4 अक्टूबर 2026
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अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को लिखा पत्र, रसायन समिति चेयरपर्सन नियुक्ति रद्द करने की माँग

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अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को लिखा पत्र, रसायन समिति चेयरपर्सन नियुक्ति रद्द करने की माँग

सारांश

तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर रसायन एवं उर्वरक समिति की चेयरपर्सन नियुक्ति को चुनौती दी — आरोप है कि नियुक्त सदस्य के विरुद्ध दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता याचिका लंबित है और पार्टी के नामांकन को दरकिनार किया गया।

मुख्य बातें

अभिषेक बनर्जी ने 3 अक्टूबर 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर रसायन एवं उर्वरक संसदीय समिति के चेयरपर्सन की नियुक्ति पर आपत्ति जताई।
आरोप है कि नियुक्त सदस्य के विरुद्ध दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता याचिका लोकसभा अध्यक्ष के पास लंबित है।
बनर्जी ने 23 सितंबर 2026 को ही अनुरोध किया था कि संबंधित 20 सदस्यों को समिति नियुक्तियों से बाहर रखा जाए।
संबंधित सदस्य ने NCPI से संबद्धता का दावा किया है, जो लंबित अयोग्यता कार्यवाही में विवादित है।
बनर्जी ने नियुक्ति वापस लेने, AITC नामित सदस्य को अध्यक्षता देने और लंबित याचिकाओं पर शीघ्र निर्णय की माँग की है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने 3 अक्टूबर 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को औपचारिक पत्र लिखकर रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय स्थायी समिति के चेयरपर्सन की नियुक्ति को चुनौती दी है। उन्होंने यह नियुक्ति तत्काल वापस लेने और समिति की अध्यक्षता AITC द्वारा विधिवत नामित सदस्य को सौंपने की माँग की है।

विवाद की जड़: अयोग्यता याचिका और विलय का मामला

बनर्जी ने अपने पत्र में 3 अक्टूबर 2026 के लोकसभा बुलेटिन-पार्ट II संख्या 6185 का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि जिस सदस्य को समिति का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है, उनके विरुद्ध दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता की याचिका लोकसभा अध्यक्ष के पास पहले से लंबित है। उनके अनुसार, ऐसे किसी सदस्य को संसदीय समिति का नेतृत्व सौंपना संसदीय परंपराओं और मर्यादा के प्रतिकूल है।

उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित सदस्य ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) से अपनी संबद्धता का दावा विलय के आधार पर किया है, जबकि यह विलय स्वयं लंबित अयोग्यता कार्यवाही में विवाद का विषय है। बनर्जी ने पूछा कि डिजिटल संसद की वेबसाइट पर AITC के 28 सदस्य अभी भी दर्ज हैं, तो यह समिति किस दल के कोटे में आवंटित की गई।

23 सितंबर का पूर्व अनुरोध और उसकी अनदेखी

बनर्जी के अनुसार उन्होंने 23 सितंबर 2026 को भेजे पत्रों में स्पष्ट रूप से अनुरोध किया था कि अयोग्यता याचिकाओं पर अंतिम निर्णय होने तक संबंधित 20 सदस्यों को विभाग संबंधी संसदीय स्थायी समितियों में नियुक्ति के लिए विचार से बाहर रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि लोकसभा की एक स्थायी समिति की अध्यक्षता AITC के पास बनाए रखी जाए, और इसके लिए पार्टी ने मौजूदा चेयरपर्सन को ही जारी रखने का नामांकन भी भेजा था।

बनर्जी ने आरोप लगाया कि रसायन एवं उर्वरक समिति में की गई नई नियुक्ति में पार्टी की आपत्ति और उसके नामांकन — दोनों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच संसदीय समितियों के आवंटन को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है।

बनर्जी के दो प्रमुख सवाल

अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दो स्पष्ट प्रश्न रखे। पहला — यदि यह अध्यक्ष पद AITC के कोटे में है, तो पार्टी की स्पष्ट इच्छा के विरुद्ध उसके नामित सदस्य को क्यों बदला गया? दूसरा — यदि यह पद NCPI को आवंटित किया गया है, तो किस आदेश के आधार पर उसकी पार्टी संबद्धता को मान्यता दी गई और समिति की अध्यक्षता उसे दी गई?

