चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर प्रियंका चतुर्वेदी के सवाल, सीईसी ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 25 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर कड़े सवाल उठाए। यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। चतुर्वेदी का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में आम लोगों के मन में अपने वोट की वैधता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सीजेपी की कार्रवाई और इंडी गठबंधन की रणनीति
सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) द्वारा सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सीजेपी कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक राजनीतिक दबाव समूह है। उन्होंने इस संगठन के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके आंदोलनों के कारण पहले भी एक शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। चतुर्वेदी ने इंडी गठबंधन से एकजुट होकर सीईसी को हटाने की रणनीति तैयार करने की उम्मीद जताई।
चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेद
चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों का जिक्र करते हुए एक अहम सवाल उठाया — यदि सभी फैसले सहमति से लिए गए थे, तो दो चुनाव आयुक्त कैबिनेट सचिव से मुलाकात के लिए क्यों उत्सुक थे? उनके मुताबिक, इन मुलाकातों का मकसद चुनाव आयोग में मनमाने तरीके से काम किए जाने की शिकायत दर्ज कराना था।
उन्होंने फॉर्म-6, डेटा के केंद्रीकरण और चुनाव आयोग की विकेंद्रीकृत प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि ये वही चिंताएँ हैं जिन्हें दोनों चुनाव आयुक्तों ने औपचारिक रूप से उठाया था।
वोट की वैधता पर जनता की चिंता
चतुर्वेदी के अनुसार यह मामला अब केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों में भी यह सवाल उठ रहा है कि उनका वोट अधिकृत है या नहीं, और अधिकृत होने के बाद वह वास्तव में वैध है या नहीं। गौरतलब है कि चुनावी प्रक्रिया में जनविश्वास का क्षरण लोकतंत्र की बुनियाद को कमज़ोर करने वाला सबसे बड़ा खतरा माना जाता है।
बिहार में महिला सुरक्षा पर सवाल
समस्तीपुर और जमुई में महिलाओं के साथ हुई दुर्व्यवहार की घटनाओं पर चतुर्वेदी ने बिहार सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने जमुई की घटना को 'शर्मनाक' करार देते हुए कहा कि महिला के साथ बदसलूकी और मारपीट गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने जोर दिया कि महिलाओं को सुरक्षित माहौल देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और उन्हें उम्मीद है कि राज्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
आगे क्या होगा
विपक्षी दलों द्वारा सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की दिशा में आगे बढ़ने की खबरें हैं, हालाँकि इसकी औपचारिक समयसीमा अभी तय नहीं हुई है। चतुर्वेदी के बयान से स्पष्ट है कि इंडी गठबंधन इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर उठाने की तैयारी में है।