संजय राउत का CEC ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग और मकोका की धमकी, चुनाव आयोग को बताया 'माफिया संगठन'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध तीखा आक्रमण करते हुए संसद के दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव लाने और उन पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत मुकदमा चलाने की माँग की। राउत ने ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि वे 'केंद्र सरकार के एजेंट' के रूप में काम कर रहे हैं और भारत के चुनाव आयोग को 'माफिया संगठन' की भाँति संचालित कर रहे हैं।
मुख्य आरोप और बयान
राउत ने कहा, 'ज्ञानेश कुमार एक संवैधानिक माफिया हैं जो अपने बॉस, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आदेशों पर काम करते हैं। वह गृह मंत्री के 'छोटा शकील' हैं — एक राजनीतिक शार्पशूटर जो लोकतंत्र की हत्या कर रहा है।' उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सर्वदलीय सांसदों के हस्ताक्षर इकट्ठा करेगा।
वोटर पंजीकरण फॉर्म 6 में हाल ही में किए गए बदलावों पर राउत ने तीखी प्रतिक्रिया जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि नए फॉर्म में मतदाताओं से उनके दादा और परदादा की जानकारी माँगी जा रही है। राउत ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'हम उनसे पूछते हैं, क्या आपको पता है कि आपके अपने पूर्वज कौन थे?'
चुनावी परिणामों पर विवाद
राउत ने महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगियों की हालिया विधानसभा चुनावी जीत पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये जीतें कथित तौर पर ज्ञानेश कुमार द्वारा रची गई 'वोटर धोखाधड़ी' के ज़रिए हासिल की गई थीं। उन्होंने विपक्षी नेताओं — उद्धव ठाकरे, ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव — की उस संयुक्त माँग को भी दोहराया जिसमें इन चुनावों को रद्द कर नए सिरे से मतदान कराने की बात कही गई थी। राउत ने चुनाव आयोग को 'लोकतंत्र का कत्लखाना' करार दिया।
उद्धव ठाकरे की पूर्व माँग
इससे एक दिन पहले, बुधवार 23 सितंबर को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने CEC ज्ञानेश कुमार की 'तुरंत गिरफ्तारी' की माँग करते हुए उन पर लोकतंत्र विरोधी षड्यंत्र का आरोप लगाया था। ठाकरे ने महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को रद्द कर पुनः मतदान कराने की माँग भी की।
ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू द्वारा कथित तौर पर की गई 'अंदरूनी पोल-खोल' ने यह उजागर कर दिया है कि आयोग का प्रशासन कितना मनमाना था। उन्होंने मीडिया और नागरिकों से 'डर से बाहर निकलने' और संविधान की रक्षा के लिए आगे आने का आग्रह किया।
राजनीतिक परिदृश्य और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी गठबंधन और चुनाव आयोग के बीच तनाव लगातार बढ़ता दिख रहा है। गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत CEC को संसदीय महाभियोग की प्रक्रिया के बिना नहीं हटाया जा सकता, जिसके लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है — एक ऐसी शर्त जो वर्तमान संसद संरचना में विपक्ष के लिए पूरी करना अत्यंत कठिन है। आलोचकों का कहना है कि राउत की मकोका की माँग भी संवैधानिक बाधाओं के कारण व्यावहारिक रूप से लागू करना असंभव होगी, क्योंकि मकोका एक राज्य-स्तरीय कानून है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव के लिए किस हद तक सांसदों का समर्थन जुटा पाता है।