प्रियंका चतुर्वेदी का आरोप: चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, BJP पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) की प्रवक्ता और पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने 28 मई को मुंबई में सर्वोच्च न्यायालय के चुनाव आयोग संबंधी फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि असली सवाल चुनाव आयोग की शक्तियों का नहीं, बल्कि चुनाव से ऐन पहले विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया चलाने का है, जो नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय जाँच एजेंसियों का राजनीतिक हथियार के रूप में दुरुपयोग किया जा रहा है।
SIR पर मुख्य आपत्ति क्या है
चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि विवाद दो बिंदुओं पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, "असली मुद्दा यह नहीं था कि चुनाव आयोग SIR करवा सकता है या नहीं। दो मुख्य मुद्दे थे — पहला, क्या चुनाव आयोग इलेक्शन से ठीक पहले यह प्रक्रिया चला सकता है और दूसरा, जब लोगों के नाम SIR के तहत हटाए जाते हैं तो उन्हें अपील करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता।"
उनके अनुसार, चुनाव खत्म हो जाने के बाद भी प्रभावित मतदाता अपील प्रक्रिया में उलझे रहते हैं, जिससे उनका मताधिकार व्यावहारिक रूप से समाप्त हो जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी दलों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण की समयसीमा और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर निशाना साधते हुए चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि ये एजेंसियाँ किसी के इशारे पर काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा, "आज जनता इनसे डर रही है। सबको पता है कि जब एजेंसी के अधिकारी किसी के यहाँ जाते हैं तो पूछताछ के लिए नहीं, बल्कि गिरफ्तारी के लिए जाते हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) विपक्ष के हर नेता को जेल भेजने की धमकी देकर उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने के लिए मजबूर कर रही है।" उन्होंने यह भी कहा कि जो नेता BJP में शामिल हो जाते हैं, उनके खिलाफ जाँच बंद कर दी जाती है।
युवाओं और शिक्षा पर सरकार को घेरा
चतुर्वेदी ने युवाओं के मुद्दों पर कहा कि NEET पेपर लीक, NEET-PG की बदहाली, सीटों की बिक्री और कट-ऑफ में अनियमितताएँ युवाओं के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं। CBSE मामलों में अनियमितताएँ और UGC दिशानिर्देशों का खराब क्रियान्वयन भी उनके निशाने पर रहा।
उन्होंने कहा कि बेरोजगारी चरम पर है और युवाओं तथा उनके माता-पिता में व्यापक गुस्सा फैला हुआ है। उनके अनुसार, BJP जमीनी हकीकत जानती है कि युवा इस सरकार से बेहद परेशान हैं।
सरकार से ठोस कदमों की माँग
चतुर्वेदी ने कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। उन्होंने माँग की कि केंद्र को इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। गौरतलब है कि विपक्ष लगातार चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और केंद्रीय एजेंसियों की स्वायत्तता पर सवाल उठाता रहा है, और यह बयान उसी कड़ी का हिस्सा है।