संजय राउत का बड़ा आरोप: चुनाव आयोग में मैच फिक्सिंग, ज्ञानेश कुमार को हटाने की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने 27 सितंबर 2026 को मुंबई में एक प्रेस वार्ता के दौरान चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। राउत ने कथित तौर पर दावा किया कि चुनाव आयोग में 'मैच फिक्सिंग' और 'वोट चोरी' होती है और एक सुनियोजित साजिश के तहत पूरे चुनाव को चुरा लिया जाता है।
राउत के मुख्य आरोप
राउत ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग को एक 'हथियार' के रूप में इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने कई बार चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएँ जताई हैं और इन मुद्दों को उठाया है, लेकिन अब केवल मुद्दा उठाने से काम नहीं चलेगा। अब हम सिर्फ यह मुद्दा नहीं उठाएंगे, अब हम ज्ञानेश कुमार को हटाएंगे।'
राउत ने यह भी कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों का एक साथ बैठकर तस्वीरें खिंचवाना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके फैसलों पर सवाल उठाता रहेगा।
पश्चिम बंगाल और ममता बनर्जी पर टिप्पणी
पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए राउत ने आरोप लगाया कि बंगाल का चुनाव भी 'चोरी' किया गया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को लगातार परेशान किया जा रहा है और यदि वे सभी को साथ लेकर संघर्ष करना चाहती हैं, तो उनकी पार्टी का उन्हें पूरा समर्थन है। राउत ने यह भी दावा किया कि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को तोड़ने का प्रयास किया गया है।
आंदोलन की घोषणा और विपक्षी एकता
राउत ने बताया कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने 4 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है। इसके अलावा, 2 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अगुवाई में एक आंदोलन किया जाएगा, जिसे शिवसेना (यूबीटी) ने समर्थन दिया है।
गौरतलब है कि 30 सितंबर को इंडिया ब्लॉक की एक महत्वपूर्ण बैठक निर्धारित है, जिसमें सभी प्रमुख नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। जो नेता दिल्ली नहीं पहुँच पाएंगे, वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लेंगे।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की स्वायत्तता और पारदर्शिता पर सवाल उठाते आ रहे हैं। राउत के ये आरोप बेहद तीखे हैं और इनसे आगामी चुनावी राजनीति में विपक्षी गोलबंदी की दिशा और तेज हो सकती है। चुनाव आयोग की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।