7 नवंबर 2026
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संजय राउत का BJP पर हमला: 'देश की नहीं, सिर्फ सांप्रदायिक राजनीति की परवाह'

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संजय राउत का BJP पर हमला: 'देश की नहीं, सिर्फ सांप्रदायिक राजनीति की परवाह'

सारांश

संजय राउत ने BJP पर दो-तरफा वार किया — वोट चोरी में धर्म की राजनीति लाने का आरोप और अयोध्या दीपोत्सव को चुनावी नाटक बताया। अखिलेश यादव के सवाल के बाद यूपी मतदाता सूची विवाद अब राष्ट्रीय बहस बन गया है।

मुख्य बातें

संजय राउत ने 7 नवंबर 2026 को मुंबई में BJP पर सांप्रदायिक राजनीति के आरोप लगाए।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में 1.27 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाने पर सीएम योगी से जवाब माँगा।
राउत ने कहा — वोट का अधिकार जाति-धर्म से नहीं, नागरिकता से जुड़ा है; वोट चोरी में धर्म की राजनीति गलत है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में एक जैसे पैटर्न का आरोप लगाया।
अयोध्या दीपोत्सव को राउत ने चुनाव नजदीक होने के कारण दीयों की संख्या बढ़ाने का चुनावी प्रदर्शन बताया।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने 7 नवंबर 2026 को मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा निशाना साधा और कहा कि इस पार्टी को देश की कोई परवाह नहीं है — उसे केवल सांप्रदायिक राजनीति करनी है। राउत ने वोट चोरी और मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में लाते हुए यह बयान दिया।

वोट चोरी विवाद की पृष्ठभूमि

राउत का यह बयान ऐसे समय में आया जब समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में 1.27 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सवाल दागे थे। अखिलेश ने पूछा कि मुख्यमंत्री को यह कैसे पता चला कि सूची से जिनके नाम हटाए गए, वे हिंदू थे। इस पर राउत ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सीएम योगी ने हिंदुओं के लिए एक अलग वर्ग बना दिया है, जो स्वयं में भेदभावपूर्ण है।

राउत का मुख्य तर्क: धर्म नहीं, अधिकार की लड़ाई

राउत ने स्पष्ट किया कि उनका रुख जाति या धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार पर आधारित है। उन्होंने कहा, 'जिसे भी वोट देने का अधिकार है, उसे वह अधिकार मिलना चाहिए, चाहे उसकी जाति या धर्म कुछ भी हो।' उनके अनुसार, वोट चोरी के मामले में धर्म की राजनीति लाकर BJP ने असली मुद्दे को भटकाने का काम किया है।

राउत ने आरोप लगाया कि यह सिलसिला नया नहीं है — पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र — तीनों में इसी पैटर्न पर काम किया गया है। उनके शब्दों में, 'ये लोग लगातार हिंदू-मुसलमान का राजनीतिक खेल खेलते रहते हैं।'

अयोध्या दीपोत्सव पर तंज

राउत ने अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव को लेकर भी सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में दीये जलाने की परंपरा पुरानी है, लेकिन इस बार चुनाव नजदीक होने के कारण दीयों की संख्या सामान्य से दो से पाँच लाख अधिक की गई है। उन्होंने कहा कि जब भगवान श्री राम 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, तब लोगों ने उनके स्वागत में दीये जलाकर अंधकार दूर किया था। 'अब सत्ता में बैठे लोग धर्म की राजनीति कर अंधकार बढ़ा रहे हैं और लोकतंत्र की हत्या की जा रही है' — यह उनकी सीधी चुनौती थी।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की दिशा

गौरतलब है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का यह विवाद विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के लिए एक साझा मुद्दा बन रहा है। शिवसेना (यूबीटी), सपा और अन्य विपक्षी दल मिलकर इस मसले को चुनाव आयोग तक ले जाने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक तीव्रता पकड़ सकता है, खासकर जब कई राज्यों में चुनावी कार्यक्रम नजदीक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहराई में देखें तो मतदाता सूची विवाद अब सिर्फ उत्तर प्रदेश का मसला नहीं रहा — यह विपक्ष की एक साझा चुनावी रणनीति का हिस्सा बन रहा है। अखिलेश यादव का सवाल — 'सीएम को कैसे पता कि हटाए गए वोटर हिंदू थे?' — एक पेचीदा प्रश्न है जिसका सरकार ने अब तक ठोस जवाब नहीं दिया। राउत का यह तर्क कि वोट चोरी को धर्म के चश्मे से देखना खुद एक सांप्रदायिक कार्रवाई है, वैचारिक रूप से तीखा है — लेकिन विपक्ष को यह भी बताना होगा कि वे इसका समाधान क्या सुझाते हैं, क्योंकि केवल आरोप लगाने से मतदाताओं के अधिकार बहाल नहीं होते।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 7 नवंबर 2026 को कहा कि BJP को देश की नहीं, केवल सांप्रदायिक राजनीति की परवाह है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में वोट चोरी के मामलों में भी हिंदू-मुसलमान की राजनीति की।
उत्तर प्रदेश मतदाता सूची विवाद क्या है?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में 1.27 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कैसे पता चला कि हटाए गए मतदाता हिंदू थे।
अयोध्या दीपोत्सव पर राउत का क्या कहना था?
राउत ने कहा कि अयोध्या में दीये जलाने की परंपरा पुरानी है, लेकिन इस बार चुनाव नजदीक होने के कारण सामान्य से दो से पाँच लाख अधिक दीये जलाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे चुनावी प्रदर्शन बताया और कहा कि धर्म की राजनीति से लोकतंत्र का अंधकार बढ़ रहा है।
SIR (मतदाता सूची पुनरीक्षण) विवाद क्यों उठा है?
विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में कथित तौर पर बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह लक्षित तरीके से किया गया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाता है।
इस विवाद का आगे क्या असर हो सकता है?
शिवसेना (यूबीटी), सपा और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को चुनाव आयोग तक ले जाने की तैयारी में हैं। आने वाले चुनावी राज्यों में यह मुद्दा बड़ी राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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