युवा मोदी के साथ, राहुल गांधी के नहीं: भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी का कांग्रेस पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने मंगलवार, 25 अगस्त को नई दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि देश के युवा राहुल गांधी के साथ नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं। भंडारी ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर ही 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को लेकर उत्साह का अभाव है, जो पार्टी में गहरी अंतर्कलह की ओर इशारा करता है।
'छात्रों की गूंज' पर भाजपा का पलटवार
भंडारी ने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और राहुल गांधी 'फेक पीआर' के सहारे यह धारणा बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि देश के छात्र उनके साथ हैं। उन्होंने कहा, पुणे में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी के वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी, जो खुद पार्टी के भीतर उत्साह की कमी को उजागर करता है।
माकन और चन्नी की चुप्पी पर सवाल
भंडारी ने विशेष रूप से कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य अजय माकन और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का नाम लेते हुए कहा कि इन वरिष्ठ नेताओं ने पुणे कार्यक्रम के बारे में अपने किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई सकारात्मक टिप्पणी नहीं की। उनके अनुसार, यह मौन इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस के जमीनी नेता भी मानते हैं कि राहुल गांधी का आम मतदाताओं से वास्तविक जुड़ाव नहीं है।
249 में से 130 नेताओं का समर्थन — भाजपा ने बताया कमज़ोरी
भंडारी ने दावा किया कि 249 कांग्रेस नेताओं में से केवल 130 नेताओं ने राहुल गांधी के पक्ष में अपनी बात रखी है। उन्होंने इसे पार्टी के भीतर बिखराव का संकेत बताया और कहा कि चुनावी राज्यों में काम करने वाले कांग्रेस नेता यह स्वीकार कर चुके हैं कि जमीनी स्तर पर राहुल गांधी की पकड़ कमज़ोर है।
राहुल गांधी को 'रिलॉन्च' करने की कोशिश पर तंज
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि दिल्ली में एक लॉबी राहुल गांधी को बार-बार 'रिलॉन्च' करने की कोशिश में लगी रहती है, लेकिन हर बार देश की जनता इन्हें आईना दिखा देती है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद यह प्रयास जारी रहते हैं। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस युवाओं के बीच अपनी पहुँच बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
कांग्रेस में अंतर्कलह के संकेत
भंडारी ने अपने बयान में यह भी कहा कि जब कांग्रेस वर्किंग कमेटी के नेता ही पार्टी के प्रमुख कार्यक्रम पर चुप्पी साध लेते हैं, तो यह पार्टी के भीतर गहरे मतभेदों की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि चन्नी जैसे चुनावी राज्यों के अनुभवी नेताओं की निष्क्रियता यह बताती है कि कांग्रेस नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। आने वाले विधानसभा चुनावों में यह अंतर्द्वंद्व कांग्रेस की रणनीति को किस हद तक प्रभावित करेगा, यह देखना बाकी है।