प्रियंका चतुर्वेदी का आरोप: दस्तावेज जमा करने के बाद भी परिवार का नाम मुंबई वोटर लिस्ट से हटाया
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 23 सितंबर 2026 को गंभीर आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनके पति, बेटे और उनका अपना नाम फाइनल मुंबई वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की माँग की है।
मतदाता सूची से नाम हटाने का मामला
प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि एसआईआर प्रक्रिया के अंतर्गत सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद उनके परिवार के तीनों सदस्यों का नाम प्रारंभिक वोटर लिस्ट में शामिल किया गया था। हालाँकि, बाद में उन्हें सूचित किया गया कि फाइनल वोटर लिस्ट से तीनों के नाम हटा दिए गए हैं और नाम पुनः शामिल करवाने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के साथ-साथ व्यक्तिगत रूप से चुनाव कार्यालय में उपस्थित होना होगा।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, 'चलिए, मुंबई के चुनाव कार्यालय की लाइन में मिलते हैं।' यह टिप्पणी प्रक्रिया की जटिलता और बोझिलता पर उनकी नाराज़गी को दर्शाती है।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियाँ और विवाद
चतुर्वेदी ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी हवाला दिया। उन्होंने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — जो तीन सदस्यीय आयोग में से दो हैं, जबकि तीसरे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं — ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आधिकारिक तौर पर एसआईआर के क्रियान्वयन पर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं।
चतुर्वेदी के अनुसार, इन दोनों आयुक्तों ने दावा किया है कि उन्हें मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया से अनजान रखा गया। उन्होंने नए मतदाताओं से जुड़े कुछ कदमों को 'अनधिकृत और गैरकानूनी' बताया और आगाह किया कि वोटर डेटाबेस का नियंत्रण दिल्ली में केंद्रीकृत किया जा रहा है, जिससे जमीनी अधिकारियों को दरकिनार किया जा रहा है।
चुनाव आयोग पर सीधा हमला
प्रियंका चतुर्वेदी ने इस खुलासे को आधार बनाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की माँग की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग कोई व्यक्तिगत जागीर नहीं है, बल्कि यह एक वैधानिक संस्था है जिसका उद्देश्य चुनावी रोल और चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। उनका कहना था कि दोनों आयुक्तों की आपत्तियाँ स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि संस्था के भीतर यह मानदंड पूरा नहीं हो रहा था।
एसआईआर प्रक्रिया और व्यापक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र में एसआईआर के जरिए मतदाता सूचियों के व्यापक पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है। गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर पहले भी सवाल उठाए हैं, और यह आरोप कि एक वरिष्ठ राजनेता के परिवार का नाम भी सूची से हट गया, इस बहस को और तेज कर सकता है। आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची में व्यापक परिवर्तन चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर डाल सकते हैं।
आगे क्या होगा
प्रियंका चतुर्वेदी के इस ऐलान के बाद कि वे स्वयं मुंबई के चुनाव कार्यालय जाएँगी, यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक ध्यान खींच सकता है। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग इन आरोपों और आंतरिक असहमति के मुद्दे पर क्या स्पष्टीकरण देता है।