एसआईआर प्रक्रिया पर प्रियंका चतुर्वेदी का हमला: 'सीईसी ने जनता से धोखा किया, BJP क्यों कर रही बचाव?'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) की वरिष्ठ नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 29 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर तीखे सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर जनता के साथ धोखे का आरोप लगाया। उन्होंने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर भी निशाना साधते हुए पूछा कि आखिर वह चुनाव आयुक्त को बचाने में क्यों जुटी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में सीईसी को हटाने की रणनीति पर चर्चा को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है।
एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियाँ
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों के भीतर 14 बार एसआईआर प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई है, जो अपने आप में बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा, 'बिहार से लेकर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल तक, जहाँ-जहाँ एसआईआर की प्रक्रिया हुई है, उसने देश के हर नागरिक को कतार में खड़ा कर दिया है — जैसे हर नागरिक पर शक किया जा रहा हो कि वह इस देश का नागरिक ही नहीं है।'
उन्होंने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि मुंबई में उनके परिवार ने सभी दस्तावेज़ जमा करने के बावजूद उन्हें नोटिस मिला। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि स्वयं एक चुनाव आयुक्त को भी इस संदर्भ में नोटिस आया था, जो प्रक्रिया की विसंगतियों को उजागर करता है।
सीईसी पर इस्तीफे की माँग
चतुर्वेदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और देश को यह बताना चाहिए कि किस आधार पर और किसके निर्देश पर एसआईआर की यह पूरी प्रक्रिया इस प्रकार संचालित की गई। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'आज अगर मनमानी करते हुए विपक्ष के पीछे पड़ा जा रहा है, तो कल यही निशाना सत्तापक्ष पर भी साधा जा सकता है।' उनका तर्क था कि यह मामला केवल विपक्ष का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की निष्पक्षता का है।
दिल्ली पुलिस पर भेदभाव का आरोप
दिल्ली में मंत्री प्रवेश वर्मा द्वारा एक युवक को थप्पड़ मारने के मामले पर भी चतुर्वेदी ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में पुलिस ने मंत्री प्रवेश वर्मा के विरुद्ध केवल एनसीआर दर्ज की, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई। उनके अनुसार जनता के दबाव बढ़ने के बाद ही कार्रवाई की गई, जो स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण रवैये को दर्शाता है।
यूपीआई पर एमडीआर और आम कारोबारियों की चिंता
₹2,000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से इनकार के बाद चतुर्वेदी ने वित्त मंत्रालय और एनपीसीआई से स्पष्टीकरण की माँग की। उन्होंने कहा कि चाँदनी चौक से मुंबई तक के बाज़ारों में इस फैसले को लेकर हलचल मची हुई है।
उन्होंने पूछा कि इस अतिरिक्त शुल्क का बोझ कौन उठाएगा — छोटे एमएसएमई दुकानदार, रिटेल व्यापारी, हैंडलूम कारीगर, किसान या वे छोटे कारोबारी जिन्होंने डिजिटल भुगतान को अपनाया था? उनका कहना था कि इस पर कोई स्पष्टता नहीं है और यह अतिरिक्त खर्च सीधे उन लोगों पर पड़ेगा जिन्होंने डिजिटल इंडिया की मुहिम में भागीदारी की थी।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों का दबाव लगातार बढ़ रहा है और CWC की बैठक में इस मुद्दे पर रणनीति बनाई जा रही है। चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर उठते सवाल आगामी राज्य चुनावों की पृष्ठभूमि में और भी महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। यूपीआई एमडीआर मामले पर वित्त मंत्रालय की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार देशभर के छोटे व्यापारियों को है।