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प्रियंका चतुर्वेदी का आरोप: चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, BJP पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

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प्रियंका चतुर्वेदी का आरोप: चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, BJP पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद कहा कि चुनाव से ठीक पहले SIR चलाना और अपील का समय न देना मतदाताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। साथ ही उन्होंने CBI-ED के दुरुपयोग और NEET जैसे युवा मुद्दों पर सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा — चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया चलाना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
मुख्य आपत्ति: SIR में नाम हटने पर अपील के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता, चुनाव खत्म होने के बाद भी प्रक्रिया चलती रहती है।
CBI और ED पर आरोप — विपक्षी नेताओं को BJP में शामिल कराने के लिए एजेंसियों का दुरुपयोग।
NEET पेपर लीक , CBSE अनियमितताएँ और बेरोजगारी को युवाओं की प्रमुख समस्याएँ बताया।
केंद्र सरकार से शिक्षा और रोजगार पर ठोस कदम उठाने की माँग।

शिवसेना (यूबीटी) की प्रवक्ता और पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने 28 मई को मुंबई में सर्वोच्च न्यायालय के चुनाव आयोग संबंधी फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि असली सवाल चुनाव आयोग की शक्तियों का नहीं, बल्कि चुनाव से ऐन पहले विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया चलाने का है, जो नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय जाँच एजेंसियों का राजनीतिक हथियार के रूप में दुरुपयोग किया जा रहा है।

SIR पर मुख्य आपत्ति क्या है

चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि विवाद दो बिंदुओं पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, "असली मुद्दा यह नहीं था कि चुनाव आयोग SIR करवा सकता है या नहीं। दो मुख्य मुद्दे थे — पहला, क्या चुनाव आयोग इलेक्शन से ठीक पहले यह प्रक्रिया चला सकता है और दूसरा, जब लोगों के नाम SIR के तहत हटाए जाते हैं तो उन्हें अपील करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता।"

उनके अनुसार, चुनाव खत्म हो जाने के बाद भी प्रभावित मतदाता अपील प्रक्रिया में उलझे रहते हैं, जिससे उनका मताधिकार व्यावहारिक रूप से समाप्त हो जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी दलों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण की समयसीमा और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर निशाना साधते हुए चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि ये एजेंसियाँ किसी के इशारे पर काम कर रही हैं।

उन्होंने कहा, "आज जनता इनसे डर रही है। सबको पता है कि जब एजेंसी के अधिकारी किसी के यहाँ जाते हैं तो पूछताछ के लिए नहीं, बल्कि गिरफ्तारी के लिए जाते हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) विपक्ष के हर नेता को जेल भेजने की धमकी देकर उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने के लिए मजबूर कर रही है।" उन्होंने यह भी कहा कि जो नेता BJP में शामिल हो जाते हैं, उनके खिलाफ जाँच बंद कर दी जाती है।

युवाओं और शिक्षा पर सरकार को घेरा

चतुर्वेदी ने युवाओं के मुद्दों पर कहा कि NEET पेपर लीक, NEET-PG की बदहाली, सीटों की बिक्री और कट-ऑफ में अनियमितताएँ युवाओं के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं। CBSE मामलों में अनियमितताएँ और UGC दिशानिर्देशों का खराब क्रियान्वयन भी उनके निशाने पर रहा।

उन्होंने कहा कि बेरोजगारी चरम पर है और युवाओं तथा उनके माता-पिता में व्यापक गुस्सा फैला हुआ है। उनके अनुसार, BJP जमीनी हकीकत जानती है कि युवा इस सरकार से बेहद परेशान हैं।

सरकार से ठोस कदमों की माँग

चतुर्वेदी ने कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। उन्होंने माँग की कि केंद्र को इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। गौरतलब है कि विपक्ष लगातार चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और केंद्रीय एजेंसियों की स्वायत्तता पर सवाल उठाता रहा है, और यह बयान उसी कड़ी का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह सवाल मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर दब जाता है। एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप नए नहीं हैं, लेकिन NEET और बेरोजगारी को उसी बयान में जोड़ना एक व्यापक विपक्षी रणनीति का हिस्सा दिखता है — चुनावी प्रक्रिया और शासन विफलता को एक ही फ्रेम में रखना।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SIR प्रक्रिया क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR यानी विशेष सारांश पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची की समीक्षा कर नाम जोड़ता या हटाता है। विवाद इस बात पर है कि चुनाव से ठीक पहले यह प्रक्रिया चलाने से प्रभावित मतदाताओं को अपील का पर्याप्त समय नहीं मिलता।
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर प्रियंका चतुर्वेदी की मुख्य आपत्ति क्या है?
चतुर्वेदी का कहना है कि न्यायालय ने चुनाव आयोग की शक्तियों पर चर्चा की, लेकिन असली मुद्दा यह था कि चुनाव से पहले SIR चलाना और अपील की अपर्याप्त समयसीमा नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करती है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने CBI और ED पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि CBI और ED किसी के इशारे पर काम कर रही हैं और विपक्षी नेताओं को जेल की धमकी देकर BJP में शामिल कराया जा रहा है। उनके अनुसार, BJP में शामिल होने के बाद नेताओं के खिलाफ जाँच बंद कर दी जाती है।
युवाओं के किन मुद्दों पर चतुर्वेदी ने सरकार को घेरा?
उन्होंने NEET पेपर लीक, NEET-PG की बदहाली, CBSE में अनियमितताएँ, UGC दिशानिर्देशों का खराब क्रियान्वयन और चरम बेरोजगारी को युवाओं की प्रमुख समस्याएँ बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं और उनके माता-पिता में व्यापक गुस्सा है।
शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र सरकार से क्या माँग की है?
शिवसेना (यूबीटी) ने माँग की है कि केंद्र सरकार शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर गंभीरता से विचार करे और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाए।
राष्ट्र प्रेस
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