईमानदारी को किसी न्यायालय की मुहर की आवश्यकता कभी नहीं थी। संपादकीय में सवाल उठाया गया — 'क्या प्रधानमंत्री अब स्वीकार करेंगे कि वे आरोप झूठे और राजनीतिक रूप से प्रेरित थे? क्या वह देश से नहीं, तो कम से कम डॉ. सिंह की आत्मा से माफी माँगेंगे?'

राजनीतिक दाग की 20 साल की छाया

ठाकरे गुट ने तर्क दिया कि इस मामले से जुड़े राजनीतिक आरोपों की 20 वर्षों की छाया ने विरोधियों को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के दौरान और उसके बाद भी अनुचित राजनीतिक लाभ उठाने का अवसर दिया। आलोचकों का कहना है कि इस मामले का उपयोग चुनावी प्रचार में बार-बार किया गया, जबकि जाँच एजेंसी स्वयं अंततः क्लोजर रिपोर्ट पर पहुँची।

न्यायिक देरी पर सवाल

संपादकीय का समापन एक गंभीर प्रश्न के साथ हुआ — क्या देश को इस राजनीतिक दाग के धुलने पर राहत महसूस करनी चाहिए, या इस बात का दुख मनाना चाहिए कि डॉ. सिंह को यह न्याय उनके जीवनकाल में नहीं मिल सका। गौरतलब है कि डॉ. मनमोहन सिंह का निधन 26 दिसंबर 2024 को हुआ था। 'सामना' ने न्यायपालिका और राजनीतिक तंत्र दोनों से कानूनी प्रक्रिया में होने वाली अत्यधिक देरी पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।

BJP की प्रतिक्रिया

इस संपादकीय पर BJP की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही ऊँचा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका राजनीतिक संदेश उससे कहीं बड़ा है — यह उस आख्यान का अंत है जिसे एक दशक से अधिक समय तक चुनावी हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया। विडंबना यह है कि जिस व्यक्ति की ईमानदारी पर कभी उनके समर्थकों ने भी सवाल नहीं उठाया, उसे यह औपचारिक पुष्टि उनके जाने के बाद मिली। शिवसेना (यूबीटी) की माफी की माँग राजनीतिक रूप से तीखी है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भविष्य में जाँच एजेंसियों के उपयोग पर कोई संस्थागत जवाबदेही तय होगी — या यह भी महज एक और संपादकीय बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तलाबीरा-II कोल ब्लॉक मामला क्या था और इसमें मनमोहन सिंह का नाम कैसे आया?
यह मामला 2005 में ओडिशा की तलाबीरा-2 कोयला खदान को हिंडाल्को कंपनी को कथित अनियमित तरीके से आवंटित करने से जुड़ा था। 2015 में एक विशेष अदालत ने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह सहित कई लोगों को समन जारी किया था, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने कार्यवाही पर रोक लगाई।
सर्वोच्च न्यायालय ने मनमोहन सिंह को क्लीन चिट कैसे दी?
जुलाई 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह के विरुद्ध चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया। यह क्लीन चिट मरणोपरांत मिली, क्योंकि डॉ. सिंह का निधन 26 दिसंबर 2024 को हो चुका था।
शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' में BJP से माफी की माँग क्यों की?
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट ने तर्क दिया कि तलाबीरा-II मामले के राजनीतिक आरोपों का उपयोग 20 वर्षों तक UPA सरकार और डॉ. सिंह की छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए किया गया। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद 'सामना' ने प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या वे अब डॉ. सिंह की आत्मा से माफी माँगेंगे।
इस फैसले का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच राजनीतिक तनाव ऊँचा है। विपक्षी दलों के लिए यह BJP पर जवाबदेही का दबाव बनाने का अवसर है, जबकि BJP ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
क्या डॉ. मनमोहन सिंह को उनके जीवनकाल में इस मामले में राहत मिली थी?
नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने 2015 में कार्यवाही पर रोक लगाई थी, लेकिन अंतिम फैसला उनके निधन (26 दिसंबर 2024) के बाद जुलाई 2026 में आया। 'सामना' ने इसी विडंबना को रेखांकित करते हुए न्यायिक प्रक्रिया की अत्यधिक देरी पर सवाल उठाए।
राष्ट्र प्रेस
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