23 सितंबर 2026
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प्रियंका चतुर्वेदी का आरोप: दस्तावेज जमा करने के बाद भी परिवार का नाम मुंबई वोटर लिस्ट से हटाया

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प्रियंका चतुर्वेदी का आरोप: दस्तावेज जमा करने के बाद भी परिवार का नाम मुंबई वोटर लिस्ट से हटाया

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया में सभी दस्तावेज जमा करने के बाद भी उनके परिवार का नाम मुंबई की फाइनल वोटर लिस्ट से हटाया गया। साथ ही, दो चुनाव आयुक्तों द्वारा 10 महीनों में 14 बार दर्ज आपत्तियों का हवाला देते हुए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की माँग की है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 23 सितंबर 2026 को आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया में दस्तावेज जमा करने के बाद भी उनके परिवार के तीनों सदस्यों का नाम मुंबई फाइनल वोटर लिस्ट से हटाया गया।
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार एसआईआर के क्रियान्वयन पर आधिकारिक आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं।
दोनों आयुक्तों ने नए मतदाताओं से जुड़े कुछ कदमों को 'अनधिकृत और गैरकानूनी' बताया और वोटर डेटाबेस के दिल्ली में केंद्रीकरण पर चेतावनी दी।
प्रियंका चतुर्वेदी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की माँग की।
चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 23 सितंबर 2026 को गंभीर आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनके पति, बेटे और उनका अपना नाम फाइनल मुंबई वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की माँग की है।

मतदाता सूची से नाम हटाने का मामला

प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि एसआईआर प्रक्रिया के अंतर्गत सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद उनके परिवार के तीनों सदस्यों का नाम प्रारंभिक वोटर लिस्ट में शामिल किया गया था। हालाँकि, बाद में उन्हें सूचित किया गया कि फाइनल वोटर लिस्ट से तीनों के नाम हटा दिए गए हैं और नाम पुनः शामिल करवाने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के साथ-साथ व्यक्तिगत रूप से चुनाव कार्यालय में उपस्थित होना होगा।

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, 'चलिए, मुंबई के चुनाव कार्यालय की लाइन में मिलते हैं।' यह टिप्पणी प्रक्रिया की जटिलता और बोझिलता पर उनकी नाराज़गी को दर्शाती है।

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियाँ और विवाद

चतुर्वेदी ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी हवाला दिया। उन्होंने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — जो तीन सदस्यीय आयोग में से दो हैं, जबकि तीसरे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं — ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आधिकारिक तौर पर एसआईआर के क्रियान्वयन पर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं।

चतुर्वेदी के अनुसार, इन दोनों आयुक्तों ने दावा किया है कि उन्हें मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया से अनजान रखा गया। उन्होंने नए मतदाताओं से जुड़े कुछ कदमों को 'अनधिकृत और गैरकानूनी' बताया और आगाह किया कि वोटर डेटाबेस का नियंत्रण दिल्ली में केंद्रीकृत किया जा रहा है, जिससे जमीनी अधिकारियों को दरकिनार किया जा रहा है।

चुनाव आयोग पर सीधा हमला

प्रियंका चतुर्वेदी ने इस खुलासे को आधार बनाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की माँग की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग कोई व्यक्तिगत जागीर नहीं है, बल्कि यह एक वैधानिक संस्था है जिसका उद्देश्य चुनावी रोल और चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। उनका कहना था कि दोनों आयुक्तों की आपत्तियाँ स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि संस्था के भीतर यह मानदंड पूरा नहीं हो रहा था।

एसआईआर प्रक्रिया और व्यापक संदर्भ

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र में एसआईआर के जरिए मतदाता सूचियों के व्यापक पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है। गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर पहले भी सवाल उठाए हैं, और यह आरोप कि एक वरिष्ठ राजनेता के परिवार का नाम भी सूची से हट गया, इस बहस को और तेज कर सकता है। आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची में व्यापक परिवर्तन चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर डाल सकते हैं।

आगे क्या होगा

प्रियंका चतुर्वेदी के इस ऐलान के बाद कि वे स्वयं मुंबई के चुनाव कार्यालय जाएँगी, यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक ध्यान खींच सकता है। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग इन आरोपों और आंतरिक असहमति के मुद्दे पर क्या स्पष्टीकरण देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सही है, तो संघीय चुनावी ढाँचे के लिए बड़ी चिंता का विषय है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि आयुक्तों की आंतरिक असहमति की यह 'लीक' स्वयं एक बड़ी संस्थागत कहानी है, जिसकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंका चतुर्वेदी ने वोटर लिस्ट को लेकर क्या आरोप लगाया है?
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र की एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के बाद भी उनके पति, बेटे और उनका अपना नाम मुंबई की फाइनल वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। उन्होंने यह जानकारी एक्स पर साझा करते हुए चुनाव कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की बात कही।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) क्या है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक विशेष प्रक्रिया है जिसमें नागरिकों के नाम जोड़े, हटाए या बहाल किए जाते हैं। महाराष्ट्र में यह प्रक्रिया फिलहाल जारी है और इसे लेकर विपक्षी दलों ने कई आपत्तियाँ उठाई हैं।
दो चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर पर क्या आपत्तियाँ जताई हैं?
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आधिकारिक रूप से एसआईआर के क्रियान्वयन पर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। उन्होंने कहा है कि उन्हें मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया से अनजान रखा गया और नए मतदाताओं से जुड़े कुछ कदमों को 'अनधिकृत और गैरकानूनी' बताया — यह जानकारी प्रियंका चतुर्वेदी की एक्स पोस्ट पर आधारित है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा क्यों माँगा?
चतुर्वेदी का कहना है कि दोनों आयुक्तों की आपत्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियाँ हैं। उन्होंने कहा कि आयोग एक वैधानिक संस्था है और इसे निष्पक्ष रूप से चलाया जाना चाहिए, व्यक्तिगत विवेक से नहीं।
इस मामले पर चुनाव आयोग की क्या प्रतिक्रिया है?
अभी तक चुनाव आयोग की ओर से प्रियंका चतुर्वेदी के आरोपों या दोनों आयुक्तों की कथित आपत्तियों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में आयोग का स्पष्टीकरण इस विवाद की दिशा तय करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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