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नियुक्ति को किसी भी स्थिति में AITC के हिस्से में दी गई समिति की अध्यक्षता के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

माँगें और आगे की राह

बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से तीन माँगें रखी हैं: पहली, रसायन एवं उर्वरक समिति के चेयरपर्सन की नई नियुक्ति तत्काल वापस ली जाए; दूसरी, समिति की अध्यक्षता AITC द्वारा विधिवत नामित सदस्य को सौंपी जाए; और तीसरी, संबंधित 20 सदस्यों के विरुद्ध लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। उन्होंने अपने पत्र में उठाए गए सभी सवालों पर लोकसभा अध्यक्ष से लिखित जवाब भी माँगा है। गौरतलब है कि यह विवाद संसद के शीतकालीन सत्र से पहले विपक्ष और सरकार के बीच संसदीय प्रक्रियाओं को लेकर बढ़ते टकराव की एक और कड़ी बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी जड़ें दसवीं अनुसूची की उस पुरानी खामी में हैं जहाँ अयोग्यता याचिकाएँ वर्षों तक अनिर्णीत पड़ी रहती हैं और इस बीच संबंधित सदस्य संसदीय प्रक्रियाओं में पूरी तरह भाग लेते रहते हैं। TMC का यह कदम विपक्षी एकजुटता से अधिक अपने संसदीय कोटे की रक्षा की रणनीति है — जो स्वयं में वैध है, लेकिन यह भी रेखांकित करता है कि दल-बदल विरोधी कानून के क्रियान्वयन में स्पीकर के विवेकाधिकार पर कोई समयसीमा न होना सभी दलों के लिए एक हथियार और एक जोखिम दोनों बन चुका है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को पत्र क्यों लिखा?
अभिषेक बनर्जी ने रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय स्थायी समिति के चेयरपर्सन की नियुक्ति पर आपत्ति जताने के लिए 3 अक्टूबर 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा। उनका आरोप है कि नियुक्त सदस्य के विरुद्ध दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता याचिका लंबित है और AITC के नामांकन को नजरअंदाज किया गया।
दसवीं अनुसूची की अयोग्यता याचिका का इस विवाद से क्या संबंध है?
दसवीं अनुसूची दल-बदल के आधार पर सांसदों की अयोग्यता से संबंधित है। बनर्जी का कहना है कि जिस सदस्य को चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है, उनके विरुद्ध ऐसी ही एक याचिका लोकसभा अध्यक्ष के पास लंबित है, और इस स्थिति में उन्हें समिति का नेतृत्व देना संसदीय मर्यादा के विरुद्ध है।
NCPI और AITC के बीच विवाद क्या है?
नियुक्त सदस्य ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) से अपनी संबद्धता का दावा विलय के आधार पर किया है। बनर्जी के अनुसार यह विलय स्वयं लंबित अयोग्यता कार्यवाही में विवादित है, और डिजिटल संसद की वेबसाइट पर अभी भी AITC के 28 सदस्य दर्ज हैं।
TMC ने 23 सितंबर 2026 के पत्र में क्या माँगा था?
23 सितंबर 2026 को भेजे पत्रों में अभिषेक बनर्जी ने अनुरोध किया था कि अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय होने तक संबंधित 20 सदस्यों को संसदीय स्थायी समितियों में नियुक्ति से बाहर रखा जाए और एक स्थायी समिति की अध्यक्षता AITC के पास बनाए रखी जाए।
अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से क्या माँगें रखी हैं?
बनर्जी ने तीन माँगें रखी हैं — रसायन एवं उर्वरक समिति के चेयरपर्सन की नियुक्ति वापस ली जाए, समिति की अध्यक्षता AITC द्वारा नामित सदस्य को दी जाए, और लंबित 20 अयोग्यता याचिकाओं पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। उन्होंने लिखित जवाब भी माँगा है।
राष्ट्र प्रेस
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