तलाबीरा-II क्लीन चिट के बाद शिवसेना (यूबीटी) का BJP पर हमला, मनमोहन सिंह की आत्मा से माफी की माँग
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तलाबीरा-II कोल ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को मरणोपरांत क्लीन चिट दिए जाने के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा प्रहार किया। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट ने प्रधानमंत्री से डॉ. सिंह की आत्मा से सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की।
मामले की पृष्ठभूमि
तलाबीरा-II कोल ब्लॉक मामला वर्ष 2005 में ओडिशा स्थित तलाबीरा-2 कोयला खदान को हिंडाल्को कंपनी को कथित तौर पर अनियमित तरीके से आवंटित करने से जुड़ा था। 2015 में एक विशेष अदालत ने डॉ. सिंह सहित कई अन्य लोगों को समन जारी किया था, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। जुलाई 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए डॉ. सिंह के विरुद्ध चल रही आपराधिक कार्यवाही को पूरी तरह समाप्त कर दिया।
शिवसेना (यूबीटी) का रुख
'सामना' के संपादकीय में कहा गया कि डॉ. मनमोहन सिंह हर मायने में 'मिस्टर क्लीन' थे और उनकी ईमानदारी को किसी न्यायालय की मुहर की आवश्यकता कभी नहीं थी। संपादकीय में सवाल उठाया गया — 'क्या प्रधानमंत्री अब स्वीकार करेंगे कि वे आरोप झूठे और राजनीतिक रूप से प्रेरित थे? क्या वह देश से नहीं, तो कम से कम डॉ. सिंह की आत्मा से माफी माँगेंगे?'
राजनीतिक दाग की 20 साल की छाया
ठाकरे गुट ने तर्क दिया कि इस मामले से जुड़े राजनीतिक आरोपों की 20 वर्षों की छाया ने विरोधियों को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के दौरान और उसके बाद भी अनुचित राजनीतिक लाभ उठाने का अवसर दिया। आलोचकों का कहना है कि इस मामले का उपयोग चुनावी प्रचार में बार-बार किया गया, जबकि जाँच एजेंसी स्वयं अंततः क्लोजर रिपोर्ट पर पहुँची।
न्यायिक देरी पर सवाल
संपादकीय का समापन एक गंभीर प्रश्न के साथ हुआ — क्या देश को इस राजनीतिक दाग के धुलने पर राहत महसूस करनी चाहिए, या इस बात का दुख मनाना चाहिए कि डॉ. सिंह को यह न्याय उनके जीवनकाल में नहीं मिल सका। गौरतलब है कि डॉ. मनमोहन सिंह का निधन 26 दिसंबर 2024 को हुआ था। 'सामना' ने न्यायपालिका और राजनीतिक तंत्र दोनों से कानूनी प्रक्रिया में होने वाली अत्यधिक देरी पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।
BJP की प्रतिक्रिया
इस संपादकीय पर BJP की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही ऊँचा है।