25 अगस्त 2026
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युवा मोदी के साथ, राहुल गांधी के नहीं: भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी का कांग्रेस पर तीखा हमला

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युवा मोदी के साथ, राहुल गांधी के नहीं: भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी का कांग्रेस पर तीखा हमला

सारांश

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने पुणे में हुए 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को 'फेक पीआर' करार दिया और कहा कि अजय माकन व चरणजीत सिंह चन्नी जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की चुप्पी खुद पार्टी के भीतर बिखराव की कहानी कह रही है।

मुख्य बातें

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 25 अगस्त को राहुल गांधी के युवा-समर्थन के दावे को खारिज किया।
कांग्रेस के पुणे कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' को 'फेक पीआर' बताया; अजय माकन और चरणजीत सिंह चन्नी की सोशल मीडिया पर चुप्पी को उठाया मुद्दा।
भंडारी का दावा — 249 कांग्रेस नेताओं में से केवल 130 ने राहुल गांधी के पक्ष में प्रतिक्रिया दी।
भाजपा ने कांग्रेस में अंतर्कलह का आरोप लगाते हुए कहा कि जमीनी नेता राहुल गांधी की पहुँच को लेकर संशय में हैं।
भंडारी ने कहा कि दिल्ली में राहुल गांधी को 'रिलॉन्च' करने की कोशिशें बार-बार नाकाम रही हैं।

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने मंगलवार, 25 अगस्त को नई दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि देश के युवा राहुल गांधी के साथ नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं। भंडारी ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर ही 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को लेकर उत्साह का अभाव है, जो पार्टी में गहरी अंतर्कलह की ओर इशारा करता है।

'छात्रों की गूंज' पर भाजपा का पलटवार

भंडारी ने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और राहुल गांधी 'फेक पीआर' के सहारे यह धारणा बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि देश के छात्र उनके साथ हैं। उन्होंने कहा, पुणे में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी के वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी, जो खुद पार्टी के भीतर उत्साह की कमी को उजागर करता है।

माकन और चन्नी की चुप्पी पर सवाल

भंडारी ने विशेष रूप से कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य अजय माकन और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का नाम लेते हुए कहा कि इन वरिष्ठ नेताओं ने पुणे कार्यक्रम के बारे में अपने किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई सकारात्मक टिप्पणी नहीं की। उनके अनुसार, यह मौन इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस के जमीनी नेता भी मानते हैं कि राहुल गांधी का आम मतदाताओं से वास्तविक जुड़ाव नहीं है।

249 में से 130 नेताओं का समर्थन — भाजपा ने बताया कमज़ोरी

भंडारी ने दावा किया कि 249 कांग्रेस नेताओं में से केवल 130 नेताओं ने राहुल गांधी के पक्ष में अपनी बात रखी है। उन्होंने इसे पार्टी के भीतर बिखराव का संकेत बताया और कहा कि चुनावी राज्यों में काम करने वाले कांग्रेस नेता यह स्वीकार कर चुके हैं कि जमीनी स्तर पर राहुल गांधी की पकड़ कमज़ोर है।

राहुल गांधी को 'रिलॉन्च' करने की कोशिश पर तंज

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि दिल्ली में एक लॉबी राहुल गांधी को बार-बार 'रिलॉन्च' करने की कोशिश में लगी रहती है, लेकिन हर बार देश की जनता इन्हें आईना दिखा देती है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद यह प्रयास जारी रहते हैं। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस युवाओं के बीच अपनी पहुँच बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से कार्यक्रम आयोजित कर रही है।

कांग्रेस में अंतर्कलह के संकेत

भंडारी ने अपने बयान में यह भी कहा कि जब कांग्रेस वर्किंग कमेटी के नेता ही पार्टी के प्रमुख कार्यक्रम पर चुप्पी साध लेते हैं, तो यह पार्टी के भीतर गहरे मतभेदों की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि चन्नी जैसे चुनावी राज्यों के अनुभवी नेताओं की निष्क्रियता यह बताती है कि कांग्रेस नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। आने वाले विधानसभा चुनावों में यह अंतर्द्वंद्व कांग्रेस की रणनीति को किस हद तक प्रभावित करेगा, यह देखना बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह निष्कर्ष निकालना कि 130 नेताओं का समर्थन 'कमज़ोरी' है — यह भाजपा की व्याख्या है, तथ्य नहीं। असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस का युवा-जुड़ाव कार्यक्रम सोशल मीडिया पोस्ट से परे जमीनी स्तर पर कोई ठोस असर छोड़ रहा है — और इसका जवाब अगले विधानसभा चुनावों के नतीजे देंगे।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी के बारे में क्या कहा?
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 25 अगस्त को कहा कि देश के युवा राहुल गांधी के साथ नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैं। उन्होंने कांग्रेस के पुणे कार्यक्रम को 'फेक पीआर' करार दिया।
'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम क्या है?
'छात्रों की गूंज' कांग्रेस द्वारा आयोजित एक युवा-केंद्रित कार्यक्रम है, जिसे राहुल गांधी की उपस्थिति में पुणे में आयोजित किया गया। भाजपा ने इसे 'फेक पीआर' बताते हुए कांग्रेस नेताओं की चुप्पी को इसकी विफलता का प्रमाण कहा।
अजय माकन और चरणजीत सिंह चन्नी की चुप्पी क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
भाजपा के अनुसार, अजय माकन और चरणजीत सिंह चन्नी कांग्रेस वर्किंग कमेटी के वरिष्ठ सदस्य हैं। उनका पुणे कार्यक्रम पर सोशल मीडिया पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न देना भाजपा ने पार्टी के भीतर अंतर्कलह के प्रमाण के रूप में पेश किया।
क्या कांग्रेस में वाकई अंतर्कलह है?
भाजपा का दावा है कि 249 कांग्रेस नेताओं में से केवल 130 ने राहुल गांधी के पक्ष में प्रतिक्रिया दी, जो पार्टी में मतभेद का संकेत है। हालाँकि कांग्रेस की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इस विवाद का आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ सकता है?
भाजपा इस बयानबाज़ी के ज़रिए कांग्रेस के युवा-आउटरीच अभियान को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही है। चुनावी राज्यों में कांग्रेस नेताओं की सक्रियता और जमीनी जुड़ाव आने वाले विधानसभा चुनावों में इस दावे की असली परीक्षा होगी।
राष्ट्र प्रेस
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